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'नियंत्रण' बनेगा 'प्रभावी नियंत्रण'
वृष्टिï बेनीवाल /  June 18, 2013

पिछले सप्ताह जेट-एतिहाद सौदे में प्रभावी नियंत्रण का मुद्दा गहराने के बाद औद्योगिक नीति एवं संवद्र्घन विभाग (डीआईपीपी) एक कैबिनेट नोट जारी करेगा जिसमें 'प्रभावी नियंत्रणÓ और 'नियंत्रणÓ को सामूहिक बना कर इस समस्या को सुलझाया जाएगा।

मौजूदा समय में सरकार द्वारा प्रभावी नियंत्रण को परिभाषित नहीं किया गया है। उम्मीद है कि डीआईपीपी 'नियंत्रणÓ को परिभाषित करेगा। यह परिभाषा वैसी ही हो सकती है, जैसी प्रभावी नियंत्रण की होती है। प्रभावी नियंत्रण में किसी के पास संबंधित कंपनी में निदेशकों का बहुमत नियुक्त करने और प्रमुख नीतिगत फैसलों को प्रभावित करने का अधिकार होता है। वर्तमान में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश नीति के अनुसार नियंत्रण उसके पास निहित है जिसके पास कंपनी में निदेशकों का बहुमत नियुक्त करने का अधिकार है।

'प्रभावीÓ शब्द का इस्तेमाल नीति में विशेषण के तौर पर किया गया है।  नई परिभाषा में नियंत्रण और प्रभावी नियंत्रण एक ही होगा। इसलिए इन्हें फिलहाल अलग से परिभाषित करने की जरूरत नहीं है। वित्त मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि कैबिनेट की मंजूरी के बाद रिजर्व बैंक इस उद्देश्य से जुड़े प्रेस नोट अधिसूचित करेगा।
जेट-एतिहाद सौदे पर फैसला पिछले हफ्ते विदेशी निवेश संवद्र्घन बोर्ड ने टाल दिया था, क्योंकि सरकार प्रभावी नियंत्रण और मालिकाना के बारे में और ज्यादा विवरण चाहती थी। जेट-एतिहाद समझौते के तहत एतिहाद के पास प्रबंधन के काफी ज्यादा अधिकार जाने की आशंका जताते हुए सेबी, कंपनी मामलों के मंत्रालय और डीआईपीपी ने चिंता प्रकट की थी। इसी के बाद यह फैसला हुआ।

एफडीआई नीति कहती है कि उस एयरलाइन को मंजूरी दी जा सकती है जो पंजीकृत है और जिसका भारत के भीतर प्रमुख रूप से कारोबार है। साथ ही कंपनी का चेयरमैन और कम से कम दो-तिहाई निदेशक भारतीय होने चाहिए और उसका काफी स्वामित्व और कारगर नियंत्रण भारतीय नागरिक के हाथ में होना चाहिए।

अधिकारियों का कहना है कि एतिहाद ने जेट में महज 24 फीसदी हिस्सा लिया है और प्रबंधन में उसकी शह जेट जितनी ही होगी। उनका कहना है कि जेट और एतिहाद के बीच शेयरधारिता समझौता इस तरह तैयार किया गया है कि निर्णय प्रक्रिया में एतिहाद की अच्छी खासी भूमिका होगी। नियंत्रण की नई परिभाषा में इन सब मसलों पर गौर किए जाने की संभावना है। ऐसे में मुमकिन है कि जेट को एतिहाद के साथ अपने समझौते को फिर से तैयार करना पड़े।

समझौते में एतिहाद को प्रस्तावित अधिकारों में 14 सदस्यों के बोर्ड में तीन नोमिनी/निवेशक निदेशक नियुक्त करने, अपने नोमिनी निदेशकों में से एक को उपाध्यक्ष नियुक्त करने और संयुक्त ऑडिटर में एक नियुक्त करने का अधिकार दिया गया है। साथ ही बोर्ड की हरेक समिति में उसका एक-एक नोमिनी निदेशक होगा।
सरकार ने विमानन में एफडीआई की सीमा 49 प्रतिशत तय कर दी है जिससे कि प्रबंधन भारतीयों के ही हाथ में रहे।

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