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रुपया संभलेगा तो बाजार भी चलेगा
स्नेहा पडियथ और नीलाश्री बर्मन / मुंबई August 25, 2013

ऌजबरदस्त हिचकोले खाने के बाद पिछले दो-तीन दिन में शेयर बाजार में अच्छी खासी तेजी आई है। लेकिन यह तेजी आगे भी बरकारार रहेगी या नहीं, इस बात का फैसला डॉलर के मुकाबले रुपये की चाल से ही होगा।

बाजार के जानकारों का मानना है कि देश में चालू खाते का बढ़ता घाटा कम करने के लिए सख्त कदम नहीं उठाए जा रहे हैं, जिसके कारण बाजार और रुपये के बारे में धारणा कमजोर पड़ गई है। हालांकि कुछ मानते हैं कि शेयर बाजार में कुछ वक्त तक तेजी बरकरार रहेगी क्योंकि यहां जरूरत से ज्यादा बिकवाली हो चुकी है।

पिछले हफ्ते कारोबार के दौरान डॉलर के मुकाबले रुपया 65.56 तक लुढ़क गया था, जो भारतीय मुद्रा के इतिहास में सबसे निचला स्तर था। उस दिन रुपये में करीब 2.7 फीसदी गिरावट आई थी। बंबई स्टॉक एक्सचेंज भी करीब 5 फीसदी लुढ़क गया था। रुपये और सेंसेक्स में गिरावट इससे भी ज्यादा हो सकती थी, लेकिन हफ्ते के आखिरी दिनों में बाजार ने पलटी मार दी और उसमें तेजी देखी गई। बाजार में उतारचढ़ाव को देखकर वित्त मंत्री को भी शनिवार को विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) से मुलाकात करनी पड़ी। उस मुलाकात में उन्होंने भारत की अर्थव्यवस्था के बारे में निवेशकों की चिंताएं दूर करने की कोशिश की।

मुद्रा बाजार के भागीदारों का मानना है कि रुपये में तत्काल गिरावट नहीं आएगी, लेकिन महीने के अंत में आयातकों के बीच डॉलर की मांग बढऩे की भी उम्मीद नहीं है। मेकलाई फाइनैंशियल के उप मुख्य कार्याधिकारी पार्थ भट्टïाचार्य ने कहा, 'अगर वैश्विक स्तर पर कोई बुरी खबर नहीं आती है तो बाजार में स्थिरता आ सकती है।

मेरा मानना है कि रुपया 62 से 64.50 के दायरे में कारोबार कर सकता है।Ó रुपये में हालिया गिरावट तथा महंगाई और ब्याज दरें बढऩे की आशंका से गोल्डमैन सैक्स, सीएलएसए, एचएसबीसी और जेपी मॉर्गन जैसे ज्यादातर विदेशी ब्रोकरों ने भारत की रेटिंग घटा दी है। अवीवा लाइफ इंश्योरेंस के मुख्य निवेश अधिकारी नीरज कुमार ने कहा कि रुपये के रुख पर ही बाजार की चाल निर्भर करेगी। अगर बाजार में सुधार हुआ तो एफआईआई भी लिवाली करेंगे। अगस्त में अब तक एफआईआई ने 3,217 करोड़ रुपये की बिकवाली की है जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों ने 4,232 करोड़ रुपये की लिवाली की है। अगर अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा प्रोत्साहन पैकेज वापस लिया जाता है तो एफआईआई की बिकवाली तेज हो सकती है।
विश्लेषकों का कहना है कि सार्वजनिक वित्तीय संस्थानों द्वारा अद्र्घ-सरकारी बॉन्ड लाने से रुपये को थोड़ा सहारा मिल सकता है। एफआईआई के साथ शनिवार की बैठक के बाद आर्थिक मामलों के सचिव अरविंद मायाराम ने बताया कि वित्तीय संस्थान अद्र्घ-सरकारी बॉन्डों के जरिये रकम जुटाने की तैयारी कर रहे हैं। हालांकि यह कब तक होगा, इस बारे में उन्होंने जानकारी नहीं दी।

बैंक ऑफ अमेरिका मेरिल लिंच के अर्थशास्त्री (भारत) इंद्रनील सेन गुप्ता ने एक ग्राहक नोट में कहा है, 'रुपये में तब तक स्थिरता नहीं आ सकती, जब तक भारतीय रिजर्व बैंक विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ाने के लिए प्रवासी भारतीय या सरकारी बॉन्ड जारी नहीं करता है।Ó उन्होंने बताया कि रुपये का वास्तविक मूल्य डॉलर के मुकाबले 51.1 होना चाहिए। लेकिन यह लुढ़ककर 65 से 70 के बीच पहुंच सकता है। हफ्ते भर गिरावट की मार झेलने के बाद शुक्रवार को रुपया सुधर कर 63.35 पर बंद हुआ।

सेंट्रम ब्रोकिंग के वरिष्ठï उपाध्यक्ष गौरव भंडारी ने कहा, 'बाजार में उम्मीद नजर नहीं आ रही है, लेकिन रुपया 65 तक शायद ही गिरेगा।Ó इस हफ्ते सकल घरेलू उत्पाद और राजकोषीय घाटे के आंकड़े भी आने हैं। अगर आंकड़े अच्छे नहीं रहे तब भी बाजार पर प्रतिकूल असर मुश्किल से ही पड़ेगा। अल्टामाउंट कैपिटल मैनेजमेंट के निदेशक प्रकाश दीवान ने कहा कि आर्थिक वृद्घि के आंकड़े पहले से ही कमजोर बने हुए हैं और इसका बाजार पर बहुत असर नहीं पड़ेगा।

अगर इन आकड़ों में सुधार होता है तो बाजार खुश हो सकता है। उन्होंने कहा कि अगले एक-दो हफ्तों में निफ्टी 5800 तक चढ़ सकता है। फॉच्र्यून इक्विटी ब्रोकर्स के तकनीकी प्रमुख और डेरिवेटिव्स विश्लेषक आशिष चतुरमोहता ने कहा, 'रुपये में मजबूती का रुख बना रह सकता है और निफ्टी अगले कुछ सत्रों में 5500 से 5600 के दायरे में पहुंच सकता है।Ó गुरुवार को वायदा एवं विकल्प सौदों का निपटान होना है, ऐसे में गिरावट का जोखिम भी है।
   

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