बिजनेस स?टैंडर?ड - 'उत्तराखंड हादसे से कई सबक लिए जाने की जरूरत'
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'उत्तराखंड हादसे से कई सबक लिए जाने की जरूरत'
उत्तराखंड आपदा ने आपदा प्रबंधन और बचाव अभियानों की तमाम खामियों को उजागर कर दिया है। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) के वाइस चेयरमैन एम शशिधर रेड्डी ने हरिद्वार से टेलीफोन पर संजय जोग को कई समस्याओं के बारे में बताया
संजय जोग /  June 23, 2013

राजनीतिक दलों, पर्यावरण संस्थाओं और गैर सरकारी संगठनों (एनजीओ) ने कहा कि एनडीएमए उत्तराखंड व हिमाचल प्रदेश में भारी बारिश का अनुमान लगाने में नाकाम रहा। आपका क्या कहना है?

मौसम की भविष्यवाणी के लिए भारतीय मौसम विभाग जिम्मेदार है। मौसम विभाग एक निर्धारित प्रारूप में नियमित रूप से बुलेटिन जारी करता है। मौसम विभाग ने अपने 12 जून के बुलेटिन में उत्तराखंड सहित कई स्थानों पर भारी बारिश की बात लिखी थी। इसी क्रम में 14 जून के बुलेटिन में भी भारी बारिश का अनुमान जाहिर किया गया था। मैं स्पष्ट कर रहा हूं कि एनडीएमए मौसम का अनुमान जाहिर करने और उस पर नजर रखने वाली संस्था नहीं है। उत्तराखंड में जो कुछ हुआ, एनडीएमए उसको लेकर चिंतित है और इससे कई सबक लिए जाने की जरूरत है।

उत्तराखंड हादसे से मौसम विभाग की चेतावनियों और प्रभावित क्षेत्रों के बीच कमजोर संपर्कों की कलई खुल गई है। आप क्या मानते हैं?
जहां तक उत्तराखंड के चार धाम की यात्रा पर आने वाले लाखों की यात्रियों की बात है तो अनुमानों के सटीक होने की जरूरत है। निश्चित रूप से अनुमानों और मौसम निगरानी व्यवस्था में सुधार किए जाने की जरूरत है। एनडीएमए पहले ही 19 जून को मौसम विभाग के साथ बैठक कर चुका था और अन्य एजेंसियों के साथ भी अनुमान और मौसम निगरानी व्यवस्था में सुधार के लिए विचार-विमर्श कर चुका है। मौसम विभाग पहले ही कुछ आधुनिकीकरण का प्रस्ताव रख चुका है। हम मौसम विभाग से सबसे बेहतर संभावित समाधान, एक योजना तैयार करने के लिए कह चुके हैं।

क्या एनडीएमए ने उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के मदद मांगने तक इंतजार किया?
यह एनडीएमए नहीं बल्कि नैशनल डिजास्टर रिस्पॉन्स फोर्स (एनडीआरएफ) है जिसे विशेष प्रतिक्रिया के लिए प्रशिक्षित किया गया है, जो हमेशा तैयार रहती है। एनडीआरएफ कभी किसी तबाही का इंतजार नहीं करती है। एनडीआरएफ संवेदनशील क्षेत्रों में तैनात रहती है। एनडीआरएफ की आठ बटालियनें हैं, जबकि चार अन्य को मंजूरी मिल चुकी है। 1,140 प्रशिक्षित जवानों से बनी एनडीआरएफ की बटालियन एक महीने की भीतर उत्तराखंड में पहुंच जाएगी। एनडीआरएफ की 13 टीम उत्तराखंड गई थीं, लेकिन खराब मौसम के कारण वे आगे नहीं बढ़ सकी थीं। हालांकि एनडीआरएफ राज्य के अधिकारियों के साथ हेलीकॉप्टरों के माध्यम से प्रभावित क्षेत्रों में काम करना शुरू कर दिया।

क्या उत्तराखंड में राज्य आपदा राहत बल के नहीं होने से राहत कार्य प्रभावित हुए?
एक हद तक यह सही बात है कि विशेषकर दुर्गम क्षेत्र और आवाजाही बाधित होने से राहत कार्य में समस्या आई। हालांकि धीरे-धीरे काम शुरू हो गया।

सीएजी ने एक रिपोर्ट जारी की थी कि उत्तराखंड के पास आपदा प्रबंधन के लिए कोई योजना नहीं है। क्या एनडीएमए ने इस मुद्दे को राज्य सरकार के सामने उठाया है?
सभी राज्यों की अपनी योजनाएं हैं। एनडीएमए ने कई रिमाइंडर भेजे और राज्यों को आपदा प्रबंधन योजना (डीएमपी) बनाने के लिए पूंजी भी उपलब्ध कराई। कुछ राज्यों के मामले में डीएमपी तैयारी के विभिन्न चरणों में है। उत्तराखंड के पास एक योजना है, लेकिन यह उपयुक्त डीएमपी नहीं है। मुझे मालूम है कि उत्तराखंड में मुख्य ध्यान बचाव और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाने पर है।

उत्तराखंड आपदा से क्या अहम सबक सीखने को मिले हैं?
कई सबक सीखे हैं। हमको अपनी अनुमान जाहिर करने से संबंधित क्षमताओं को मजबूत करने की जरूरत है। इसके अलावा डीएमपी को जल्द से जल्द लागू किए जाने की जरूरत है। उत्तराखंड की बाढ़ अप्रत्याशित है, लेकिन इस तरह की आपदा से पार पाने की तैयारी में सुधार की जरूरत होगी।

Keyword: NGO, Uttarakhand, Flood,
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