बिजनेस स्टैंडर्ड - नशे के शिकंजे में फंसता पंजाब
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Tuesday, April 07, 2020 12:32 AM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम खबर

नशे के शिकंजे में फंसता पंजाब
आभास शर्मा /  June 06, 2013

समझा जाता है कि पंजाब के 70 फीसदी युवा हेरोइन और कोकीन से लेकर मेडिकल स्टोरों में बिकने वाली दवाओं तक से नशा करने की समस्या से पीडि़त हैं। आभास शर्मा ने यह जानने के लिए पूरे राज्य का दौरा किया कि सरकार किस तरह से इस चुनौती से निपट रही है...

चंडीगढ़ में पोस्ट ग्रैजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल ऐंड रिसर्च (पीजीआईएमईआर) से बाहर निकल रहे  21 वर्षीय कॉलेज छात्र ने कहा, 'मेरी जिंदगी के चार साल बरबाद हो गए और मुझे यह तक नहीं मालूम कि क्या अब मेरा कोई भविष्य भी है।Ó वह पीजीआईएमईआर में बीते छह महीनों से नशा मुक्ति केंद्र में आता रहा है और उसने मादक दवाओं के खिलाफ संघर्ष और पुनर्वास के बारे में बताया। जब वह 2008 में अपने पिता का खेती का धंधा छोड़कर चंडीगढ़ आया तो वह वहां मुख्य रूप से हेरोइन, गांजा, अफीम सहित हर तरह के नशे का आदी हो गया था।

शुरुआत में सब कुछ ठीक-ठाक ही रहा। कॉलेज में पहले साल उसका प्रदर्शन ठीक ही था, लेकिन जल्द ही उसका रईस पंजाबी मुंडों के साथ मेलजोल बढऩे लगा। उसे एसयूवी, फॉर्म हाउसों पर होने वाली पार्टियां, शराब, ड्रग्स आदि का अनुभव मिलने लगा, जिनका मजा उसने पहले कभी नहीं लिया था। लगभग छह महीने के नशा मुक्ति कार्यक्रम के दौरान तलब में कमी आने लगी थी, लेकिन उसे इस बात की खुशी थी कि उसका परिवार पुनर्वास में सहयोग कर रहा था।

अगर आंकड़ों की बात करें तो पंजाब के शहरी और ग्रामीण इलाकों में यह कहानी आम है। कई स्वतंत्र शोध और सर्वे के मुताबिक राज्य की 15 से 35 साल के बीच की उम्र की 70 फीसदी से ज्यादा आबादी नशे की समस्या से जूझ रही  है। शोध से पता चलता है कि पंजाब में 13 साल की उम्र में ही किशोर नशा लेना शुरू कर देते हैं। बीते तीन महीनों के दौरान पंजाब पुलिस ने लगभग 500 करोड़ रुपये कीमत की ड्रग्स जब्त की है। संयुुक्त राष्ट्र के इंटरनैशनल क्लासिफिकेशन सर्वे से पता चलता है कि पंजाब के दोआबा, मालवा और माझा क्षेत्र के 60 फीसदी से ज्यादा परिवारों में कम से कम एक शख्स नशे का आदी है। 7,000 से ज्यादा मरीज हर साल राज्य के नशा मुक्ति केंद्रों में इलाज कराते हैं।

ये आंकड़े गंभीर हालात को बयां करते हैं और हर दिन स्थिति ज्यादा खराब होती जा रही है। पंजाब के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की प्रमुख सचिव विनी महाजन मानती हैं, 'यह एक बड़ी समस्या है।Ó महाजन कहती हैं कि नशे के आदियों के बारे में कोई भी आधिकारिक आंकड़े मौजूद नहीं है, इसलिए ये आंकड़े 'ज्यादा या कम सटीकÓ हो सकते हैं। जब कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने पंजाब में एक चुनावी सभा में कहा था कि राज्य हर 10 में से सात युवा नशे के आदी हैं, जिससे कोहराम मच गया था और अकाली दल व भारतीय जनता पार्टी ने इन टिप्पणी को 'गलतÓ बताया था।

लेकिन गांधी ने अपने शब्दों को वापस नहीं लिया था और राज्य सरकार ने इस बात से सहमति जताई थी कि समस्या काफी गंभीर है। पंजाब में नशे ने जाति और वर्ग की बाधाओं को तोड़कर रख दिया है। रईस लोग हेरोइन और कोकीन का इस्तेमाल करते हैं, जबकि गरीब तबका गोलियों और इंजेक्शन से नशा लेता है। ओलंपिक पदक विजेता विजेंद्र सिंह के करीबी मित्र और बॉक्सिंग के साथी अनूप सिंह कहलों के साथ लगभग 30 किलोग्राम हेरोइन बरामद हुई थी।

