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राजनीति के रण में रुका भाजपा के भीष्म का रथ!
भाजपा और राजग के संस्थापकों में एक रहे लालकृष्ण आडवाणी राजनीतिक रूप से अलग-थलग पड़ गए हैं। भाजपा �
बीएस संवाददाता / नई दिल्ली 06 10, 2013

एक ओर जहां प्रमुख विपक्षी राष्टï्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) फिर से केंद्र की सत्ता पाने के लिए रणनीति को धार देने की योजना बना रहा है वहीं दूसरी ओर गठबंधन के शीर्ष नेता लालकृष्ण आडवाणी के हालिया कदम से गठबंधन की बुनियाद दरकती नजर आ रही है। राजग की दूसरी सबसे बड़ी सहयोगी जनता दल यूनाइटेड (जदयू) ने कहा कि राजग 'वेंटिलेटर सपोर्टÓ पर है और अब उसमें बने रहना मुश्किल है। राजग की सबसे पुरानी सहयोगी शिवसेना ने भी कहा है कि यह प्रकरण बेहद दुखद है और आडवाणी के बिना राजग की कल्पना भी नहीं की जा सकती।

गठबंधन की अगुआ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के लिए सहयोगी दल बेहद अहम हैं क्योंकि उसकी देश के सभी इलाकों में मौजूदगी नहीं है और उसे केंद्र की सत्ता पाने के लिए गठबंधन के सहयोगियों की संख्या हर हाल में बढ़ानी होगी। मगर मामला उलटा ही नजर आ रहा है। गठबंधन के अधिकांश सहयोगियों ने भाजपा के सभी पदों से आडवाणी के इस्तीफे को उसका अंदरूनी मामला जरूर बताया है लेकिन उन्होंने इस पर निराशा जरूर जाहिर है है। हालांकि उन्हें अब भी उम्मीद है कि शीर्ष नेता मान मनौवल के बाद मान जाएंगे।

इसमें सबसे अहम रुख राजग की दूसरी सबसे बड़ी सहयोगी जनता दल यूनाइटेड (जदयू) का है। जदयू अध्यक्ष और राजग संयोजक शरद यादव ने कहा भी है कि उन्हें आडवाणी के इस्तीफे का बेहद अफसोस है। शिरोमणि अकाली दल (शिअद) के अध्यक्ष और पंजाब के उपमुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल ने कहा कि यह भाजपा का अंदरूनी मामला है और पार्टी इसे सुलझा लेगी।  जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष शरद यादव ने आडवाणी के इस्तीफे को एक गंभीर मसला बताते हुए कहा कि और यह राजग की सेहत के लिए अच्छा नहीं है। उन्होंने कहा कि ताजा घटनाक्रम की समीक्षा के लिए उनकी पार्टी की बैठक होगी। यादव ने कहा, 'आडवाणी जी के इस्तीफे से मैं काफी दुखी हूं क्योंकि अटल जी और आडवाणी जी के प्रयासों से ही राजग बना था। आडवाणी जी इसके कार्यकारी अध्यक्ष भी हैं और अटल जी स्वस्थ नहीं हैं।Ó

पार्टी के प्रमुख नेता और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी इस मसले पर तल्ख तेवर जाहिर किए हैं। शिवसेना प्रवक्ता संजय राउत ने कहा कि राजग के लिए पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी का योगदान अनमोल है। उन्होंने कहा कि आडवाणीजी के बिना राजग की कल्पना भी नहीं की जा सकती। राउत ने कहा कि शिवसेना प्रमुख उद्घव ठाकरे का कहना है, 'हम सब उन्हें मनाएंगे।Ó यह पूछे जाने पर कि भाजपा और राजग पर इस इस्तीफे का क्या असर होगा, शिवसेना नेता राहुल नारवेकर ने कहा, 'श्री आडवाणी राजग और भारतीय जनता पार्टी में में सबसे बड़े कद के नेताओं में से एक हैं। उनका मार्गदर्शन राजग के लिए सबसे ज्यादा महत्त्वपूर्ण है। उनका इस्तीफा निश्चित रूप से चिंता का कारण है और हम जरूर चाहेंगे कि भाजपा इस मामले को सुलझा ले।Ó नारवेकर ने कहा, 'आडवाणी का मार्गदर्शन कीमती है और जिसकी भविष्य में भी हमें जरूरत रहेगी।Ó

