बिजनेस स्टैंडर्ड - कारोबार में माहिर कलाप्रेमी पोद्दार
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कारोबार में माहिर कलाप्रेमी पोद्दार
दिग्विजय मिश्रा /  July 23, 2013

सरोज पोद्दार इन दिनों कई कारोबारी जंग के केंद्र में हैं। उनके व्यक्तित्व की झलक पेश कर रहे हैं दिग्विजय मिश्रा

एड्वेंट्ज समूह के अध्यक्ष सरोज पोद्दार कमरे में लगी तस्वीर में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के साथ नजर आ रहे हैं। कोलकाता के कारोबारी इलाके डलहौजी के हॉन्गकॉन्ग हाउस में लगी अन्य तस्वीरें भी ध्यान आकृष्टï कराती हैं। उनमें वह एपीजे अब्दुल कलाम, जॉर्ज बुश और हामिद करजई जैसी हस्तियों के साथ नजर आते हैं। ये तस्वीरें एक संदेश जरूर देती हैं कि पोद्दार भले ही अल्पभाषी हों लेकिन उनकी मित्रता बड़ी-बड़ी शख्सियतों से है।
पोद्दार के खुलने में थोड़ा वक्त लगता है। वह कहते हैं, 'मैं (वित्त मंत्री पी.) चिदंबरम को तब से जानता हूंं जब उन्होंने राजनीतिक पारी शुरू भी नहीं की थी। अब वह हमारे बड़े परिवार का हिस्सा हैं।Ó चिदंबरम के साथ उनका रिश्ता 40 साल पुराना है जब पोद्दार के पिता ने चिदंबरम के पिता से एक कपड़ा मिल खरीदी थी। वह कहते हैं, 'हम दोनों एक ही कूपे में सफर कर चेन्नई पहुंचे थे जहां उन्होंने मिल के सारे कागजात हमें सौंपे। उस वक्त से हम अच्छे दोस्त हैं।Ó पोद्दार के सामाजिक समारोहों में चिदंबरम जरूर जाते हैं। पोद्दार के बेटे और बेटी की शादी में भी चिदंबरम शिरकत करने पहुंचे।

पोद्दार के राजनीतिक ताल्लुकात पर हैरानी नहीं होनी चाहिए। आखिर वह केके बिड़ला के दामाद जो हैं, उनकी शादी बिड़ला की दूसरी बेटी ज्योत्सना से हुई है। बिड़ला परिवार का पहले से ही कई राजनीतिज्ञों और नेताओं से ताल्लुक रहा है। इस सूची में सबसे पहला नाम तो महात्मा गांधी का ही है। बापू के सबसे छोटे बेटे देवदास गांधी 'हिंदुस्तान टाइम्सÓ के संपादक थे और इस अखबार के मालिक केके बिड़ला के पिता घनश्याम दास बिड़ला थे। तेजतर्रार समाजवादी नेता जयप्रकाश नारायण भी काफी लंबे समय तक बिड़ला के निजी सचिव थे।

पोद्दार कोलकाता के एक पुराने रसूखदार मारवाड़ी परिवार से आते हैं। 1971 में हुए राष्ट्रीयकरण से पहले पोद्दारों के पास ही देश की सबसे ज्यादा कोयला खदानें थीं। पोद्दार घराने से ताल्लुक रखने वाले लोग ही जूट मिल, कपड़ा मिल, कताई मिल, छोटे इस्पात संयंत्र और चाय बागान के मालिक हुआ करते थे। वे ही महंगी गाडिय़ों के डीलर भी थे और उनके पास ही शहर में सबसे ज्यादा जमीन भी थी। उनके पिता बदरी प्रसाद पोद्दार अपनी रईसी के दिनों में शॉ वालेस के बोर्ड में थे। हालांकि इतने रुतबे और ताल्लुक के बाद भी पोद्दार खुद बड़े साधारण तरीके से पेश आते हैं। साल 2008 में जब उनके ससुर का निधन हुआ और उन्हें तीन अरब डॉलर का कारोबार (उर्वरक, चीनी, बीच, भारी इंजीनियरिंग, रियल एस्टेट, फर्नीचर और निवेश कारोबार) विरासत में मिला, उससे पहले उनकी पहचान भारत में जिलेट को लाने वाले शख्स के तौर पर की जाती थी। अब अचानक ही वह एक कंपनी को अपने नियंत्रण में लेने की लड़ाई (मंगलूर केमिकल्स ऐंड फर्टिलाइजर या एमसीएफ के लिए दीपक फर्टिलाइजर के साथ यह विवाद है) में मसरुफ हो गए हैं और वह एक कंपनी (कालिंदी रेल निर्माण) के लिए अहम भूमिका निभा रहे हैं जिसे डर है कि उसका अधिग्रहण तुरंत कर दिया जाएगा।

