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दो-तिहाई आबादी को रोटी की गारंटी
बीएस संवाददाता / नई दिल्ली August 26, 2013

विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) समेत लगभग सभी राजनीतिक दलों ने देश की 67 फीसदी आबादी तक सस्ता अनाज उपलब्ध कराने की सरकार की कोशिश का समर्थन किया, लेकिन उस पर ढेरों सवाल भी उठाए। उन्होंने सरकार से पूछा कि इसके लिए आगे चलकर अनाज कैसे उपलब्ध होगा, रकम का इंतजाम कैसे होगा और आगे जाकर भारतीय कृषि पर इसका कैसा और कितना असर होगा।

कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने कहा कि यह एक 'ऐतिहासिक अवसरÓ है, जब सभी राजनीतिक दलों को दलगत भावना से ऊपर उठकर देश में भूख और कुपोषण से लडऩे में मदद करने के लिए साथ आना चाहिए। विपक्षी दल भाजपा ने इस विधेयक को खाद्य सुरक्षा से ज्यादा 'वोट सुरक्षाÓ का जरिया बताया, लेकिन इसका विरोध करने से उसने भी परहेज किया। लोकसभा ने ध्वनिमत से इसे पारित कर दिया।

राष्टï्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) समेत सरकार के सहयोगी दलों ने भी इस विधेयक पर अपनी असहमति खुलकर नहीं जताई। हालांकि पहले माना जा रहा था कि राकांपा इस विधेयक पर सरकार से सहमत नहीं है। जनता दल यूनाइटेड (जदयू) ने दो साल पहले खाद्य सुरक्षा विधेयक पर अच्छा खासा एतराज किया था क्योंकि उस समय गरीबों की गणना के तरीके पर उसके और केंद्र के बीच मतभेद था। लेकिन आज जदयू ने इस विधेयक पर बिल्कुल भी चूं नहीं की, जिससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि उसने बदले हुए सियासी हालात को कबूल कर लिया है।

डिशा के बीजू जनता दल के सांसद बी महताब ने इस योजना के लिए अनाज की उपलब्धता पर सवाल उठाया। विधेयक का विरोध करने वाले तमिलनाडु की अन्नाद्रमुक ने कहा कि राज्य में उसकी सरकार गरीबों को पहले ही रियायती दर पर अनाज मुहैया करा रही है। अन्नाद्रमुक ने कहा कि इस विधेयक से राज्यों पर भारी वित्तीय बोझ पड़ेगा।

सरकार को बाहर से समर्थन दे रही समाजवादी पार्टी पहले भी कई मौकों पर इस विधेयक के बारे में अपना विरोध खुलकर जता चुकी है। उसके प्रमुख मुलायम सिंह यादव ने आज भी संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार से कहा कि इस विधेयक को लागू करने से पहले केंद्र को सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ सलाह करनी चाहिए।
सोनिया गांधी ने सभी दलों से गुजारिश की कि वे इस अहम विधेयक को पारित कराने में मदद करें। उन्होंने कहा, 'अब दुनिया को यह बताने का वक्त आ गया है कि भारत अपने सभी नागरिकों को अनाज मुहैया कराने के काबिल है। हमारा लक्ष्य देश भर से भूख और कुपोषण खत्म करना है।Ó

इस योजना के लिए अनाज की उपलब्धता और क्रियान्वयन की क्षमता पर संदेह जता रहे लोगों से सोनिया गांधी ने खासतौर पर कहा, 'सवाल यह नहीं है कि हमारे पास खाद्य सुरक्षा विधेयक लागू करने के लिए पर्याप्त संसाधन हैं या नहीं बल्कि हमें कुछ भी कर इन संसाधनों का इस्तेमाल करना है।Ó

सार्वजनिक वितरण प्रणाली में खामियां होने की बात स्वीकारते हुए उन्होंने राज्यों से इन्हें दूर करने की गुजारिश की। उन्होंने यह भी कहा कि एकीकृत बाल विकास सेवाएं और मध्यावधि भोजन योजना इसी का हिस्सा हैं और उनमें मौजूद खामियों को भी दुरुस्त करने की जरूरत है।

सोनिया गांधी इस अवसर पर उन अधिकारों की गिनती कराना नहीं भूली, जो केंद्र सरकार ने अपने दो कार्यकाल में देश के लोगों को दिए हैं। उन्होंने कहा, सूचना का अधिकार 'कई बार हमारे लिए नुकसानदेहÓ, मनरेगा, शिक्षा का अधिकार और वन्य अधिकार अधिनियम इस सूची में शामिल हैं। खाद्य सुरक्षा विधेयक लोगों को एक अन्य 'कानूनी अधिकारÓ देगा।

विपक्ष की ओर से बहस शुरू करने वाले भाजपा के दिग्गज नेता मुरली मनोहर जोशी ने कहा, 'यह खाद्य सुरक्षा नहीं वोट सुरक्षा विधेयक है।Ó उन्होंने कहा कि इस विधेयक में कई खामियां हैं, जिनमें सुधार करने की जरूरत है। जोशी ने सवाल किया, 'पर्याप्त भोजन किसे कहा जाएगा? इसका फैसला खरीदने की क्षमता से होगा या उसमें मौजूद कैलोरी को देखा जाएगा या देखा जाएगा कि उससे सही पोषण मिलता है या नहीं।Ó

Keyword: Food Security, राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा विधेयक , खाद्य मंत्री केवी थॉमस, PDS, सार्वजनिक वितरण प्रणाली , राशन, Foo,
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