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अर्थव्यवस्था पर पड़ी मार, फिल्म उद्योग हुआ गुलजार
सुरजीत दास गुप्ता / मुंबई August 29, 2013

मंदी के इस दौर में शाहरुख खान की चेन्नई एक्सप्रेस ने शानदार कारोबार किया। खान का मानना है कि फिल्में लिपस्टिक की तरह हैं। चतुर कारोबारी के रूप में शाहरुख खान यानी एसआरके का कहना सही हो सकता है कि आर्थिक मंदी और लिपस्टिक जैसे सस्ते उत्पादों व फिल्मों के बीच अप्रत्यक्ष रूप से एक संबंध है। 1920 के दशक की भयावह मंदी की याद सबके दिल में एक बार फिर से 2008 के वैश्विक आर्थिक संकट के समय ताजा हो गई। और अब सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की दर फिर नीचे चली गई है, औद्योगिक गतिविधियां सुस्त हो गई है, नया निवेश लगभग बंद हो गया है, कंपनियों ने छंटनी शुरू कर दी है, शेयर बाजार गिर रहे हैं और डॉलर की तुलना में रुपया लगातार कमजोर हो रहा है।

लेकिन एक क्षेत्र इससे अछूता है। फिल्म कारोबार शानदार लग रहा है। इतना बढिय़ा कि फिल्म निर्माताओं, वितरकों और प्रसारणकों को क्रिकट का कोई डर नहीं है। पहले उन्हें डर लगता था कि अप्रैल और मई के दौरान करोड़ों दर्शक सिनेमा जाने के बजाय अपने-अपने टीवी से चिपके रहेंगे, क्योंकि उस दौरान इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) का धूम-धड़ाका चलता है। इस कारण वे अपनी फिल्मों की रिलीज को क्रिकेट के इस मनोरंजन से आगे के लिए टाल दिया करते थे। लेकिन भले ही भारतीय क्रिकेट टीम मैच खेल रही हो, दर्शकों ने सिनेमाघरों को जाना जारी रखा। अब ऐसा कोई डर नहीं है और बड़ी फिल्में आईपीएल खत्म होने का इंतजार नहीं करती हैं।

आइए आंकड़ों पर नजर डालते हैं। वर्ष 2008 में जिस साल भारी आर्थिक संकट ने लीमन ब्रदर्स को दिवालिया कर दिया था, देश भर में रिलीज हुईं 87 फिल्मों ने बॉक्स ऑफिस पर कुल 1,189 करोड़ रुपये की कमाई की। इस कारोबार के विश्लेषक सुनील वाधवा के मुताबिक 2009 में जब भारत आर्थिक संकट से बाहर निकल आया था, तो उस साल 90 फिल्मों ने 1,168 करोड़ रुपये की कमाई की थी। यह कमाई 2008 के मुकाबले 2 फीसदी कम थी।

इस बार भी कहानी कुछ खास जुदा नहीं है। इस साल जनवरी और 22 अगस्त के बीच बॉक्स ऑफिस पर कुल 1,547 करोड़ रुपये की कमाई हुई, जो बीते साल की समान अवधि में हुई 1,420.1 करोड़ रुपये की कमाई से 8 फीसदी ज्यादा है। 2013 में अभी तक 4 फिल्में ऐसी हैं जिन्होंने 100 करोड़ रुपये या उससे ज्यादा कारोबार किया है, जबकि 2012 में कुल 9 और 2011 में ऐसे 5 फिल्में थीं। अगले कुछ सप्ताहों में रिलीज के लिए कृषि 3 और धूम 3 जैसी फिल्मों के कतार में होने से इस साल बॉलीवुड को शानदार कमाई होने की उम्मीद है।

ऊंची उड़ान

ऐसा सिर्फ बॉलीवुड तक सीमित नहीं है, फिक्की-केपीएमजी का मीडिया और मनोरंजन पर सालाना सर्वे कहता है कि यह स्थिति पूरे भारतीय फिल्म उद्योग में है। 2007 में फिल्म कारोबार (जिसमें फिल्म अधिकारों से होने वाली आमदनी के साथ ही सभी भाषाओं की फिल्मों का घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बॉक्स ऑफिस कारोबार शामिल है) से कुल 10,400 करोड़ रुपये का कारोबार हुआ। मंदी के बावजूद कई बड़ी फिल्मों की प्रस्तावित रिलीज के कारण अगले साल इस कारोबार के 12 फीसदी तक बढऩे का अनुमान है। 2009 में जब अर्थव्यवस्था पर पटरी पर आ रही थी तो कारोबार में 14 फीसदी की कमी दर्ज की गई थी और यह चार साल बाद 2012 में 2008 के पुराने स्तर पर लौटने में कामयाब हुआ है।

इस बात से क्या पता चलता है? अर्थशास्त्रियों ने कहा कि गिरावट या मंदी के दौर में महिलाएं बड़ी मात्रा में लिपिस्टिक खरीदती हैं, क्योंकि वे महंगे हैंडबैग और जूतों का बोझ नहीं उठा सकती हैं। यही दलील यहां काम करती है। पीवीआर पिक्चर्स, जो देश की सबसे बड़ी मल्टीप्लेक्स चेन का हिस्सा है, के अध्यक्ष कमल ज्ञानचंदानी कहते हैं, 'इस पर हम बड़ी बहस कर चुके हैं। कारण यह है कि लगभग 125 रुपये की औसत कीमत का टिकट घर के बाहर सबसे सस्ता मनोरंजन होता है। सुबह के शो की टिकट 75 रुपये तक नीचे चली जाती है। जब मंदी आती है तो लोग हकीकत से दूर जाना चाहते हैं।Ó

