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जेट-एतिहाद सौदा : संशोधित समझौते में भी विवादास्पद पहलू!
नयनिमा बसु और इंदीवजल धस्माना
बीएस संवाददाता / नई दिल्ली July 28, 2013

अबूधाबी की एतिहाद एयरवेज की तरफ से बोर्ड में निदेशकों की संख्या 3 की बजाय 2 रखने पर सहमति जताए जाने के बाद भी संशोधित शेयरधारक समझौते (एसएचए) में विवादास्पद उपबंध हो सकते हैं क्योंकि विदेशी निवेश संवर्धन बोर्ड (एफआईपीबी) सोमवार को एक बार फिर जेट-एतिहाद सौदे पर विचार करेगा।

एयरलाइंस की तरफ से एफआईपीबी, डीआईपीपी और सेबी को 25 जुलाई को सौंपे गए नए एसएचए में कहा गया है कि बोर्ड में निदेशकों की संख्या 12 होगी, जिनमें से 4 का नामांकन जेट करेगी और इन्हें 'प्रवर्तक बोर्ड सदस्यÓ कहा जाएगा। जबकि एतिहाद के दो निदेशक होंगे, जिन्हें 'निवेशक बोर्ड सदस्यÓ के तौर पर जाना जाएगा। इसके अलावा छह स्वतंत्र निदेशक होंगे। पहले के एसएचए में एतिहाद को तीन निदेशक नामांकित करने की शक्ति दी गई थी।

नई इकाई का चेयरमैन जहां जेट चुनेगी, वहीं वाइस चेयरमैन का चुनाव एतिहाद करेगी। इसके अलावा संशोधित एसएचए में कहा गया है कि चेयरमैन की अनुपस्थिति में वाइस चेयरमैन को बोर्ड बैठक की अध्यक्षता करने का अधिकार होगा। सूत्रों ने कहा, एसएचए में खास उपबंध तूफान खड़ा कर सकता है क्योंकि अगर चेयरमैन अनुपस्थित रहे तो महत्त्वपूर्ण फैसले की बाबत एतिहाद को ज्यादा शक्ति मिल जाएगी।

एफआईपीबी, डीआईपीपी और सेबी की तरफ से यह शुरुआती आपत्तियों में से एक है कि कंपनी की रोजाना के संचालन के मामले में एतिहाद के पास ज्यादा अधिकार होंगे, जो नागरिक विमानन में एफडीआई नीति से जुड़े नियमों प्रभावी नियंत्रण व मालिकाना हक का उल्लंघन करते हैं।

एतिहाद के पास अंकेक्षण समिति में एक सदस्य को नामांकित करने का अधिकार होगा। सूत्रों का कहना है कि यह विवाद की एक अन्य वजह हो सकती है।
इसके अलावा स्वतंत्र निदेशकों की नियुक्ति या इसे हटाए जाने के प्रावधानों को मामले में संशोधित एसएचए मूल एसएचए से बहुत ज्यादा अलग नहीं है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, सिर्फ शब्दावली बदल दी गई है ताकि यह नया दिखे।

इसके अलावा सूत्रों ने कहा, संशोधित वाणिज्यिक सहयोग समझौते (सीसीए) के मुताबिक विमान व इंजन की खरीद के मामले में फैसला एतिहाद लेगी, न कि जेट।
शेयरधारिता का पैटर्न पहले जैसा रहेगा, जिसमें प्रवर्तक नरेश गोयल के पास 51 फीसदी हिस्सेदारी होगी, एतिहाद के पास 24 फीसदी जबकि बाकी 25 फीसदी हिस्सेदारी एफआईआई, एनआरआई, म्युचुअल फंड व अन्य के पास होगी।

एफआईपीबी ने इस सौदे पर मंजूरी टाल दी थी क्योंकि पहले के एसएचए व सीसीए के कुछ प्रावधान विदेशी निवेशक के हाथों में ज्यादा अधिकार देते हैं। डीआईपीपी और सेबी ने भी इस पर आपत्तियां जताई है। डीआईपीपी ने इस पर भी सवाल उठाया है कि एनआरआई नरेश गोयल के इक्विटी निवेश को इस सौदे में विदेशी निवेश के पूरे आकलन में कैसे शामिल किया जाएगा। अगर गोयल के इक्विटी को एतिहाद की 24 फीसदी हिस्सेदारी के साथ जोड़ दिया जाए तो 49 फीसदी विदेशी निवेश की सीमा आसानी से टूट जाएगी। उधर, समझा जाता है कि वाणिज्य मंत्री आनंद शर्मा इस सौदे को आगे बढ़ाए जाने के पक्ष में हैं।

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