आप किसी भी नशे का नाम लें और इसका पंजाब में बड़ी मात्रा में इस्तेमाल होता पाएंगे, लेकिन हेरोइन कई रूपों में बड़ी मात्रा में इस्तेमाल होता है। अमृतसर, जालंधर, फिरोजपुर और गुरदासपुर हेरोइन, कोकीन और स्मैक के उपभोग के बड़े केंद्र हैं, जबकि लुधियाना, कपूरथला, मोगा में कृत्रिम नशों का इस्तेमाल किया जाता है। अधिकांश नशेड़ी 'भुक्कीÓ का इस्तेमाल करते हैं, जो पंजाब के खेतों में अपने आप ही उग आती है।

महाजन बताती हैं कि इस सामाजिक समस्या के बढऩे की मुख्य वजह नशे के पदार्थों की आसानी से उपलब्धता है। हेरोइन के पैकेट अक्सर पाकिस्तान से सीमा पर स्थित गांवों में आते हैं। सीमा क्षेत्रों पर सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) बड़े स्तर पर तैनात है, इसके बावजूद राज्य में हर साल बड़ी मात्रा में ड्रग्स की तस्करी होती है। 2009 में नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) के पूर्व अधिकारी साजी मोहन को राज्य में हेरोइन की चोरी के आरोप में गिरफ्तार किया गया था।

बीएसएफ के एक अधिकारी ने कहा कि पाकिस्तान के रास्ते अफगानिस्तान से ड्रग तस्करी के लिए पंजाब पारगमन बिंदु रहा है, लेकिन वास्तव में पहले कभी पंजाब में ड्रग्स रुका नहीं करती थी। वह कहते हैं, 'बीते कुछ साल के दौरान पंजाब में सीमा पार के नागरिकों की गतिविधियों में इजाफा देखने को मिला है और ड्रग्स की तस्करी आसान हो गई है।Ó उदाहरण के लिए, अक्टूबर 2012 में पाकिस्तान से आ रही एक ट्रेन में सीमेंट के कट्टों में हेरोइन बरामद हुई थी, लेकिन ड्रग्स को लाने का सबसे आसान माध्यम आम लोगों के द्वारा इसे लाना है।

बीएसएफ के अधिकारियों ने कहा कि उन्होंने कई महिलाओं को पकड़ा था और उनके कपड़ों के भीतर से लगभग 50 किलोग्राम हेरोइन बरामद की गई थी। ड्रग की आपूर्ति अफगानिस्तान से शुरू होती है, जहां इसकी कीमत लगभक एक लाख रुपये प्रति किलोग्राम है। इसकी पाकिस्तान के माध्यम से पंजाब में तस्करी होती है और इसे बाजार में 30 लाख रुपये प्रति किलोग्राम में बेचा जाता है।

पंजाब से इसे देश के कई हिस्सों में भेजा जाता है और इसकी कीमत एक करोड़ रुपये प्रति किलोग्राम हो जाती है। एक ग्राम हेरोइन को 1,000 रुपये में खरीदा जा सकता है, जबकि एक ग्राम स्मैक की लागत 300 रुपये होती है। विक्रेताओं को राज्य के बेरोजगार युवाओं में तैयार ग्राहक मिलते हैं। महाजन कहती हैं कि पंजाब में 'रोजगार पाने की इच्छा में कमीÓ का बढऩा बेहद चिंता का विषय है। कई पीढिय़ों से पंजाबी परिवारों का मुख्य व्यवसाय रही खेती अब युवाओं को अपनी ओर आकर्षित नहीं कर पा रही है।

वे लोग ब्रिटेन और कनाडा जैसे देशों का रुख कर रहे हैं जो इसका बोझ उठा सकते हैं। जो लोग गांव में ही रह जाते हैं, वे अमृतसर, चंडीगढ़ या लुधियाना जैसे शहरों की ओर ललचाते रहते हैं। एक बार जब वे वहां पहुंच जाते हैं, तो खुद को नौकरियों के लिए पर्याप्त कुशल नहीं पाते हैं। ऐसी स्थिति में उनके मन में निराशा की भावना आ जाती है। निराशा से बाहर निकलने के लिए ड्रग्स सबसे आसान रास्ता होते हैं।

पंजाब में कारागार भी एक बड़ी समस्या है। एनसीबी की एक रिपोर्ट कहती है कि लगभग 63 फीसदी कैदी नशे के आदी हैं। लेकिन महाजन कहती हैं कि इस समस्या का सामना करने के लिए जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं। पंजाब में आठ मॉडल जेलों को नशे के आदी कैदियों के उपचार के लिए प्रशिक्षण दिया गया है।

===
भले ही सरकार ने कई शोध कराए हैं लेकिन इनमें से किसी का भी प्रकाशन नहीं हो सका है। हालांकि अमृतसर में गुरु नानक देव विश्वविद्यालय में समाजशास्त्र के प्रोफेसर रवींद्र सिंह संधू ने ड्रग महामारी पर शोध में छह साल लगाए हैं। संधू ने चार मुख्य जिलों अमृतसर, जालंधर, पटियाला और बठिंडा के 600 नशे के आदियों पर शोध किया और पाया कि राज्य में ड्रग्स के आदियों की संख्या में खासा इजाफा हो रहा है। वह कहते हैं, 'यह इतना भयावह है कि किस तरह से एक पूरी पीढ़ी नशे की आदी होती जा रही है।Ó

