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संपत्ति कर चोरी आती है आपराधिक मामलों के दायरे में
अमरपाल सी चड्ढा /  September 01, 2013

आयकर रिटर्न दाखिल करने की समय सीमा हाल में ही समाप्त हुई है। ज्यादातर करदाताओं ने कर रिटर्न दाखिल कर दिया होगा। शायद कुछ ही करदाताओं को मालूम होगा कि उन्हें वेल्थ टैक्स  या संपत्ति कर भी रिटर्न दाखिल करना है।

हरेक व्यक्ति और हिंदू अविभाजित परिवार (एचयूएफ), जिनकी सालाना आय 30 लाख रुपये से अधिक है, उन्हें राजस्व अधिकारियों के पास वेल्थ टैक्स का भुगतान करना होता है। इस समय यह कर 1 प्रतिशत है।

वेल्थ या धन में कुछ तय परिसंपत्तियां जैसे इमारत या जमीन (कुछ अपवादों को छोड़कर), मोटर कार, आभूषण, सर्राफा, यॉट, नाव और विमान (व्यावसायिक उद्देश्यों को छोड़कर), शहर में जमीन और पास में 50,000 रुपये से अधिक नकदी आदि शामिल हैं। इन परिसंपत्तियों के ऊपर किसी तरह के कर्ज को परिसंपत्तियों की कीमतों में घटा दिया जाता है। संपत्ति कर की गणना के लिए परिसंपत्तियों की कीमत वित्त वर्ष की अंतिम तारीख (31 मार्च) के हिसाब से तय होगी। संपत्ति कर की गणना के लिए कुछ निश्चित दिशानिर्देशों का पालन करना होता है।

एक उदाहरण से इसे समझने की कोशिश करते हैं। राहुल सिंघल के पास 1 करोड़ रुपये मूल्य की आवासीय जायदाद (जिस पर 70 लाख रुपये बकाया है), 13 लाख रुपये मूल्य की कार, 40 लाख रुपये के आभूषण और पास में 2 लाख रुपये नकदी है। संपत्ति कर की गणना के लिए हमें सबसे पहले सिंघल की कुल आय की गणनाा करने की दरकार होगी। सिंघल की कुल संपत्ति 25 लाख रुपये होती है।

अपनी स्वामित्व वाली आवासीय जायदाद या भूंखड जो 500 वर्गमीटर से अधिक क्षेत्र में है, वे संपत्ति कर से मुक्त होते हैं। इसके साथ ही एक आवासीय घर या व्यावसायिक इमारत संपत्ति के रूप में रखी जाती है या कोई घर जिसे करदाता अपना पेशा चलाने या व्यावसायिक इस्तेमाल के लिए रखता है, वे भी संपत्ति कर के दायरे से बाहर रखे जाते हैं। जिन करदाताओं के पास एक से अधिक आवासीय परिसंपत्ति हैं और अतिरिक्त आवासीय जायदाद अगर पिछले साल कम से कम 300 दिनों के लिए किराये पर रहा है तो इसे भी संपत्ति कर से बाहर रखा जाता है। संपत्ति कर अनुपयोगी परिसंपत्तियों पर लगता है। यह याद रखना चाहिए कि अपने परिवार के सदस्यों के बीच परिसंपत्तियों का बंटवारा संपत्ति कर से छूट पाने का समाधान नहीं हो सकता है। भारतीय आयकर अधिनियम की तरह संपत्ति कर अधिनियम में भी संपत्तियों को क्लब करने का प्रावधान है।

अगर कोई व्यक्ति अपने लाभ के लिए अपनी पत्नी, बच्चे, पुत्रवधू या किसी अन्य व्यक्ति को जायदाद का हस्तांरण करता है तो उसकी जायदाद उसकी संपत्ति मानी जाएगी न कि उन लोगों को जिन्हें ये हस्तांतरित की गई हैं।

सभी स्थानीय व्यक्ति को भारत से बाहर अपनी परिसंपत्तियों पर संपत्ति कर देना होगा, जबकि प्रवासी भारतीय या विदेशी नागरिकों को भारत में अपनी परिसंपत्तियों पर संपत्ति कर का भुगतान करना होगा।

एक अहम सवाल पैदा होता है कि संपत्ति कर का भुगतान नहीं करने की स्थिति में क्या होगा? संपत्ति कर प्रवंचना के लिए कड़े प्रावधान हैं। संपत्ति की घोषणा सही नहीं होने पर राजस्व अधिकारी चुराए गए कर का 500 प्रतिशत तक जुर्माना लगा सकते हैं।

जान-बूझकर कर चोरी करने पर 7 साल तक की सजा हो सकती है। कर चुकता नहीं करने की स्थिति में इसके लिए एक मजबूत कारण देना होता है। राजस्व अधिकारी अब जानने पर भी लगातार जोर दे रहे हैं कि सभी करदाताओं ने संपत्ति कर के भुगतान से जुड़े नियमों का पालन किया है या नहीं। संपत्ति और आय कर के लिए राजस्व अधिकारी एक ही होते हैं।

लिहाजा, आयकर अधिकारी प्रस्तावित प्रत्यक्ष कर संहिता के तहत करदाता से उसकी सभी परिसंपत्तियों की सूची माग सकता है। संपत्ति कर चुकाने की अधिकतम सीमा 30 लाख से बढ़ाकर 1 करोड़ रुपये की जा सकती है। संपत्ति कर के दायरे में कुछ और परिसंपत्तियों को भी शामिल किया जा सकता है।
अगर आपने अभी तक संपत्ति कर का भुगतान नहीं किया है तो आपको यह जानने के लिए आप पर संपत्ति भुगतान की देनदारी तो नहीं बनती है, आपको अपनी परिसंपत्तियों पर नजर डालने की जरूरत है।

लेखक अन्स्र्ट ऐंड यंग में टैक्स पार्टनर हैं। (अन्स्र्ट ऐंड यंग के ही सीनियर टैक्स प्रोफेशनल रमा करमाकर ने भी इस आलेख में योगदान दिया है।) यहां व्यक्त किए गए विचार व्यक्गित हैं। 

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