बिजनेस स्टैंडर्ड - मशीनी पैर से जोगी फिर कर रहे सैर
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मशीनी पैर से जोगी फिर कर रहे सैर
बीएस संवाददाता /  June 11, 2013

नौ सालों तक लगातार व्हीलचेयर के सहारे चलने पर मजबूर अजित जोगी पिछले दिनों एक बार फिर से अपने पैरों पर खड़े हो गए। छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री ने आर कृष्णा दास से बातचीत के दौरान अपनी 'ई लेग्स' के बारे में विस्तार से बात की।

अप्रैल महीने की 29 तारीख छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री अजित प्रमोद कुमार जोगी के लिए काफी खास थी। रायपुर स्थित उनके आवास अनुग्रह में उत्सव का माहौल था। सिर्फ परिवार के सदस्यों और नजदीकी लोगों ने ही उन्हें अपना नया रोबोटिक डिवाइस पहनते हुए देखा। पूरी तरह उनके खड़े होते ही परिवार की सदस्यों ने उन्हें घेर लिया। पिछले नौ सालों से उन्हें व्हीलचेयर पर देखते-देखते परिवार के लोग तो उनकी लंबाई तक भूल गए थे।

जोगी अपने दाएं हाथ की मदद से अपने कदम आगे बढ़ा रहे थे। एक समय में एक कदम बढ़ाते हुए वह कमरे में इधर-उधर घूम रहे थे। जब वह बाहर निकले तो उनकी खुशी में शरीक होने के लिए समर्थकों की भारी भीड़ वहां जमा थी। जोगी के चेहरे पर छाई हल्की सी मुस्कान से फिर से चल पाने की उनकी खुशी का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता था। लंबे समय बाद जोगी को फिर से टहलते हुए देखकर लग रहा था कि जैसे यह एक जन्म बाद की बात हो। एक राजनेता के लिए यह दौर काफी बुरा होता है।

ऐसा नेता किस काम का जो खड़े होकर बातें तक न कर सके। रेक्स के नाम से मशहूर रोबोटिक  एक्सोस्केलेटन की वजह से उनकी किस्मत ने करवट ली लेकिन आम लोगों के बीच चल पाने पर अभी भी पाबंदी है। अपने दम पर फिर से चलना और अपना 68वां जन्मदिन मनाना जोगी के लिए रोमांच से भरपूर था। जोगी कहते हैं, 'मैं खुश हूं और इस डिवाइस को लेकर काफी रोमांचित हूं। फिर से चल पाना मेरे लिए सुखद अनुभव है क्योंकि इसके लिए मैंने सभी तरीके आजमा लिए थे।Ó कुछ दिनों पहले ही जोगी रायपुर के न्यू क्रिकेट स्टेडियम में इंडियन प्रीमियर लीग का मैच देखने के लिए पहुंचे और वहां उन्होंने करीब पांच घंटे भी गुजारे। लेकिन उनके चेहरे पर थकान दिखाई नहीं दी। खुद चलकर वह काफी खुश नजर आ रहे थे।

भारतीय प्रशासनिक सेवा के 1971 बैच के अधिकारी जोगी अप्रैल, 2004 से व्हीलचेयर पर थे। उस साल चुनाव प्रचार अभियान के दौरान हुए सड़क हादसे में उनकी गर्दन में मोच आ गई थी और रीढ़ की हड्डïी को हुए भारी नुकसान के कारण उनके हाथों और पैरों को लकवा मार गया। इस वजह से एक वरिष्ठï नेता के तौर पर उभर रहे जोगी के राजनीतिक जीवन पर भी काफी बुरा प्रभाव पड़ा।

वह फिर से चलना चाहते थे लेकिन चिकित्सा विज्ञान एक सीमा तक ही उनकी मदद कर सकता था। इसलिए उन्होंने विकल्पों की तलाश शुरू की। उन्होंने स्टेम सेल उपचार के विकल्प पर भी विचार किया। इसके बाद पिछले तीन दशकों से जोगी के व्यक्तिगत चिकित्सक अलाउद्दीन फरिश्ता को करीब तीन साल पहले एक पत्रिका के जरिये ई-लेग के बारे में जानकारी मिली कि एक अमेरिकी कंपनी और दूसरी इजरायली कंपनी इस तरह के पैर बनाने का काम करती हैं। कंप्यूटर के जरिये नियंत्रित होने वाले यह डिवाइस स्थिरता और सुरक्षा के लिहाज से काफी बेहतरीन है।