शिवसेना जहां इस मसले पर नरम है, वहीं जदयू के तेवर उतने ही गरम हैं। पटना में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने आज कहा कि इस नाटकीय घटनाक्रम के सभी पहलुओं पर हम चर्चा करेंगे और अपना रुख शीघ्र ही प्रकट करेगें। उन्होंने इन खबरों को भी गलत बताया कि मोदी को चुनाव अभियान समिति का अध्यक्ष बनाए जाने के फैसले से पहले भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने नीतीश कुमार से बात की थी। जदयू के प्रधान महासचिव के सी त्यागी ने कहा कि आडवाणी अपमानित हुए हैं। उन्होंने कहा, 'राजग अब वेंटिलेटर पर है और राजग में बने रहना हमारे लिए कठिन होगा। जब कद्दावर नेता और भाजपा और राजग के संस्थापक यह कहते हैं कि पार्टी के अनेक नेता अपना व्यक्तिगत एजेंडा चला रहे हैं तो हमारे लिए कठिन होगा।Ó

मोदी के साथ जयललिता!
लालकृष्ण आडवाणी के इस्तीफा देने के बाद सहयोगियों के दबाव में आई भाजपा को बारे में तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जे जयललिता के बयान ने कुछ राहत दी। जयललिता  ने कहा, यह भाजपा का अंदरूनी मामला है। मैं व्यक्तिगत स्तर पर केवल यही कहूंगी कि नरेन्द्र मोदी मेरे अच्छे मित्र हैं और मेरी शुभकामनाएं सदैव उनके साथ हैं। इससे मोदी खेमे का हौसला बढ़ सकता है।
जारी है मान मनौवल
शीर्ष नेता के इस्तीफे से सकते में आए भाजपा नेता पूरे दिन मान मनौवल करते दिखे। भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने दिन में दो बार आडवाणी से मुलाकात की। खुद नरेंद्र मोदी ने भी आडवाणी से फोन पर बातचीत की और उनसे इस्तीफा वापस लेने का अनुरोध किया। लोकसभा में प्रतिपक्ष की नेता सुषमा स्वराज और भाजपा उपाध्यक्ष एस एस अहलूवालिया ने भी आडवाणी के आवास पर जाकर उनके इस्तीफा वापस लेने की गुजारिश की। आडवाणी के करीबी माने जाने वाले भाजपा के पूर्व अध्यक्ष वेंकैया नायडू भी पूरे दिन खासे सक्रिय रहे। उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह ने भी कहा कि आडवाणी को देश हित में इस्तीफा वापस लेना चाहिए।

उन्होंने कहा कि आडवाणी संघ के प्रतिबद्घ स्वयंसेवक रहे हैं और संघ में बुद्घिमान लोगों की कमी नहीं हैं और वे उन्हें जरूर मना लेंगे। इस्तीफे की खबर सामने आते ही भाजपा के कई दिग्गज नेताओं ने आडवाणी के पृथ्वीराज रोड स्थित आवास का रुख किया। भाजपा के वरिष्ठï नेता और दिल्ली विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष विजय कुमार मल्होत्रा उन नेताओं में से थे, जिन्होंने तुरंत आडवाणी से मुलाकात की। हालांकि आडवाणी ने गृह मामलों की संसद की स्थायी समिति की बैठक में शिरकत की लेकिन वहां शांत ही रहे। 

जिन प्रमुख पदों पर हुए आसीन
आधिकारिक पद
अध्यक्ष
दिल्ली मेट्रोपॉलिटन काउंसिल, मार्च 1967 से मार्च 1970 तक
विपक्ष के नेता
राज्य सभा, जनवरी-अप्रैल 1980
लोकसभा, नवंबर 1991 से जुलाई 1993 तक
लोकसभा, मई 2004 से जनवरी 2010 तक
मंत्री पद
सूचना प्रसारण मंत्री, मार्च 1977 से जुलाई 1979 तक
गृह मंत्री 1998
उप प्रधानमंत्री, अक्टूबर 1999 से मई 2004 तक
राजनीतिक पद
अध्यक्ष
दिल्ली राज्य जनसंघ (1970-72)
अखिल भारतीय जन संघ (फरवरी 1973, अप्रैल 1974 और फिर अप्रैल 1975 में पुनर्निर्वाचन)
भारतीय जनता पार्टी (मई 1986 से 1991 तक, फिर जुलाई 1993 से मई 1998 तक)
उपाध्यक्ष
दिल्ली राज्य जनसंघ, 1965-67
महासचिव
जनता पार्टी (1977-80)
भारतीय जनता पार्टी
(1980-86)

Keyword: Narendra Modi, BJP, NDA, PM, Election LK Aadvani, लाल कृष्ण आडवाणी ,,
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