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कोयला आधारित परियोजनाओं को मिली राहत
संजय जोग / मुंबई August 06, 2013

बिजली उत्पादक उन कंपनियों के लिए अच्छी खबर हैं, जो घरेलू स्तर पर कोयले की उपलब्धता में कमी के कारण विद्युत खरीद समझौता (पीपीए) करने के बावजूद शुल्क में बढ़ोतरी की मांग कर रही हैं। विद्युत मंत्रालय ने नई कोयला वितरण नीति (एनसीडीपी) में हाल में हुए बदलावों का हवाला देते हुए विद्युत नियामक आयोगों (ईआरसी) को विद्युत उत्पादकों की मांग पर हर मामलेवार अगल-अलग विचार करने की सलाह दी है।

मंत्रालय ने कहा कि इससे कोयले के आयात या बाजार आधारित ई-नीलामी की ऊंची कीमत को खरीदारों पर डाला जा सकेगा। मंत्रालय की यह सलाह सीसीईए के फैसले और इसके बाद एनसीडीपी में बदलाव के लिए कोयला मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना के नक्शे कदम पर ही है। कोयला मंत्रालय ने अपने पत्र में कहा, 'कोयले के आयात या बाजार आधारित ई-नीलामी की ऊंची लागत के मद्देनजर इसे टालने के लिए केंद्रीय विद्युत नियामक आयोग (सीईआरसी) और राज्य ईआरसी को हर मसले पर अलग-अलग विचार करना चाहिए।Ó

सीसीईए के फैसले के आधार पर और इसके बाद कोयला मंत्रालय के निर्देश के बाद विद्युत मंत्रालय ने 31 जुलाई को सीईआरसी को भेजे अपने पत्र में कहा, 'ईआरसी को सलाह दी जाती है कि वे व्यक्तिगत विद्युत उत्पादकों के आग्रह पर विचार करें। यह जनहित अलग-अलग मामले पर आधारित होना चाहिए। संबंधित आयोगों से एनसीडीपी में किए गए बदलावों को तत्काल लागू करने का आग्रह किया जाता है।Ó

महाराष्ट्र विद्युत नियामक आयोग (एमईआरसी) के चेयरमैन वी पी राजा ने बिज़नेस स्टैंडर्ड को बताया, 'व्यक्तिगत विद्युत उत्पादकों को एक याचिका दायर करनी होगी, जिसमें इस बात की जानकारी देनी होगी कि कितने अधिक कोयले की खपत हुई, कहां से यह खरीदा गया और वास्तव में कितने कोयले का इस्तेमाल हुआ। इसके अलावा यह भी बताना होगा कि खरीदा गया अतिरिक्त कोयला कारोबार के लिए नहीं था। हम अपना फैसला देने से पहले अपने कर्मचाारियों या सलाहकारों को नियुक्त कर इसकी विस्तृत जांच करेंगे।Ó

एसोसिएशन ऑफ पावर प्रोड्यूसर्स (एएपी) के महानिदेशक अशोक खुराना ने कहा कि विद्युत मंत्रालय की ओर से विद्युत नियामकों को दी गई सलाह स्वागत योग्य है। यह 2009 के बाद शुरू हो चुके 30,000 मेगावॉट की विद्युत परियोजनाओं, 20,000 मेगावॉट की उन परियोजनाओं जिनका काम चल रहा है और भविष्य में शुरू होने वाली परियोजनाओं के लिए फायदेमंद होगा। उन्होंने कहा, 'हमें उम्मीद है कि सीईआरसी और ईआरसी सही आदेश जारी करेगें, जिससे 2009 के बाद उत्पादन शुरू करने वाले संयंत्र अपनी स्थायी लागत वसूल कर सकें। इस कदम से कोयले की उपलब्धता और इसकी कीमत के बारे में अनिश्चितता खत्म होगी।Ó

पूर्व केंद्रीय ऊर्जा सचिव आरवी शाही ने उम्मीद जताई कि विद्युत मंत्रालय के कदम से उन बिजली उत्पादकों की मुश्किलें कम होंगी, जो महंगे आयातित कोयले के कारण दिक्कतों का सामना कर रहे हैं। इससे परियोजना डेवलपरों और ऋणदाताओं दोनों को राहत मिलेगी। उन्होंने कहा, 'इस परामर्श-पत्र के अलावा विद्युत मंत्रालय को प्रतिस्पर्धी बोली के दिशानिर्देशों में आवश्यक सुधार करने चाहिए। नियामक को जितना जल्दी हो जल्दे व्यक्तिगत मामलों पर फैसला लेना चाहिए, ताकि अनिश्चितता को दूर किया जा सके।Ó

Keyword: Power Project, power Supply And Demand, Power Production, Electric, बिजली की मांग, विद्युत उत्पादन क्षमता, विद्युत मंत्रालय,
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