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बाढ़ से चरमराया उत्तराखंड का बुनियादी ढांचा
शिशिर प्रशांत / देहरादून June 23, 2013


उत्तराखंड में आई भयानक बाढ़ और भूस्खलन से हुई तबाही में मृतकों के दिन-ब-दिन बढ़ते आंकड़े के बीच इस पवर्तीय राज्य के बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचने की आशंका है। राज्य के मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा का यह मानना है कि बर्बादी इतने बड़े पैमाने पर हुई है कि बुनियादी ढांचे को फिर से दुरुस्त करने में कम से कम दो से तीन साल लग जाएंगे। इस प्राकृतिक आपदा के कारण गढ़वाल क्षेत्र की अर्थव्यवस्था भी चरमरा गई है। उत्तराखंड इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के अध्यक्ष पंकज गुप्ता ने कहा कि उद्योगों को बड़ा नुकसान हुआ है और सर्वाधिक प्रभावित जिलों में करीब 13,000 से 14,000 सूक्ष्म उद्योग और व्यापारिक इकाइयों पर सबसे ज्यादा मार पड़ी है।
इस बीच, भारी बारिश होने के अनुमान को ध्यान में रखते हुए सेना और वायुसेना के जवान प्रभावित इलाकों में युद्घस्तर पर बचाव कार्य करने में जुटे हैं। मौसम विभाग ने अगले 48 घंटे में भारी बारिश का अनुमान लगाया है।

अब तक करीब 83,000 हजार लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा चुका है। उत्तराखंड के मुख्य सचिव सुभाष कुमार ने बताया कि अब भी विभिन्न इलाकों में 5 से 7 हजार लोग फंसे हुए हैं। शुरुआती अनुमान यह है कि रुद्रप्रयाग, चमोली, उत्तरकाशी और पिथौरागढ़ जैसे सर्वाधिक प्रभावित जिलों की ध्वस्त हो चुकी सड़कों और पुलों को दोबारा बनाने में करीब 10,000 करोड़ रुपये की जरूरत होगी। हालांकि सरकार को अभी इसका आकलन करना है और विशेष पैकेज के लिए इससे जुड़ी एक रिपोर्ट केंद्र सरकार को भेजनी होगी। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने इस हफ्ते प्रभावित क्षेत्रों का हवाई दौरा कर पहले ही 1000 करोड़ रुपये के एक पैकेज की घोषणा कर दी है। राज्य सरकार के मुताबिक राज्य के 147 पुल पूरी तरह से ध्वस्त हो गए हैं। विभिन्न स्थानों की 1300 सड़कें भी टूट गईं हैं। राज्य के आपदा प्रबंधन मंत्री यशपाल आर्य का कहना है, 'भारी बारिश और बाढ़ से नष्ट हो चुके सड़कों के नेटवर्क को दोबारा तैयार करना बेहद मुश्किल होगा।'

राज्य में पहले से ही सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) ने व्यापक पैमाने पर सड़क मरम्मत योजना शुरू कर दी है। बीआरओ ने विभिन्न क्षेत्रों में करीब 4000 लोगों को बुलडोजर और उपकरण थमा कर काम करने का निर्देश दिया है। बीआरओ के एक अधिकारी का कहना है, 'हर साल सड़कें बड़े पैमाने पर क्षतिग्रस्त होती हैं और इन्हें दोबारा दुरुस्त किया जाता है लेकिन इस दफा व्यापक स्तर पर तबाही हुई है।Ó सड़कों और पुलों के अलावा रुद्रप्रयाग क्षेत्र में कई निर्माणाधीन पनबिजली परियोजनाएं भी बुरी तरह से प्रभावित हुई हैं। जीवीके, एलऐंडटी, लैंको ग्रुप और यूजेवीएन की परियोजनाओं को भारी नुकसान हुआ है। अलकनंदा नदी पर जीवीके की 330 मेगावॉट क्षमता वाली परियोजना के लिए जेनरेटर उपलब्ध कराने वाली बीएचईएल और उसके ठेकेदारों को भी नुकसान हुआ है। बाढ़ के कारण इन संयंत्रों पर लगे टरबाइन और जेनरेटरों में पानी और गाद भर गया है, जिससे इन संयंत्रों को पूरा होने की अवधि दो-एक साल और आगे खिसक सकती है। एलऐंडटी के 99 मेगावॉट क्षमता वाले संयंत्र को भी नुकसान हुआ है। उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग और चमोली जिले में मौजूद दर्जनों होटलों की इमारतें पूरी तरह से ढह गई हैं। पर्यटन मंत्री अमृता रावत का कहना है, 'पर्यटन क्षेत्र को काफी बड़ा नुकसान पहुंचा है और इस स्थिति का आकलन करने में लंबा वक्त लगेगा।'

Keyword: Uttarakhand, Flood, Companies,
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