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मॉनसून में सरकार पर होगी राहत की फुहार!
बीएस संवाददाता /  August 01, 2013

संसद का मॉनसून सत्र शुरू होने में अभी कुछ दिन बाकी हैं लेकिन इस दौरान कांग्रेस की अगुआई वाली संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार पर कुछ राहत की फुहारें गिर सकती हैं। मुख्य विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार को खाद्य सुरक्षा विधेयक और जमीन अधिग्रहण विधेयक जैसे अहम मसलों पर समर्थन दे सकती है। मॉनसून सत्र 5 अगस्त से शुरू होगा और 30 अगस्त तक चलेगा।
करीब डेढ़ घंटे तक चली सर्वदलीय बैठक में विपक्षी सदस्यों ने सरकार से यह भी पूछा कि उसे तेलंगाना के गठन के लिए मॉनसून सत्र के दौरान ही विधेयक पेश करना चाहिए क्योंकि यह आंध्र प्रदेश के इस इलाके के लोगों की लंबे समय से मुखर मांग रही है। विपक्ष के वरिष्ठï नेताओं ने कहा कि अभी तक कांग्रेस पार्टी ने ही तेलंगाना के गठन को मंजूरी दी है और सरकार जब इस मामले में संसद में विधेयक ले आएगी तो फिर यह सरकारी फैसला हो जाएगा।
लोकसभा में प्रतिपक्ष की नेता सुषमा स्वराज ने यह मांग रखी। वहीं केंद्रीय गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे ने कहा कि मॉनसून सत्र में यह संभव नहीं लगता लेकिन अगले छह महीने में तेलंगाना के गठन का रास्ता पूरी तरह साफ हो जाएगा। इस बीच तृणमूल कांग्रेस नेताओं ने केंद्र सरकार की गोरखालैंड क्षेत्रीय प्रशासन से वार्ता का विरोध किया और कहा कि इस मामले में केंद्र सरकार पश्चिम बंगाल सरकार की अनदेखी करने की कोशिश कर रही है। तृणमूल कांग्रेस नेता सुदीप बंद्योपाध्याय ने कहा, 'इन मसलों पर व्यापक रूप से चर्चा हुई। चुनाव से ऐन पहले सरकार द्वारा तेलंगाना के गठन के ऐलान ने काफी मुश्किलें पैदा कर दी हैं।'
केंद्र सरकार इस सत्र के दौरान 44 विधेयक पेश करना चाहती है लेकिन विपक्षी नेताओं ने संकेत दिया कि इन सभी विधेयकों पर विचार के लिए समय बहुत कम होगा। भाजपा के वरिष्ठï नेता और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष अरुण जेटली ने कहा कि सरकार इस मामले में जरूरत से ज्यादा महत्त्वाकांक्षी बनने की कोशिश कर रही है और कोई चमत्कार ही इसे संभव बना सकता है क्योंकि सरकारी कामकाज के लिए केवल 12 सत्र ही होंगे। वरिष्ठï भाजपा नेताओं ने इशरत जहां मुठभेड़ मामला उठाने का भी फैसला किया और कांग्रेस पर आरोप लगाया कि इसके जरिये वह खुफिया ब्यूरो (आईबी) और केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के बीच दरार पैदा करना चाहती है।
भाजपा नेता सरकार से इस बात को लेकर भी नाराज हैं कि उसने राजनीतिक दलों के मशविरे के बिना ही प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) से जुड़े नियमों में बदलाव कर दिया। भाजपा नेता मॉनसून सत्र के दौरान रुपये की घटती हैसियत और देश की अर्थव्यवस्था की बदरंग होती तस्वीर पर भी चर्चा करना चाहते हैं। महत्त्वपूर्ण सर्वदलीय बैठक के दौरान अधिकांश राजनीतिक दलों ने सरकार से पूछा कि वह यह सुनिश्चित करे कि उच्चतम न्यायालय के हालिया फैसले के बाद नेताओं के चुनाव लडऩे संबंधी फैसले में सुधार किया जाए। शीर्ष अदालत ने हाल में पुलिस हिरासत में या जेल में बंद जनप्रतिनिधियों पर चुनाव लडऩे पर रोक लगा दी है। सरकार से मांग की है कि मॉनसून सत्र में राष्ट्रीय न्यायिक आयोग विधेयक भी पारित कराए।
सरकार से अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान  में संकाय में आरक्षण से संबंधित उच्चतम न्यायालय के फैसले पर भी कदम उठाने के लिए कहा गया है। जनता दल यूनाइटेड के अध्यक्ष शरद यादव ने कहा कि उच्चतम न्यायालय के फैसले से जब एससी,एसटी और ओबीसी आबादी प्रभावित होगी तो संसद का सत्र कैसे निर्बाध चल सकता है।

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