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एक साल खाली भी रह सकती है थाली
बीएस संवाददाता /  August 27, 2013

संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार के दूसरे कार्यकाल में बहुप्रतीक्षित खाद्य सुरक्षा विधेयक को भले ही सोमवार को लोकसभा में मंजूरी मिल गई, लेकिन कुछ संशोधनों से पता चलता है कि मूल विधेयक के कई मूल प्रावधानों को हटा लिया गया है।

राज्य सरकारों को अब योजना लागू करने के लिए अधिनियम बनाने के वास्ते एक साल का वक्त मिलेगा, जिससे राज्यों द्वारा आम चुनावों के बाद ही इसके प्रावधानों को लागू किए जाने की संभावना है। इसमें कांग्रेस शासित राज्य नहीं आते हैं, जिनमें से कुछ विधेयक के कई प्रावधानों को लागू करने की प्रक्रिया में हैं या अगले कुछ महीनों में ऐसा कर सकते हैं।

एक अहम संशोधन किए जाने से केंद्र सरकार राज्यों के साथ परामर्श के बाद राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा विधेयक से संबंधित नियमों और नीतियों का खाका खींचने को बाध्य होगी।

भले ही यह संघीय ढांचे को जीवित रखने के लिए किया गया है, लेकिन इससे कई प्रमुख प्रावधानों को कार्यान्वयन में देरी हो सकती है, जिसमें गर्भवती महिला को छह महीनों के लिए मातृ लाभ और माताओं की तलाश करना भी शामिल है।

विधेयक के अंतर्गत लगभग 5,000 रुपये के आर्थिक दंड का प्रावधान किया गया है, वहीं छत्तीसगढ़ विधेयक में नियम का उल्लंघन करने वालों को आवश्यक सेवा रखरखाव अधिनियम (एस्मा) के तहत कार्रवाई की जाएगी।

विधेयक में नकदी के हस्तांतरण की संभावनाएं एक अहम संशोधन के बाद खत्म हो गईं, जो कहता है कि नकदी सिर्फ खाद्यान्न खरीद के लिए दी जा सकती है और यह सुनिश्चित करना होगा कि इस रकम को अन्य कामों में नहीं इस्तेमाल किया जाए। इससे विधेयक के अंतर्गत खाद्यान्न की खरीद के लिए नकदी के वितरण की संभावनाओं का व्यावहारिक तौर पर अंत हो गया। विधेयक के पुराने संस्करणों में खाद्यान्न के बदले नकदी के वितरण का भी विकल्प था।

इसके साथ ही बाध्यकारी खंड को भी हटा लिया गया, जो सरकार के खाद्यान्न वितरण के दायित्व को अग्निकांड, बाढ़, चक्रवात, युद्ध आदि घटनाओं तक सीमित करता है। अब ऐसे हालात का चयन करने का काम योजना आयोग के साथ ही केंद्र सरकार का है, जहां उसका खाद्यान्न वितरण का दायित्व लागू होता है।

इससे पहले 'बाध्यकारीÓ खंड लागू करना केंद्र सरकार के विवेकाधिकार पर ही था। कुछ विशेषज्ञों ने कहा कि विधेयक पहले से लागू अंत्योदय अन्न योजना (एएवाई) के प्रावधानों का विस्तार है, जो गरीबों में भी सबसे गरीब पर लक्षित है और मात्रा को छोड़कर इसी तरह के लाभ उपलब्ध कराती है।

शिकायत निवारण तंत्र के साथ ही कानूनन पात्र के हिस्से से भी काफी फर्क पैदा हो गया है। राशन की मासिक तय सीमा नहीं मिलने पर लाभार्थी एक शिकायत दर्ज करा सकेगा, जबकि वर्तमान सार्वजनिक वितरण प्रणाली में इसकी अनुमति नहीं है।

Keyword: Food Security, राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा विधेयक , खाद्य मंत्री केवी थॉमस, PDS, सार्वजनिक वितरण प्रणाली , राशन, Foo,
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