वह बहुराष्ट्रीय कंपनी (प्रॉक्टर ऐंड गैंबल) के साथ भी दिमागी लड़ाई से जूझ रहे हैं। पोद्दार की जिलेट इंडिया में 12.9 फीसदी की हिस्सेदारी है वहीं प्रॉक्टर ऐंड गैंबल के पास 75.9 फीसदी हिस्सेदारी है। बाजार नियामक संस्था भारतीय विनिमय एवं प्रतिभूति बोर्ड के नियमों के मुताबिक किसी भी भारतीय कंपनी में प्रवर्तक के पास 75 फीसदी से ज्यादा की हिस्सेदारी नहीं हो सकती है। ऐसे में हरेक साझेदार एक-दूसरे से यह उम्मीद करते हैं कि वे नियम को पूरा करने के लिए अपनी हिस्सेदारी कम करें। कालिंदी को पोद्दार की मदद की तब जरूरत महसूस हुई जब थोड़े कम मशहूर ओम कोठारी समूह (हाल ही में इस समूह ने जयपुर में 210 करोड़ रुपये की हवेली खरीदी है जिसके बाद यह ज्यादा मशहूर हुआ) ने यह घोषणा की कि वह कंपनी की नियंत्रण पूर्ण हिस्सेदारी चाहते हैं और अल्पांश शेयरधारक लार्सन ऐंड टुब्रो ने उसकी मदद करने से इनकार कर दिया। हालांकि यह बात केवल मदद तक सीमित नहीं है। पोद्दार कहते हैं कि कालिंदी और उनकी कंपनी टेक्समैको रेल ऐंड इंजीनियरिंग दोनों मिलकर अच्छा काम कर सकती हैं।

इस बीच एमसीएफ को लेकर भी विवाद काफी बढ़ गया। पोद्दार ने अप्रैल में एमसीएफ में 10 फीसदी हिस्सेदारी खरीद ली। एमसीएफ के मालिक विजय माल्या थे। दीपक फर्टिलाइजर ने इस महीने की शुरुआत में कंपनी का 24.46 फीसदी हिस्सा हासिल कर अपना दबदबा बनाने की कोशिश की। पोद्दार ने झुकने के बजाय कंपनी में और 6 फीसदी हिस्सा खरीद लिया। अब उन्होंने तुरुप का पत्ता फेंका है कि माल्या की 21 फीसदी हिस्सेदारी में सबसे पहले इनकार करने का अधिकार उनका है। पोद्दार का कहना है कि विजय (वह चुनिंदा लोगों में से हैं जो विजय माल्या को विजय कहकर संबोधित करते हैं) के साथ उनका रिश्ता उन दिनों से है जब उनके पिता वि_ïल माल्या सिंगर इंडिया के अध्यक्ष हुआ करते थे और वह उस कंपनी के उपाध्यक्ष थे। पोद्दार कहते हैं, 'जब उनका निधन हुआ तब मैं उस कंपनी का अध्यक्ष बना और यह 30 साल पहले की बात है।Ó इसी ताल्लुक की वजह से माल्या ने पोद्दार को सबसे पहले शेयर खरीदने से इनकार करने का अधिकार दिया है।