लेकिन जोगी की उम्मीदों पर पानी तब फिर गया जब अमेरिका और इजरायल की इन कंपनियों ने उनकी मदद करने से मना कर दिया। इजरायली कंपनी ने कहा कि उनका उत्पाद सिर्फ युद्घ में घायल हुए सिपाहियों के लिए ही है। जबकि अमेरिकी कंपनी का जवाब था कि वे अपना उत्पाद अमेरिका के बाहर नहीं भेज सकते हैं क्योंकि वे इस पर नजर नहीं रख सकेंगे।

रोबोटिक तकनीक की मदद से चल पाने वाला एशिया का पहला व्यक्ति बनना इतना आसान नहीं था। जोगी कहते हैं, 'संघर्ष मेरे लिए कोई नई बात नहीं है और मैं कभी कमजोर महसूस नहीं करना चाहता हूं।Ó लेकिन वह मानते हैं कि खुद खड़ा होना और चल पाना वाकई काफी मुश्किल काम था। ई-लेग की जोगी की खोज लगातार चलती रही और आखिरकार न्यूजीलैंड में जाकर पूरी हुई। इस खोज के दौरान पता चला कि रेक्स बायोनिक्स ऐसी डिवाइस बनाती है। खास बात यह है कि छत्तीसगढ़ का रहने वाला ही एक व्यक्ति न्यूजीलैंड की उस कंपनी में कार्यरत था और उसने जोगी की मदद की। मुंबई के वरिष्ठï डॉक्टर अशोक हिशिकर ने कंपनी को इस डिवाइस को बेचने के लिए राजी करने में अहम भूमिका निभाई।

फरिश्ता के मुताबिक कंपनी ने मरीज को न्यूजीलैंड लाने के लिए कहा, लेकिन जोगी की बुरी हालत के कारण यह संभव नहीं था। सौभाग्य ही था कि हिशिकर ने कंपनी के अधिकारियों को जोगी की जांच के लिए मुंबई आने के लिए राजी कर लिया। जोगी ने इसके लिए पहली बार पिछले साल मार्च में मुंबई में परीक्षण कराया था। इसके बाद कंपनी ने उनके पैर के आकार के मुताबिक उनका ई-लेग तैयार किया। एक बैटरी की मदद से चलने वाले इन पैरों को घर पर आसानी से चार्ज किया जा सकता है। ये पैर एक बार में करीब सात घंटों तक चलने में मदद कर सकते हैं। कंपनी के डॉक्टर और तकनीशियन पिछले दिनों रायपुर आए और उन्होंने प्रक्रिया पूरी की।
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लगभग 38 किग्रा भारी इस डिवाइस को पहनने के लिए जोगी को एक सहायक की जरूरत होती है। जोगी बैठकर ही इस डिवाइस को पहन सकते हैं। इस डिवाइस में पैरों को बांधने वाली गेलिस, पट्टिïयां भी होती हैं। एक बार अच्छी तरह पहन लेने के बाद जोगी आराम से खड़े हो सकते हैं। इसका कंट्रोल पैड पेट के पास दायीं तरफ होता है। जोगी इस पैड और ज्वॉय स्टिक की मदद से इन टांगों का संचालन कर सकते हैं। एक विशेष प्रकार के बैग में इन पैरों को समेट कर गाड़ी में भी ले जाया जा सकता था। यात्रा करते वक्त इसे उतार देना जरूरी होता है क्योंकि बैठने के लिहाज से ये टांगे आरामदायक नहीं हैं। जबकि रेक्स बॉयोनिक्स का कहना है कि कार में चलते वक्त भी इन पैरों को पहने रहा जा सकता है।

