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धूम्रपान और शराब की लत तो महंगे बीमे की चपत
नेहा पांडेय देवरस /  July 14, 2013

एक ताजा सर्वे आईसीआईसीआई लोम्बार्ड स्मोकिंग हैबिट्ïस 2013 में सामान्य बीमा कंपनी ने कहा कि पिछले दो वर्षों में कुल कैंसर मामलों में पांच फीसदी तंबाकू के सेवन से जुड़े हुए थे। इनमें 75 फीसदी पुरुषों और 25 फीसदी मामले महिलाओं के थे। 46 से 55 वर्ष उम्र वर्ग के लोगों में बड़ी तादाद तंबाकू सेवन करने वाले लोगों की थी।

सर्वे में कहा गया है कि भारत में धूम्रपान करने वाले 58 फीसदी लोग किसी तरह के स्वास्थ्य बीमा से जुड़े हुए नहीं हैं। इसमें खुलासा किया गया है कि औसतन धूम्रपानकर्ता दिन में पांच सिगरेट पीते हैं और वे मानते हैं कि इस सीमा के दायरे में धूम्रपान करना स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक नहीं है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की एक ताजा रिपोर्ट में कहा गया है कि तंबाकू इस्तेमाल वैश्विक तौर पर मौत का सबसे बड़ा निवारण योग्य कारण है और मौजूदा समय में वैश्विक तौर पर यह 10 वयस्कों में 1 की मौत के लिए जिम्मेदार है।

साथ ही यदि आप धूम्रपान करते हैं या नशा करते हैं तो हेल्थ कवर लेना आसान काम नहीं है। आपको कई कठोर चिकित्सकीय परीक्षणों से गुजरने और ऊंचा प्रीमियम चुकाने की जरूरत होगी। यदि आप सिर्फ एक सिगरेट भी पीते हैं तो भी आप धूम्रपानकर्ता की श्रेणी में शामिल हैं। भले ही आपके द्वारा लिए जाने वाले सिगरेट की संख्या को लेकर मानक कड़े हैं, लेकिन सामान्य और जीवन बीमा कंपनियां ऐसी आदतों वाले लोगों के लिए अलग कवर मुहैया कराती हैं।

अपोलो म्यूनिख हेल्थ इंश्योरेंस में मुख्य कार्याधिकारी एंटनी जैकब कहते हैं, 'धूम्रपान करने वाले लोग हेल्थ इंश्योरेंस खरीद सकते हैं। हालांकि यदि संबद्घ व्यक्ति द्वारा लिए जाने वाले सिगरेट की संख्या नियमित तौर पर उनके स्वीकार्य स्तर से अधिक पाई जाती है तो बीमा कंपनी बीमा के लिए इसे ठुकरा सकती है या भार बढ़ा सकती है। धूम्रपान करने वालों से अतिरिक्त स्वास्थ्य जांच के लिए भी कहा जा सकता है, क्योंकि बीमा कंपनियां जोखिम कारक के निर्धारण के लिए परिणामों का इस्तेमाल करती हैं और उसके हिसाब से प्रीमियम वसूलती हैं।Ó

सभी सामान्य बीमा कंपनियों के लिए कोई विशेष मानक नहीं है जिसे लेकर वे प्रीमियम वसूल सकें या अतिरिक्त चेक-अप के लिए कह सकें। आपका खुलासा आपके लिए मानकों को सख्त बनाए जाने या कवर (आपकी उम्र और तंबाकू सेवन के स्तर समेत अन्य कारकों पर निर्भर करता है) के लिए इनकार किए जाने के लिए पर्याप्त है। मौजूदा समय में धूम्रपान करने वाले लोगों के लिए जारी की जाने वाली स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी पर कोई विशेष शर्त नहीं लगाई गई हैं। ये पॉलिसी गैर-धूम्रपान वाले लोगों की तरह ही हैं। आईसीआईसीआई लोम्बार्ड में अंडरराइटिंग एंड क्लेम्स के प्रमुख संजय दत्ता कहते हैं कि हालांकि भविष्य में ये योजनाएं विकसित हो रही हैं जिनमें प्रीमियम अंतर गैर-धूम्रपान करने वालों की तुलना में धूम्रपान करने वाले लोगों पर लागू होगा। अक्सर 45 या 50 वर्ष की उम्र वर्ग में धूम्रपान करने वालों से बीमा पॉलिसी से पहले अतिरिक्त चिकित्सकीय जांच के लिए कहा जाता है।

