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सेवानिवृत्ति के बाद स्वास्थ्य की देखभाल के लिए करें कोष का निर्माण
अरविंद राव /  August 25, 2013

रमेश कुमार अपने वित्तीय सलाहकार के पास टैक्स रिटर्न जमा कराने गए। लेकिन कुमार के वित्तीय सलाहकार ने पाया कि उनके पास पिछले साल स्वास्थ्य बीमा के प्रीमियम के मद में भुगतान की हुई रकम की पावती पत्र नहीं था। 

जब कुमार से इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने बताया कि पिछले साल वह एक सरकारी संगठन से सेवानिवृत्त हुए थे और संगठन की नीति के अनुसार उन्हें जीवन भर के लिए एक अस्पताल में स्वास्थ्य सुविधा मिली हुई है। कुमार इस मामले में भाग्यशाली कहे जा सकते हैं, क्योंकि सेवानिवृत्ति के बाद स्वास्थ्य मद में खासी रकम खर्च होती है। लेकिन जो लोग सरकारी नौकरी में नहीं हैं, उन्हें क्या करना चाहिए? सेवानिवृत्ति के बाद स्वास्थ्य पर होने वाले खर्च के लिए वे कहां से प्रावधान कर पाएंगे?

फिडेलिटी इन्वेस्टमेंट के हाल के सर्वेक्षण के अनुसार अमेरिका में 65 साल का बुजुर्ग जोड़ा सेवानिवृत्ति के बाद औसतन 222,000 डॉलर खर्च करते हैं। भारतीय मुद्रा में यह रकम 1.2 करोड़ रुपये होती है। भारत में भी स्वास्थ्य पर होने वाला खर्च 15 प्रतिशत की दर से बढऩे का अनुमान है। कंपनी में काम करने वाले लोगों को नियोक्ता की ओर से ग्रुप मेडिकल कवर मिला होता है, जिसमें कर्मचारी के परिवार भी शामिल होते हैं। इसके अलावा कई कर्मचारी अलग से भी स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी खरीद लेते हैं।
स्वरोजगार में लगे लोगों के लिए एक एकल स्वास्थ्य कवर जरूरी होता है। दोनों मामलों में प्रीमियम का भुगतान करने वाले व्यक्ति को आयकर अधिनियम 1961 की धारा 80 डी के तहत प्रीमियम के भुगतान पर कर कटौती का लाभ मिलता है।

हालांंकि यह काफी अहम होता है और इसे जारी रखने की सलाह दी जाती है, लेकिन ये पॉलिसियां पॉलिसीधारक के मौजूदा स्वास्थ्य समस्याओं का ही समाधान करती हैं। उम्र बढऩे के साथ ही प्रीमियम महंगा हो जाता है। लिहाजा, मौजूद स्वास्थ्य समस्याओं के लिए स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी अत्यंत जरूरी समझी जाती है। लेकिन सवाल उठता है कि लंबी अवधि के लिए क्या किया जाना चाहिए? विश्व के कई देशों ने लंबी अवधि की स्वास्थ्य जरूरतों को देखते हुए कई उपाय किए हैं। भारत में इस तरह कि किसी उपाय की अनुपस्थिति में कोई व्यक्ति लंबी अवधि के लिए अपनी स्वास्थ्य देख-भाल कैसे सुनिश्चित कर सकता है?

कुमार जब नौकरी कर रहे थे उनके वेतन से एक निश्चित रकम लंबी अवधि की स्वास्थ्य सुविधा के मद में कटती थी। यह रकम कुमार को नौकरी के दौरान मिले मेडिकल कवर के अतिरिक्त थी। कहने का तात्पर्य यह है कि हरेक  व्यक्ति थोड़ी समझदारी दिखाकर लंबी अवधि के लिए कोष तैयार कर सकता है। इसके लिए सबसे अच्छा तरीका किसी बैंक में आवर्ती जर्मा (आरडी) शुरू करने का हो सकता है। या किसी ऐसे संस्थान का भी चयन किया जा सकता है, जो फिक्सड इनकम आरडी की पेशकश करता है। आवर्ती जमा में हरेक महीने एक निश्चित रकम जमा करनी होती है और इस पर फिक्स्ड डिपॉजिट के समान ब्याज मिलता है।

आइए एक उदाहरण पर विचार करते हैं, जिसमें एक 30 साल का व्यक्ति सेवानिवृत्ति के लिए एक कोष का निर्माण करना चाहता है। उसके पास कोष जमा करने के लिए 30 साल का समय है। 30 साल की उम्र से 60 साल तक हरेक महीने आरडी या आवर्ती जमा में 5,000 रुपये की बचत कर कोई व्यक्ति लंबी अवधि की स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए 45 लाख रुपये जमा कर सकता है। आरडी विभिन्न परिपक्वता अवधि के लिए होती है जो 1 साल से पांच साल तक के लिए हो सकती है। आप अपने वित्तीय योजनाकार के साथ चर्चा कर कर बचत करने वाले साधनों या शेयर आधारित साधनों में भी निवेश कर सकते हैं। चूंकि, इनमें निवेश लंबी अवधि के लिए होता है, इसलिए औसत प्रतिफल अधिक हो सकता है।

आम तौर पर आरडी में तिमाही आधार पर चकवृद्धि ब्याज का निर्धारण होता है। आरडी पर प्राप्त ब्याज पर टीडीएस लागू होता है, हालांकि अर्जित ब्याज पर कराधान होता है। प्राप्त ब्याज पर कर का भुगतान उस खर्च के तौर पर देखा जा सकता है। मिसाल के तौर पर ऊपर दिए गए उदाहरण में 5,000 रुपये के मासिक आरडी पर सालाना प्राप्त ब्याज पहले साल के अंत में करीब 2,000 रुपये होगा। सबसे ऊंचे कर दायरे में कर के मद में करीब 600 रुपये जाएगा जिसका बोझ निश्चित तौर पर आपकी जेब पर पड़ेगा। हालांकि यह जरूर याद रखें कि लंबी अवधि के लिए स्वास्थ्य कवर के  लिए यह आवश्यक है।

स्वास्थ्य पॉलिसी के मामले में जहां प्रीमियम का भुगतान सालाना होता है और इसके बदले सालाना कवर मिलता है। अगर कोई व्यक्ति 10,000 रुपये प्रीमियम का भुगतान होता है तो उसे 3,000 रुपये की कर छूट मिलती है। लेकिन साल के दौरान कोई दावा नहीं होता है तो शेष 7,000 रुपये का उसे नुकसान होगा। लोगों को इस खर्च का वहन करना पड़ता है, क्योंकि इससे उन्हें निकट भविष्य में किसी आपात स्वास्थ्य समस्याओं से निपटने में मदद मिलती है। लंबी अवधि में स्वास्थ्य समस्याओं से सुरक्षा के लिए आरडी पर भुगतान वाले कर का भी वहन किया जा सकता है।

हालांकि लंबी अवधि के लिए स्वास्थ्य समस्याओं से निपटन और कोष के निर्माण के लिए आरडी में निवेश की सलाह दी जाती है, लेकिन इसके लिए वित्तीय नियमितता का पालन जरूरी है। यह भी ध्यान रखें कि आरडी में निवेश की गई रकम का इस्तेमाल दूसरे मसकद के लिए नहीं होता है।
 
लेखक प्रमाणित वित्तीय योजनाकार हैं।

Keyword: Insurance, Policy, नई इंश्योरेंस पोर्टेबिलिटी ,,
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