बिजनेस स्टैंडर्ड - ब्याज लागत बढऩे से निवेशक चिंतित
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ब्याज लागत बढऩे से निवेशक चिंतित
कर्ज लेकर कारोबार में विस्तार करने वाली कई भारतीय कंपनियों को कर्ज चुकाना भारी पड़ रहा है। ऐसी ही
देव चटर्जी / मुंबई 06 13, 2013

अदाणी एंटरप्राइजेज के शेयर में निवेश करने वाले पवन धरणीधरका के लिए वर्ष 2013 की शुरुआत अधिक उत्साहजनक नहीं रही। इस साल जनवरी के बाद अब तक कंपनी का शेयर 35 फीसदी टूट चुका है जिससे निवेशक परेशान हैं।

इस स्टॉक के खराब प्रदर्शन के कारण बिल्कुल स्पष्टï हैं- वित्तीय लागत में वृद्धि और मुनाफे में कमी। मार्च 2013 तक अदाणी समूह की होल्डिंग कंपनी अदाणी एंटरप्राइजेज के बहीखाते में करीब 54,496 करोड़ रुपये का शुद्ध ऋण दर्ज था जो ब्लूमबर्ग के 63,155 करोड़ रुपये के आंकड़े से कम है। कंपनी को अपनी ऑस्ट्रेलियाई परिसंपत्ति प्रवर्तक परिवार को बेचने से कर्ज बोझ कम करने में मदद मिली। बढ़ती लागत से निपटने के लिए अदाणी समूह की होल्डिंग कंपनी द्वारा उठाया गया एक महत्त्वपूर्ण कदम है। लेकिन चिंता की बात यह है कि वित्त वर्ष 2012-13 में कंपनी की समेकित ब्याज लागत 1,825.6 करोड़ रुपये बढ़कर 3,493 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है जो करीब 90 फीसदी अधिक है।

अदाणी एंटरप्राइजेज के कार्यकारी निदेशक और अदाणी समूह के मुख्य वित्तीय अधिकारी देवांग देसाई ने कहा, 'कोयले की उपलब्धता, कीमतों में वृद्धि और बिजली निकासी संबंधी समस्याओं के कारण हमारा बिजली कारोबार कठिन दौर से गुजर रहा था। हमें उम्मीद है कि इस क्षेत्र को पुनर्जीवित करने के लिए प्राथमिकता के आधार पर इन मुद्दों को निपटाया जाएगा।Ó

बढ़ता कर्ज बोझ
अहमदाबाद में 1988 में स्थापित होने के बाद अदाणी एंटरप्राइजेज का कारोबारी दायरा आज काफी बढ़ चुका है। कंपनी ट्रेडिंग, कोयला खनन, रियल एस्टेड, शिपिंग, शहरी गैस वितरण, बिजली उत्पादन, खाद्य तेल रिफाइनिंग और अनाज भंडारण से लेकर प्रसंस्करण तक के कारोबार में संलग्न है। 1994 में सूचीबद्ध होने के बाद कंपनी ने जबरदस्त विकास किया है।

शुरुआती वर्षों में गौतम अदाणी की स्वामित्व वाली यह कंपनी ट्रेडिंग गतिविधियों पर ध्यान केंद्रित किया था। लेकिन अर्थव्यवस्था के खुलने के साथ ही कंपनी को बुनियादी ढांचा के विकास में बड़ी संभावनाएं दिखीं। इसलिए कंपनी ने जल्द ही देशभर में बंदरगाहों, कोयला खदानों, बिजली उत्पादन, शहरी गैस वितरण और रियल एस्टेट जैसे क्षेत्रों में कारोबार का विस्तार किया। इसी क्रम में कंपनी ने ऑस्ट्रेलिया में कोयला खदान खरीदी जिसे उसका दुस्साहसिक कदम बताया गया।
ऑस्ट्रेलियाई अधिग्रहण के तुरंत बाद अदाणी समूह को लगा कि प्रमुखता के आधार पर कर्ज को नहीं निपटा सकेगा। इसलिए इस साल के आरंभ में कंपनी की सहायक इकाई अदाणी पोट्ïर्स ऐंड एसईजेड (एडीएसईजेड) ने ऑस्ट्रेलिया के एबट प्वाइंट परिसंपत्ति को अदाणी परिवार के हाथों बेचने की घोषणा की। समेकित आधार पर एडीएसईजेड ने ऐबट प्वाइंट परिसंपत्ति में 2.2 अरब डॉलर का निवेश किया था। विश्लेषकों का कहना है कि यदि कंपनी को पूरे निवेश का रिटर्न मिल जाता है तो अदाणी एंटरप्राइजेज का शुद्ध मुनाफे में वित्त वर्ष 2014-15 के बाद 5 से 6 फीसदी की वृद्धि दर्ज की जा सकती है।

बहरहाल, कंपनी ने ऑस्ट्रेलिया में निवेश फिलहाल रोक दिया है। कंपनी अब तक ऑस्ट्रेलियाई खनन परियोजनाओंं में 67.5 करोड़ डॉलर निवेश कर चुकी है और कोयला खदान व रेलवे लाइन के लिए पर्यावरण मंजूरी मिलने का इंतजार कर रही है। मंजूरियां अगले छह महीनों में मिलने की उम्मीद है। तक तक कंपनी ऑस्ट्रेलिया में कोई बड़ा पूंजी निवेश करने से परहेज करेगी। अदाणी समूह को बिजली कारोबार में भी एक बड़ा झटका लगा है। अदाणी पावर को वित्त वर्ष 2013 में 1,052 करोड़ रुपये का बड़ा घाटा उठाना पड़ा। कोल इंडिया और कंपनी के विदेशी खदानों से सस्ते कोयले की कम खपत के कारण र्ईंधन लागत बढऩे और ऊंची ब्याज लागत के कारण कंपनी का प्रदर्शन काफी कमजोर रहा।

वित्त वर्ष    शुद्ध कर्ज    शुद्ध बिक्री    ब्याज लागत    शुद्ध मुनाफा
2007-08    4,700.58    19,546.03    421.56    369.75      
2008-09    9,801.58    26,181.81    558.33    504.65      
2009-10    14,959.90    25,873.72    603.97    919.30      
2010-11    29,289.05    26,405.47    633.77    2,476.09      
2011-12    63,155.57    39,355.63    1,825.56    1,839.21      
2012-13*    54,496.93    46,462.41    3,492.93    1,612.98
* बिना ऑडिट वाले आंकड़े     स्रोत:  कैपिटालाइन

Keyword: Bank Loan, Intrest Cost, अदाणी एंटरप्राइजेज,,
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