लेकिन जोगी यात्रा के दौरान इसे पहनना पसंद नहीं करते हैं। इसे तैयार करने में प्रयुक्त की गई सामग्री का वजन काफी कम है और इसमें एल्युमीनियम की गेलिस और चमड़े के पट्टों का प्रयोग किया गया है। पेशियों को मजबूत करने के लिए जोगी को व्यायाम करने की सलाह दी गई है।

यह मशीन स्वचालित है और इसके लिए शारीरिक शक्ति की कोई जरूरत नहीं होती है। जोगी नियमित रूप से फिजियोथेरेपी और दूसरी कसरतें करते हैं। फरिश्ता कहते हैं, 'शुरुआती दिनों में वह बहुत कम समय के लिए इसका इस्तेमाल करते थे लेकिन धीरे-धीरे उन्होंने समयावधि बढ़ा दी है।Ó डॉक्टर का कहना है कि इस डिवाइस की मदद से जोगी एक बार फिर से चल पाने में सक्षम हो सके हैं और उनका खोया हुआ आत्मविश्वास लौट आया है। वह कहते हैं कि इससे आंतों और ब्लैडर के आसपास होने वाले दर्द से उन्हें राहत मिली है और रक्त का संचार भी बढ़ गया है।
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सड़क हादसे के बाद भी जोगी नहीं चाहते थे कि इस दुर्घटना का असर उनके राजनीतिक जीवन पर पड़े। वह कहते हैं, 'तीन महीने के भीतर मैंने व्हीलचेयर के सहारे पार्टी का काम शुरू कर दिया था।Ó अब तो लंबे समय तक खड़े रह सकते हैं और मंच या फिर विधानसभा में लंबा भाषण दे सकते हैं।

डिवाइस से उनके काम पर कोई असर नहीं पड़ेगा। जोगी कहते हैं कि दरअसल इस डिवाइस की मदद से उनके काम में काफी मदद मिलेगी। उन्हें भीड़ के बीच न चलने से बचने के लिए कहा गया है। वह कहते हैं, 'प्राकृतिक अंगों का विकल्प तो मुश्किल है लेकिन फिर इन पैरों की वजह से मुझे काफी राहत मिली है।Ó

उच्चस्तरीय तकनीक का बेहतरीन नमूना ये टांगें 27 प्रोसेसर्स की मदद से काम करती हैं। इसके जरिये इस्तेमाल करने वाला व्यक्ति चलने, घूमने और चढ़ाई पर चलने में भी इसका प्रयोग कर सकता है। इस उपकरण की कीमत 1 करोड़ रुपये से भी अधिक है। इतनी भारी रकम चुकाने के लिए परिवार को काफी संघर्ष करना पड़ा।

जोगी ने बताया, 'कंपनी ने आधी रकम का भुगतान परीक्षण से भी पहले करने के लिए कहा।Ó दूसरी समस्या यह थी कि सारा भुगतान न्यूजीलैंड डॉलर में किया जाना था। परिवार के सदस्यों की मदद से सारी रकम जुटाई गई। परिवार के एक डॉक्टर ने सबसे अधिक 5 लाख रुपये दिए। जोगी कहते हैं, 'जिन्होंने भी मेरी बीमारी के लिए पैसे दिए मैं उनका ऋणी हूं और मैं उन सभी को पैसे वापस करूंगा।Ó

उनके सारे खर्च की भरपाई छत्तीसगढ़ सरकार करेगी। मरवाही विधानसभा क्षेत्र से विधायक होने के नाते यह उनका हक है। लेकिन आर्थिक सहायता के लिए दी गई उनकी अर्जी पर राज्य सरकार की ओर से कोई जवाब अभी तक नहीं मिला है। जोगी कहते हैं कि घायल होने के बाद मुख्यमंत्री रमन सिंह ने घोषणा की थी कि इलाज का सारा खर्च राज्य सरकार वहन करेगी और उन्हें अपनी बात का मान रखना होगा। वह कहते हैं, 'सारा खर्च वापस लेना मेरा हक है और मैं इसे लेकर रहूंगा।Ó शायद इसलिए यह लड़ाई जारी है। वैसे भी अब जल्द ही चुनाव आने होने वाले हैं और ताजा हालात में उनकी जिम्मेदारी भी बढ़ गर्ई है।

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