वाधवा इससे सहमति जताते हुए कहते हैं, 'अतीत यही बताता है कि जब भी गिरावट या मंदी आती है तो बॉक्स ऑफिस पर जबर्दस्त संभावनाएं नजर आने लगती हैं।Ó एक परिवार के लिए रेस्तरां में खाने या एक थीम पार्क में घूमने की तुलना में फिल्म जाना काफी सस्ता होता है।

यही वजह है कि 2012 की पहली छमाही की तुलना में इस साल की समान अवधि में बॉक्स ऑफिस की कमाई में 20 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। हालांकि इस अवधि में टिकटों की कीमत 4-5 फीसदी तक बढ़ी हैं। यदि इससे पड़े असर को अलग कर दें तो भी कमाई में 14-15 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है।

एसआरके और दीपिका पादुकोण के अभिनय और रोहित शेट्टी के निर्देशन वाली चेन्नई एक्सप्रेस ने दो सप्ताह में ही कमाई का 200 करोड़ रुपये का आंकड़ा पार कर लिया है, जो बॉलीवुड के लिए नया रिकॉर्ड है। इसने अभी तक की सबसे ज्यादा सफल तीन फिल्मों में आमिर खान की 3 इडियट्स और सलमान खान की एक था टाइगर के साथ जगह बना ली है। मंदी के बावजूद 2008 में आमिर खान की गजनी और एसआरके की रब ने बना दी जोड़ी ने बॉक्स ऑफिस पर कमाई में 100 करोड़ रुपये के आंकड़े को पार किया था। इन दोनों फिल्मों के अलावा सिंह इज किंग (91.75 करोड़ रुपये कमाई) और जोधा अकबर (90.75 करोड़ रुपये कमाई) भी दूसरी सुपर हिट फिल्में थीं। स्पष्ट तौर पर दुनिया और भारत में 2008 में आए संकट का बॉलीवुड के कारोबार पर खास असर नहीं दिखा, क्योंकि सिनेमाघरों में भीड़-भाड़ बढ़ गई थी।

बदले हालात
बॉलीवुड के लिए दूसरी अच्छी खबर यह है कि यह पूरी तरह के क्रिकेट से अलग हो गया है। 2008 में जब आईपीएल (जिसने क्रिकेट और मनोरंजन को एकमेक कर दिया था) को पेश किया गया

पांच साल (और कुछ खिलाडिय़ों के स्पॉट फिक्सिंग में शामिल होने के विवादों) के बाद हालात पूरी तरह बदल गए हैं। इस साल अपनी निर्माता कंपनी टी-सीरीज को 200 फीसदी का शानदार रिटर्न देने वाली आशिकी 2 तो अप्रैल में तब रिलीज हुई थी, जब आईपीएल के मैच चल रहे थे। चश्मे बद्दूर और शूटआउट एट वडाला जैसी फिल्मों ने आईपीएल के बीच में रिलीज होने के बावजूद शानदार कारोबार किया था। आईपीएल के दो महीनों अप्रैल और मई में बॉक्स ऑफिस पर हुई कमाई (इसमें ये जवानी है दीवानी शामिल नहीं है, क्योंकि यह मई के आखिर में रिलीज हुई थी) ने साल के शुरुआती आठ महीनों हुई कुल कमाई में 15 फीसदी का योगदान दिया।

ज्ञानचंदानी कहते हैं, 'आईपीएल 1 के दौरान हमने सामान्य तौर पर अप्रैल और मई में होने वाले कारोबार की तुलना में 10 से 12 फीसदी कम टिकट बेचे थे, जो हमारे लिए बेहद अहम था। लेकिन यदि आप इस साल आईपीएल के दौरान रहे रुझान पर गौर करें तो हम सामान्य बिक्री की ओर लौट आए थे, क्योंकि बड़े निर्माता अपनी फिल्मों को रिलीज कर रहे थे और क्रिकेट का असर उन पर ज्यादा नहीं रहा था।Ó कहते हैं कि इसके पीछे दो वजह थीं। पहली फिल्मों की टिकटों की बिक्री सप्ताहांत पर केंद्रित रही थी जो एक परिवार के लिए बाहर घूमने-फिरने का समय होता है और लोग क्रिकेट मैच के लिए इससे समझौता नहीं करना चाहते हैं, क्योंकि आईपीएल में मैच सप्ताह भर होते रहते हैं।

ज्ञानचंदानी कहते हैं कि पांच साल पहले पीवीआर का 35 फीसदी कारोबार सप्ताहांत में होने वाली बिक्री से आता था, अब उनके कारोबार में सप्ताहांत का योगदान बढ़कर 55 फीसदी हो गया है। दूसरा यह कि अब काफी ज्यादा लगभग साल भर ही क्रिकेट मैच होते हैं, इसलिए जो लोग एक मैच देखने से वंचित रह जाते हैं तो उनको अपने पसंदीदा क्रिकेटर को देखने के तमाम मौके आगे भी मिलते हैं।

ऐसे में भले ही अन्य क्षेत्रों को मुश्किल हो रही है, लेकिन देश के फिल्म उद्योग पर कोई असर नहीं पड़ रहा है।
    (साथ में उर्वी मलवाणिया)

Keyword: Film, Bollywood, शाहरुख खान और दीपिका पादुकोण, चेन्नई एक्सप्रेस, मंदी,
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