पोद्दार भले ही अल्पभाषी और थोड़े रूखे स्वभाव के हो सकते हैं लेकिन उन्हें बेहद तेज माना जाता है। उनके दफ्तर में हमेशा जाने वाले एक व्यक्ति का कहना है कि उनके स्क्रीन पर बीएसई के भाव हमेशा लाइव चलते रहते हैं। उनका कहना है, 'ïवह एक कुशाग्र बुद्धि के निवेशक हैं और वह हमेशा शेयर बाजार पर निगाह बनाए रखते हैं।Ó
पोद्दार का दावा है कि जिलेट ही उनकी सबसे बड़ी सफलता है। वह कहते हैं, 'स्कूल के दिनों से ही मैं जिलेट को भारत लाना चाहता था और इसे यहां लाने में मुझे 14 साल लगे।Ó हालांकि आलोचकों का कहना है कि पोद्दार भले ही कुशल निवेशक रहे हों लेकिन वह अपने पोर्टफोलियो में विविधता लाने के लिहाज से एक रूढि़वादी उद्योगपति हैं। हालांकि उन्होंने विरासत में मिली संपत्ति के कारोबार को साल 2008 (जब केके बिड़ला का निधन हुआ और पोद्दार अध्यक्ष बने) के 1.5-2 अरब डॉलर से 3 अरब डॉलर के स्तर पर पहुंचा दिया लेकिन वह पोर्टफोलियो में कोई विविधता नहीं ला सके।

उनके साथ काम करने वाले लोग उन्हें एक चतुर कारोबारी मानते हैं। पोद्दार के एडवेंट्ज समूह (जिसमें जुआरी एग्रो केमिकल्स और पारादीप फॉस्फेट शामिल हैं) के लिए उवर्रक ही मुख्य आधार है। उवर्रक के लिए फॉस्फेट जैसा कच्चा माल अहम है इसीलिए पोद्दार ने मोरक्को से फॉस्फेट खदान पाने के लिए मोरक्को की कंपनी ओसीपी को पारादीप फॉस्फेट में 50 फीसदी हिस्सेदारी दी है। उन्होंने जापान की कंपनी मित्सुबिशी के साथ मिलकर फॉस्फेट की खदान का अधिग्रहण किया है।

पोद्दार रास अल-खैमा में 4,000 करोड़ रुपये का निवेश कर एक उर्वरक संयंत्र लगा रहे हैं। पोद्दार का कहना है, 'मैं उस कारोबार में अव्वल रहना चाहता हूं जिसके लिए मैं काम कर रहा हूं। मैं किसी दूसरे कारोबार में जाने के बारे में नहीं सोच रहा।Ó

पोद्दार हफ्ते में पांच दिन काम करते हैं और सप्ताहांत में अपने दोस्तों के साथ ताश खेलना और नाती-पोतों के साथ वक्त बिताना पसंद करते हैं। पोद्दार को कलात्मक वस्तुओं का संग्रह करने का भी शौक है। दक्षिण कोलकाता में गुरुसदय रोड पर बने उनके घर पोद्दार निकेतन में जो लोग भी जाते हैं वे उनके ड्रॉइंग रूम में कलात्मक चीजों को देखकर हैरान होते हैं। दिल्ली की न्यू फ्रैंड्स कॉलोनी के उनके घर में भी कई कलाकृतियों और तराशी हुई प्रतिमाओं का अच्छा संग्रह है।

कला जगत के लोगों का कहना है कि उनके पास मशहूर कलाकारों मसलन हुसैन, राजा, राम कुमार आदि की शानदार कृतियां हैं। पोद्दार संकोच भरे लहजे में कहते हैं, 'मेरा कला जगत से ताल्लुक नहीं था लेकिन परिवार की वजह से ही मेरी दिलचस्पी बढ़ी।Ó बेशक शालीनता से बड़ी बात को हमेशा कम करके बताना ही पोद्दार का स्वभाव है।

Keyword: सरोज पोद्दार, एड्वेंट्ज समूह,
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