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तीर्थाटन से गहलोत जीतेंगे लोगों का मन!
कविता चौधरी / नई दिल्ली August 16, 2013

तीर्थ यात्रा का भारत के शहरी और ग्रामीण दोनों इलाकों के लोगों के बीच खासा महत्त्व है। इसी का फायदा उठाने और आगामी विधानसभा चुनाव में मतदाताओं को लुभाने के मकसद से राजस्थान में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की अगुआई वाली कांग्रेस सरकार ने मुफ्त तीर्थयात्रा समेत तमाम योजनाओं का पिटारा खोल दिया है।
हालांकि मुफ्त तीर्थयात्रा योजना राज्य सरकार की सबसे लोकप्रिय योजनाओं में से एक है, जिसके तहत लोगों को 'तीर्थ यात्रा दर्शनार्थी भत्ताÓ दिया जा रहा है। योजना के तहत बुजुर्गों को वैष्णो देवी, जगन्नाथपुरी, गया सहित तमाम तीर्थ स्थानों की यात्रा कराई जाएगी। सत्ता विरोधी लहर के नुकसान से बचने के लिए इन दिनों गहलोत सरकार तेजी से ऐसी योजनाएं ला रही है।

मेधावी छात्राओं के लिए मुफ्त साइकल देने की घोषणा के बाद गहलोत सरकार ने अकेले बुजुर्गों को 900 रुपये और बुजुर्ग दंपती को 1,500 रुपये की पेंशन देने की भी घोषणा की है। रमुफ्त तीर्थयात्रा योजना में वैष्णो देवी, जगन्नाथपुरी, गया, रामेश्वरम, तिरुपति, वाराणसी, अमृतसर, द्वारकापुरी, बिहार शरीफ, शिरडी जैसे तीर्थ स्थलों में बुजुर्गों के ठहरने, खाने और सड़क तथा ट्रेन यात्रा का पूरा खर्च सरकार ही उठाएगी। इन यात्राओं की अवधि 5 से 8 दिन के बीच की होगी। इसके लिए राजस्थान सरकार ने आईआरसीटीसी के साथ एक सहमति पत्र पर दस्तखत किए हैं।

गहलोत ने इस योजना के अंतर्गत इस महीने की शुरुआत में जगन्नाथपुरी जा रहे पहले जत्थे को हरी झंडी दिखाई थी। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि इस तरह की सौगातों से गहलोत सरकार को कुछ हद तक जनप्रिय छवि तैयार करने में मदद मिलेगी। जानकार यह भी कहते हैं कि इस तरह की योजनाओं से गहलोत वरिष्ठï नागरिकों और युवाओं को आकर्षित करने की कोशिश कर रहे हैं।

राजस्थान प्रदेश कांग्रेस समिति के प्रवक्ता नीरज डांगी ने बिजनेस स्टैंडर्ड से बातचीत में इसे 'चुनावी सौगातÓ या 'उपहारÓ मानने से इनकार करते हुए कहा, 'इस योजना का उद्देश्य आम आदमी को लाभ पहुंचाना है। हम चुनावों पर निशाना नहीं साध रहे हैं।Ó डांगी कहते हैं कि इस योजना की घोषणा 2013-14 के बजट में की गई थी और इसी तरह अन्य योजनाएं भी कांग्रेस सरकार के नीतिगत फैसले ही थे।

बहरहाल गहलोत धार्मिक पर्यटन कराने वाले पहले मुख्यमंत्री नहीं हैं। मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी ऐसी ही योजना शुरू की थी, जिस पर 20 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे। भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाली मध्य प्रदेश सरकार ने रामेश्वरम, पुरी, केदारनाथ, बदरीनाथ, हरिद्वार सहित कई स्थानों की यात्रा का खर्च उठाया था।

हालांकि यह योजना गहलोत को चुनावी जंग जिताएगी और भाजपा तथा पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के मुकाबला पलड़ा भारी करेगी या नहीं, इसका पता तो दिसंबर में होने वाले विधानसभा चुनावों के नतीजे ही बताएंगे।

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