बिजनेस स्टैंडर्ड - रिकॉर्ड उत्पादन की धमक से चना हुआ बेदम
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रिकॉर्ड उत्पादन की धमक से चना हुआ बेदम
सुशील मिश्र / मुंबई July 29, 2013

देश में रिकॉर्ड दलहन का उत्पादन होने के अनुमान से चना तीन साल के न्यूनतम स्तर पर पहुंच गया है। चना कीमतें गिरकर 2500 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गईं जबकि सरकार ने चने का न्यूनतम समर्थन मूल्य 3000 रुपये प्रति क्विंटल तय कर रखा है। पिछले एक महीने में वायदा बाजार में चने की कीमतों में 15 फीसदी गिरावट आ चुकी है जबकि सालभर में चने की कीमतें घटकर आधी रह गई हैं। दलहन फसलों के रिकॉर्ड उत्पादन और रकबे में बढ़ोत्तरी के साथ देश में मौजूद सरप्लस स्टॉक की वजह से चने का दम अभी और फूलने वाला है।

चने की कीमतों में लगातार गिरावट का रुख बना हुआ है। वायदा बाजार में चना की कीमतें गिरकर 2567 रुपये के निचले स्तर पर आ चुकी हैं। सालभर में वायदा बाजार में चने की कीमतों में करीबन 45 फीसदी की गिरावट आ चुकी है। वायदा की तरह हाजिर बाजार में भी भारी स्टॉक के कारण चने का दम फूल रहा है। राजस्थान के बीकानेर मंडी में कीमतें गिरकर 2500 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच चुकी हैं जो पिछले करीब तीन साल का न्यूनतम स्तर माना जा रहा है। सरकार द्वारा घोषित न्यूनतम समर्थन मूल्य से भी नीचे चने के बिकने की वजह दलहन फसलों का अधिक उत्पादन है। इंडिया इन्फोलाइन की नलिनी राव के अनुसार इस साल देश में दलहन फसलों की रिकॉर्ड पैदावार हुई है और चालू खरीफ सत्र में दलहन फसलों की बुआई भी पिछले साल की अपेक्षा दोगुनी होने की उम्मीद है।

सरकार ने चने का एमएसपी 3000 रुपये प्रति क्विंटल तय कर रखा है जबकि चना 2500 रुपये प्रति क्विंटल के पास पहुंच गया है। इस पर कोटक कमोडिटी के फैयाज हुदायनी कहते हैं कि सरकार द्वारा जारी किए गए ताजा अनुमान में चने का रिकॉर्ड उत्पादन 88 लाख टन होने की बात कही गई जो चने की कीमतों को तोड़ रहा है। चने की कीमतें गिरकर 2320-30 रुपये प्रति क्विंटल तक जा सकती हैं और मांग में तेजी आई तो यह चढ़ कर 2800  रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच सकता है यानी चना एमएसपी से फिलहाल नीचे ही बिकने वाला है क्योंकि बाजार में चने का सरप्लस स्टॉक है।

गौरतलब है कि देश में अभी तक सबसे से ज्यादा 2010-11 में 82 लाख टन चना उत्पादन का रिकॉर्ड है। बीकानेर उद्योग मंडल के प्रवक्ता पुखराज चोपड़ा का कहना है कि सरकार द्वारा तय किए गए न्यूनतम मूल्य से भी कम दर पर फसलों का खुलेआम बिकना सरकारी वादे का मजाक है। हाजिर और वायदा दोनों में कीमतें कम हैं लेकिन सरकार चुप है।

चालू खरीफ सीजन में दलहन फसलों की बुआई में करीब 90 फीसदी की बढ़ोत्तरी हुई है। दलहन फसलों का रकबा पिछले साल के 39.52 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 73.63 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गया। इस साल दलहन उत्पादन का नया रिकॉर्ड बन सकता है। कृषि मंत्रालय द्वारा जारी किये गए वर्ष 2012-13 के चौथे फसल उत्पादन अनुमान के मुताबिक इस बार देश में दलहन का उत्पादन 184.5 लाख टन होने का अनुमान है जबकि तीसरे अग्रिम अनुमान में उत्पादन 180 लाख टन होने की उम्मीद जताई गई थी। वही वर्ष 2011-12 में देश में दलहन फसलों का कुल उत्पादन 170.9 लाख टन हुआ था। अभी तक देश में दलहन फसलों का उत्पादन सबसे ज्यादा वर्ष 2011-12 में रिकॉर्ड 182.4 लाख टन का है।

Keyword: Agriculture, Farmer, Monsoon, Paddy, मॉनसून, धान, किसान, दलहन उत्पादन, चना , किसान कृषि उपजों,
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