लेकिन सामान्य बीमा कंपनियां ऐसे पॉलिसीधारकों से अतिरिक्त शुल्क वसूलने की योजना बना रही हैं। बढ़ते चिकित्सा खर्च और स्वास्थ्य बीमा क्षेत्र में ऊंचे दावों की वजह से सामान्य बीमा कंपनियां बढ़ते नुकसान से बचने का प्रयास कर रही हैं। इस समस्या से निपटने के लिए कई बीमा कंपनियों ने इस साल सभी पॉलिसीधारकों के लिए प्रीमियम में 15-20 फीसदी तक का इजाफा किया है। नए स्वास्थ्य बीमा प्रावधान इस साल अक्टूबर से प्रभावी हो रहे हैं। इससे सामान्य बीमा कंपनियां धूम्रपान जैसे मानकों पर विचार कर सकती हैं और इसी के अनुसार प्रीमियम निर्धारित कर सकती हैं। कारण: इन बीमा कंपनियों को मौजूदा सालाना कॉन्ट्रैक्ट्ïस के बजाय आजीवन नवीनीकरण की पेशकश करनी होगी।

फ्यूचर जेनेराली इंडिया इंश्योरेंस में स्वास्थ्य बीमा के प्रमुख सीरज देशपांडे कहते हैं कि हेल्थ पॉलिसी की अवधि अस्पताल में भर्ती होने या क्षतिपूर्ति कवर में (सिगरेट के सेवन के आधार पर) सामान्य तौर पर अलग नहीं होती है। वह कहते हैं, 'गंभीर बीमारी में पॉलिसी लोडिंग सेवन स्तर के साथ अलग अलग होता है। प्रति दिन सिगरेट के अधिक सेवन का मतलब है अधिक लोडिंग।Ó उनकी कंपनी क्षतिपूर्ति प्लान के लिए धूम्रपान करने वालों से 10 फीसदी अधिक वसूलती है।

यदि आप नशे के भी आदी हैं तो स्थिति और बदतर हो जाती है। जैकब कहते हैं, 'शराब और तंबाकू दोनों के सेवन से मधुमेह, किडनी खराब होने, दिल का दौरान पडऩे जैसी बीमारियों का जोखिम बढ़ जाता है। बीमा कंपनियां शराब और तंबाकू दोनों का सेवन करने वाले लोगों को अधिक जोखिम वाले लोगों के रूप में
देखती हैं।Ó

बजाज आलियांज लाइफ इंश्योरेंस के प्रमुख (टेक्नीकल) पी रवि कुटुंबराव कहते हैं, 'सामान्य तौर पर बीमा कंपनियां जिन सूचनाओं को जुटाती हैं, उनमें व्यक्ति द्वारा धूम्रपान के वर्ष और सेवन किए जाने वाले सिगरेटों की संख्या के साथ साथ उम्र चिकित्सकीय परीक्षण (कॉलेस्टेरॉल लेवल, ब्लड प्रेशर आदि) आदि की जानकारी शामिल होती है। इन जानकारियों से शर्तें निर्धारित करने या अतिरिक्त प्रीमियम की जरूरत का पता लगाने में मदद मिलती है।Ó

भारती एक्सा लाइफ इंश्योरेंस के प्रमुख राजीव कुमार के अनुसार धूम्रपान करने वाले पर गैर-धूम्रपान वाले की तुलना में लगभग 35 फीसदी तक का अधिक प्रीमियम लग सकता है। धूम्रपान और नशे दोनों के आदी व्यक्ति को सह-रुग्ण कारकों (एक समय में एक प्रकार की अनियमितता से अधिक से जूझ रहे व्यक्ति) के रूप में देखा जाता है, लेकिन इसके लिए अलग शर्त नहीं है।

शराब और सिगरेट दोनों का सेवन वाले लोगों से अन्य बातों के साथ साथ शर्तों में बीमा कंपनी द्वारा निर्णायक फैसला लिए जाने से पहले लीवर फंक्शन टेस्ट जैसे अतिरिक्त चेक-अप के लिए कहा जा सकता है।

55 वर्ष या इससे अधिक उम्र के शराब या सिगरेट पीने वाले लोगों के लिए उम्र-संबंधित जोखिमों की वजह से कवर दिए जाने से इनकार किए जाने की आशंका अधिक रहती है।

अन्य समस्या यह है कि ऐसी आदतों के बारे में कुछ लोग बीमा कंपनी को नहीं बताते हैं। ऐसे मामलों में यदि आपको शराब के सेवन या तंबाकू की वजह से कुछ हो जाता है तो अस्पताल में भर्ती होने या मौत की स्थिति में आपके दावे को खारिज किया जा सकता है। इसलिए या तो भारी-भरकम प्रीमियम से बचने के लिए धूम्रपान करना छोड़ दें या फिर पॉलिसी लेते वक्त इसका खुलासा करें और उसके अनुसार भुगतान करें।

Keyword: Personal Finance, Investment, Insurance, बीमा , Insurance Policy, FD, Loan, Bond, Real Estate,
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