बिजनेस स?टैंडर?ड - डॉलर के संग तेज हुए आईटी शेयर
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Tuesday, November 29, 2022 07:43 PM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम विश?लेषण खबर

डॉलर के संग तेज हुए आईटी शेयर
शीतल अग्रवाल /  September 01, 2013

बीएसई के आईटी सूचकांक ने बुधवार को अपनी सर्वाधिक ऊंचाई पर पहुंचा और पिछले महीने में इसने सेंसेक्स को मात दी है। इस अवधि में जहां सेंसेक्स में 9 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई वहीं बीएसई के आईटी सूचकांक ने लगभग 8 फीसदी की बढ़त हासिल की। शीर्ष चार आईटी शेयरों में टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज टीसीएस और एचसीएल टेक्नोलॉजीज ने नई सर्वाधिक ऊंचाई को छुआ जबकि इन्फोसिस ने बुधवार को 52 सप्ताह की ऊंचाई को छुआ। विप्रो ने भी 14 अगस्त को तेजी के संदर्भ में 52 सप्ताह का नया स्तर बनाया और मौजूदा समय में यह अपनी इस ऊंचाई से महज 1.5 फीसदी नीचे कारोबार कर रहा है।

रुपये में गिरावट से निर्यात-केंद्रित आईटी क्षेत्र को मदद मिली है जो 80-90 फीसदी राजस्व विदेशों से हासिल करता है। आईटी कंपनियों के मार्जिन और आय में तेजी दिखी है। महत्वपूर्ण यह है कि कंपनी प्रबंधन की मांग परिदृश्य पर सकारात्मक टिप्पणी से उम्मीद बढ़ी है। साथ ही आईटी शेयरों के लिए निवेशकों की बढ़ती पसंद से भी इस क्षेत्र को मदद मिली है। आईटी शेयर कमजोर भारतीय आर्थिक वृद्घि और रुपये में गिरावट के समय में रक्षात्मक दांव बने हुए हैं। मजबूत मांग और रुपये में कमजोरी का मौजूदा रुझान बरकरार रहने का अनुमान है और इससे आईटी कंपनियों को लाभ मिलेगा।
किसे मिलेगा अधिक फायदा?
डॉलर के मुकाबले रुपये में एक फीसदी की गिरावट का असर शीर्ष आईटी कंपनियों के एबिटा मार्जिन में 30-50 आधार अंक की तेजी के रूप में दिखा है। इस प्रकार हालांकि सभी आईटी कंपनियां रुपये में कमजोरी का लाभ उठाने की स्थिति में हैं और कुछ इस मामले में काफी आगे होंगी। इन्फोसिस और विप्रो के लिए मार्जिन लाभ अधिक रहने की संभावना है, क्योंकि वे अपनी लागत किफायत में सुधार लाने की प्रक्रिया में पहले से ही जुटी हुई हैं।

कोटक इंस्टीट्ïयूशनल इक्विटीज में आईटी विश्लेषक कवलजीत सलूजा कहते हैं, 'रुपये में गिरावट उन कंपनियों के लिए लाभदायक होगी जो अकुशल हैं और लागत को तर्कसंगत बनाए जाने के उपायों पर अमल कर रही हैं। हम दूसरों की तुलना में इन्फोसिस को अधिक मार्जिन लाभ मिलने की उम्मीद जता रहे हैं।Ó  दिलचस्प तथ्य यह है कि मझोली कंपनियां अक्सर मांग रिकवरी एवं रुपये में कमजोरी के समय में अपने बड़े प्रतिस्पर्धियों को मात देती हैं। इसकी वजह यह है कि उनके छोटे आकार की वजह से उनका मार्जिन राजस्व वृद्घि से अधिक संबद्घ है।
कीमतों पर कितना असर पड़ा है?
हालांकि कई विश्लेषकों ने इस वित्त वर्ष के लिए अपने मार्जिन और ईपीएस अनुमानों में संशोधन पहले ही कर दिया है और उन्होंने रुपया-डॉलर दर 60-64 पर अनुमानित की है। इसका मतलब है कि यदि रुपया 68 के मौजूदा स्तर पर बना रहता है या इसमें और कमजोरी आती है तो आय में संशोधन की अधिक गुंजाइश होगी। भले ही यह मौजूदा स्तरों से कुछ चढ़ा है, लेकिन डॉलर के मुकाबले रुपया 54 के वित्त वर्ष 2013 के स्तर की तुलना में कमजोर बना रहेगा। सितंबर तिमाही भी इस सेक्टर के लिए मजबूत है और ज्यादातर कंपनियों द्वारा बेहतर वित्तीय प्रदर्शन की संभावना बढ़ी है। अमेरिकी आर्थिक वृद्घि में सुधार के साथ आईटी कंपनियों के लिए हालात बेहतर हो सकते हैं। क्रेडिट सुइस में आईटी विश्लेषक अनंत नारायण का मानना है, 'हालांकि आईटी सेवा शेयरों ने पिछले कुछ महीनों में अच्छा प्रदर्शन किया है, लेकिन अनुमानों में संशोधन और रुपये में लगातार कमजोरी से इस तेजी को और मजबूती मिल सकती है।

व्यावसायिक रफ्तार बरकरार रहने और भारतीय बाजारों में विकल्पों के अभाव की वजह से भी शेयरों को मदद मिल सकती है। सोच-समझ कर किए जाने वाले खर्च में तेजी के मजबूत संकेत अनुमानों में संशोधन आईटी शेयरों के लिए सकारात्मक हो सकते हैं।Ó इसके अलावा मझोली और बड़ी कंपनियों के बीच मूल्यांकन अंतर भी काफी अधिक बना हुआ है। विश्लेषकों का कहना है कि ज्यादातर छोटी कंपनियां एक अंक के एक-वर्षीय पी/ई अनुपात पर कारोबार कर रही हैं और मौजूदा परिदृश्य में आकर्षक प्रतिफल दे सकती हैं। हालांकि छोटी कंपनियों के लिए आय का रास्ता असमान है, इसलिए निवेशकों को मजबूत मध्यावधि संभावना और अच्छे प्रबंधन वाली कंपनियों पर ध्यान देना चाहिए।

ऐंजल ब्रोकिंग में आईटी विश्लेषक अंकिता सोमानी कहती हैं, 'यदि मौजूदा स्तरों से रुपये में गिरावट आती है तो इसका कुछ नकारात्मक असर भारतीय आईटी शेयरों पर पड़ेगा। हम प्रीमियम मूल्यांकन में भी कुछ गिरावट देख सकते हैं। हालांकि प्रमुख बाजारों में मांग परिदृश्य वित्त वर्ष 2013 की तुलना में बेहतर है और यह काफी हद तक मजबूत है।

Keyword: IT Company, IT Industry, Infosys, Rupee, आईटी, आउटसोर्सिंग सेवा उद्योग इन्फोसिस के संस्थापक और कार्यकारी चेयरमैन एन आर न,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या श्रीलंका में रुपये को विदेशी मुद्रा बनाने से बढ़ेगा लेनदेन
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.