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छोटे उद्योगों पर पड़ रही महंगी गैस की मार
रुतम वोरा /  July 21, 2013

गैस की कीमतों में बढ़ोतरी से औद्योगिक उपभोक्ताओं की मुश्किलें बढ़ गई हैं। मुनाफा मार्जिन पर मार पडऩे के बावजूद औद्योगिक इकाइयां कीमतों में इस बढ़ोतरी के बोझ को उपभोक्ताओं पर डालने से परहेज कर रही हैं। उन्हें डर है कि इस प्रतिस्पर्धी माहौल में ऐसा करने से वे ग्राहकों को गंवा सकते हैं।

कुछ ही ऑर्डर होने के कारण कंपनियां कम क्षमता के साथ परिचालन कर रही हैं और उनकी आजीविका दांव पर लगी हुई है। ऐसी स्थिति में अधिकांश कंपनियों के मालिकों को लगता है कि मुनाफे में कमी झेलना उपभोक्ता गंवाने से बेहतर है। अंकलेश्वर में एक रसायन इकाई के मालिक बाबूभाई पटेल ने कहा, 'बीते एक साल के दौरान गैस की कीमतें खासी बढ़ी हैं। शुरुआत में हमने कीमतों में बढ़ोतरी के बोझ को उत्पाद महंगे करके उपभोक्ताओं पर डाला था। लेकिन अब मांग में गिरावट की स्थिति है और अगर हम गैस कंपनियों की तरह कीमतें बढ़ाते हैं तो अपने ग्राहकों को गंवा सकते हैं।Ó

अंकलेश्वर की इकाइयों को गुजरात गैस कंपनी लिमिटेड (जीजीसीएल) से प्राकृतिक गैस की आपूर्ति होती है, जिसे सरकार के स्वामित्व वाली गुजरात स्टेट पेट्रोलियम कॉरपोरेशन (जीएसपीसी) ने ब्रिटेन की ऊर्जा कंपनी बीजी ग्रुप से हाल में खरीदा था। जीजीसीएल सूरत, अंकलेश्वर और भरूच की गैस आधारित इकाइयों से गैस के लिए 33.29 रुपये प्रति एससीएम वसूलती है।

इस क्षेत्र में रसायन, कीटनाशकों, दवाओं, थोक दवाओं, पेट्रोलियम उत्पादों, इंजीनियरिंग, सूती वस्त्र और प्लास्टिक उद्योगों से संबंधित 1,200 इकाइयां हैं, जिनमें से लगभग 70 फीसदी ईंधन के तौर पर प्राकृतिक गैस का इस्तेमाल करती हैं। अंकलेश्वर इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के एक पदाधिकारी ने कहा, 'उद्योगों के लिए हालात बेहद गंभीर हैं। उनके ग्राहकों में अधिकांश बड़े उद्योग हैं, जिनका भुगतान चक्र 90 दिनों का है। इसलिए उनके लिए नकदी प्रवाह की समस्या भी बढ़ी है।Ó

आनंद और वल्लभ विद्यानगर अन्य ऐसे औद्योगिक क्षेत्र हैं जहां गैस की कीमतों में बढ़ोतरी का खासा असर देखने को मिला है। वल्लभ विद्यानगर के निकट इंजीनियरिंग और पेंट इकाइयों के संयुक्त उद्योग संगठन वि_ïल उद्योगनगर इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के अध्यक्ष जगदीशभाई पटेल ने कहा, 'कारोबार कमजोर है। ग्राहकों को तोडऩे के लिए इतनी तगड़ी प्रतिस्पर्धा है कि भले ही हमारे मार्जिन प्रभावित हों, लेकिन हम कीमतों में बढ़ोतरी नहीं कर सकते। हमें लगता है कि जितने समय तक रुपये में उतार-चढ़ाव रहता है, हालात ऐसे ही बने रहेंगे।Ó

एक सहकारी गैस कंपनी चरोतर गैस सहकारी मंडली लिमिटेड क्षेत्र में प्राकृतिक गैस की आपूर्ति करती है। लगभग 80 इकाइयां गैस पर परिचालित होती हैं। चरोतर गैस प्राकृतिक गैस की खरीद जीएसपीसी से करती है।

Keyword: Gas, RIL, Parliyament, Small Industry,
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