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रिटेल चेन से दो-दो हाथ करेंगे लोकल बनिया और आराम शॉप
राघवेंद्र कामत / मुंबई July 19, 2013

लोकल बनिया, आराम शॉप या बिग बास्केट जैसे नाम शायद आपने ठीक से सुने नहीं होंगे। लेकिन बड़े रिटल स्टोरों को टक्कर देने के लिए ये नाम जल्द ही आपके शहर में आने वाले हैं। दरअसल ऑनलाइन सुपरमार्केट चलाने वाली ये कंपनियां अमेरिका की दिग्गज ई-रिटेलर एमेजॉन की राह पर चल रही हैं। लोकलबनिया डॉट कॉम, बिगबास्केट डॉट कॉम और आरामशॉप डॉट कॉम जैसे ऑनलाइन उद्यम अपने घर से निकलकर दूसरे शहरों में छाना चाहते हैं।

अमेरिका में एमेजॉन सिएटल में किराने का सामान बेचती थी। उसने कुछ दिन पहले कैलिफोर्निया में भी सामान पहुंचाना शुरू कर दिया है। जल्द ही वह पूरे अमेरिका में किराने का सामान पहुंचाने जा रही है। इसी तर्ज पर मुंबई की कंपनी लोकलबनिया डॉट कॉम भी पुणे और दिल्ली में दस्तक देने वाली है। इसके लिए वह जल्द ही वेंचर कैपिटल फंड से रकम जुटाएगी।

ऐसी ही योजना बेंगलूर की बिगबास्केट डॉट कॉम की भी है। फिलहाल मुंबई और हैदराबाद में काम कर रही बिगबास्केट इस साल दिल्ली और चेन्नई में भी सामान पहुंचाना शुरू कर सकती है। उसने 2014 तक 10 शहरों तक अपना काम बढ़ाने का लक्ष्य रखा है। आरामशॉप तो इन सब से एक कदम आगे जाकर पाकिस्तान के कराची में भी आटा-दाल-चावल बेचने की जुगत भिड़ा रही है। कंपनी ने मार्च 2014 तक अपना काम 40 शहरों तक फैलाने और साइट पर 30,000 रिटेलरों को जोडऩे का लक्ष्य रखा है। कंपनी की वेबसाइट पर अभी 3000 रिटेलर मौजूद हैं।

तरीके लाजवाब
इन तीनों कंपनियों का काम करने का तरीका अलग-अलग है। लोकलबनिया आपके घर सामान दूसरे दिन पहुंचाएगी। वह साइट पर मिले ऑर्डर दिन भर इक_ïा करती रहती है और शाम को बाजार से सामान खरीदकर अगले दिन ग्राहकों तक पहुंचा देती है। फिलहाल कंपनी को रोजाना करीब 200 ऑर्डर मिलते हैं, जिनमें हरेक औसतन 1,300 से 1,500 रुपये का होता है। कंपनी की खासियत है कि वह फ्रेंच पर्पल बंद गोभी और काफिर पुदीना भी आपके घर पहुंचा सकती है।

लोकलबनिया डॉट कॉम चलाने वाली एमएनऐंडसी सप्लाई लिंक्स के निदेशक नितिन मुकादम कहते हैं, 'देश में किराना बाजार कई लाख करोड़ रुपये का है और अगर हम इसमें आधा फीसदी हिस्सेदारी हासिल करने में भी कामयाब रहे तो हमें खुशी होगी।Ó करीब साल भर पहले कारोबार शुरू करने वाली इस कंपनी को एक-दो महीने में लागत वसूल होने की उम्मीद है।

बिगबास्केट के पास खुद के कोल्ड स्टोर और गोदाम हैं और वहां से फ्रोजन और ठंडे उत्पाद कंपनी ऑर्डर मिलते ही कर देती है। वह बेंगलूर में रोजाना करीब 25 लाख रुपये के डेढ़ से दो हजार ऑर्डरों की डिलिवरी करती है। इस तरह महीने में वह 7-8 करोड़ रुपये का सामान बेच देती है। 20 से 30 फीसदी की रफ्तार से कारोबार बढ़ा रही कंपनी को अगले एक-दो महीनों में लागत वसूल होने की नौ से दस महीनों में मुंबई तथा हैदराबाद में मुनाफा शुरू होने की उम्मीद है।

बिगबास्केट के संस्थापक और मुख्य मार्केटिंग अधिकारी विपुल पारेख कहते हैं, 'हमें किराये और बिजली पर कुछ खर्च नहीं करना पड़ता, जो मुंबई में काफी महंगा है। दो-तीन गोदामों से ही हम पूरे शहर में पहुंच जाते हैं।Ó

इन दोनों के उलट आरामशॉप डॉट कॉम अपनी वेबसाइट पर किराना स्टोर और रिटेल शृंखलाओं के पते देती है। ग्राहक पसंदीदा रिटेलर से सामान मंगा सकता है। आरामशॉप ग्राहकों को सामान की सूची बनाने में मदद करती है और उसे चुने गए रिटेलर तक ईमेल या एसएमएस के जरिये भेज देती है। रिटेलरों को बुनियादी सेवाएं मुफ्त मिलती हैं, लेकिन अपने उत्पादों की जानकारी वेबसाइट पर देने के लिए उन्हें पैसे देने होते हैं। कंपनी के प्रबंध निदेशक विजय सिंह बताते हैं कि कंपनी चालू वित्त वर्ष के अंत तक अपनी लागत वसूल लेगी।

गुंजाइश और आजमाइश

रिटेल विशेषज्ञों का मानना है कि ऑनलाइन किराना रिटेलरों के लिए बाजार में काफी संभावनाएं हैं बशर्ते कंपनियां आपूर्ति और भंडारण का अच्छा स्तर बरकरार रख सकें। वजीर एडवाइजर्स के संयुक्त प्रबंध निदेशक प्रशांत अग्रवाल कहते हैं, 'अगर आपूर्ति का सही प्रबंधन हो तो यह अच्छा कारोबारी मॉडल है।Ó हालांकि इस कारोबार की सबसे बड़ी चुनौतियां हैं पैसा, श्रम बल और प्रबंधन। मुकादम कहते हैं, 'इस कारोबार में मौजूद आधे लोग हमारे यहां से गए हैं। यह देखकर दुख होता है लेकिन आपको इसे स्वीकार कर आगे बढऩा पड़ता है। हम लगातार लोगों की नियुक्ति कर उन्हें प्रशिक्षण दे रहे हैं।Ó

वह बताते हैं, 'हालांकि हम एक ऑनलाइन कंपनी हैं लेकिन कारोबार चलाने के लिए हमें खासे निवेश की जरूरत होती है।Ó

Keyword: लोकल बनिया, आराम शॉप या बिग बास्केट,,
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