राज्य में हेरोइन और स्मैक जैसा नशा ही समस्या नहीं है, बल्कि बड़ी संख्या में लोग रोजाना नशीली दवाएं खरीद रहे हैं। कॉरेक्स, फेनसिडिल जैसे खांसी के सीरप या प्रॉक्सीवॉन और डायजीपाम जैसी टैबलेट दवा की दुकानों पर आसानी से उपलब्ध हैं और नशा मुक्ति केंद्रों के चिकित्सक नशे के लिए इन दवाओं के बढ़ते इस्तेमाल पर चिंता जाहिर करते हैं। एक सामाजिक कार्यकर्ता बृज बेदी कहते हैं, 'कई मेडिकल स्टोर तो इस तरह की गतिविधियों के सहारे चल रहे हैं। कई ऐसे गांव हैं जहां एक अस्पताल तो दुर्लभ होगा, लेकिन वहां पर कम से कम एक दर्जन दवा की दुकानें होंगी।Ó

लोग अक्सर कहते हैं कि पंजाब में दो दुकानें सुबह जल्दी ही खुल जाती हैं, वे हैं शराब की दुकान और दवा की दुुकान। संधू कहते हैं कि पंजाब के गांवों का भ्रमण करने पर आप पाएंगे कि वहां दवाओं की दुुकानें सुबह 6 बजे ही खुल जाती हैं। वह कहते हैं, 'जब मैंने पटियाला के पास के गांवों का दौरा किया तो मैंने कई दवाओं की दुकानें देखीं, जहां लोग दवाओं के लिए एक कतार में खड़े थे।Ó युवा सीधे कोएक्सिल जैसी दवाओं को इंजेक्शन से सीधे अपने शरीर में लेते हैं। पंजाब के गांवों में कूड़े और नालियों में सिरिंजों का देखा जाना आम है। भारत के किसी अन्य राज्य की तुलना में पंजाब में आईडीयू या नसों में सीधे ड्रग लेने वालों की संख्या सबसे ज्यादा है।

महाजन मानती हैं कि पंजाब में मेडिकल स्टोरों की संख्या बड़ी समस्या है, यही कारण है कि सरकार नए लाइसेंसों के आवेदनों पर सख्ती बरत रही है। वह कहती हैं, 'हम अब लाइसेंस के लिए आवेदन करने वालों की पूरी जांच कर रहे हैं।Ó महाजन कहती हैं कि पंजाब के उप मुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल व्यक्तिगत तौर पर इस समस्या पर नजर रख रहे हैं। बीते दो साल में सरकार ने इस समस्या से निपटने के लिए लगभग 350 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। वह कहती हैं, 'यह रकम चिकित्सकों को प्रशिक्षण देने, नशा मुक्ति केंद्रों के सुधार के साथ ही शोध पर खर्च की गई है।Ó

पंजाब में सरकार से मान्यता प्राप्त लगभग 50 नशा मुक्ति केंद्र काम कर रहे हैं, जहां फिलहाल 7,000 से ज्यादा मरीजों का इलाज चल रहा है। पीजीआईएमईआर के प्रोफेसर देवाशिष बसु के मुताबिक संस्थान के नशा मुक्ति केंद्र में मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है। इस साल लगभग 1,000 मरीज यहां आए, लेकिन सभी सिर्फ पंजाब से नहीं थे। कुछ हरियाणा, जम्मू कश्मीर और हिमाचल प्रदेश से भी थे। राज्य में ऐसे भी कई केंद्र हैं जहां नशे से संबंधित मामलों को देखने के लिए पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं। ऐसी भी खबरें हैं कि मरीजों को 'अनुशासितÓ करने के नाम पर जंजीरों में बांधा जाता है और पीटा जाता है। कुछ दवा मुुक्ति केंद्रों के समाचार पत्रों में छपने वाले विज्ञापनों में नशे से मुक्ति दिलाने के लिए लेजर तकनीक से उपचार करने का दावा भी किया जाता है। बसु कहते हैं, 'अधिकांश केंद्रों में इस समस्या से निबटने के लिए कुशल कार्यबल भी नहीं है, लेकिन वे बीमारी से निजात दिलाने का दावा करते हैं।Ó

चिकित्सकों की राय है कि अधिकांश नशेड़ी परिवार का सहयोग नहीं मिलने के कारण इस बीमारी से उबर नहीं पाते हैं। 'खत्मÓ (समाप्त होना) एक ऐसा शब्द  है जो मुक्ति केंद्रों में गूंजता रहता है। बसु कहते हैं, 'नशे का आदी शख्स परिवार के सहयोग के बिना न तो इससे उबर सकता है और न ही इस समस्या से पार पा सकता है। इन लोगों को सभी अपने से दूर कर देते हैं, यहां तक कि मदद करने के बजाय सामाजिक तौर पर इनका बहिष्कार किया जाता है और उनकी समस्या गहरी होती जाती है।Ó

सरकार नशे की चुनौती को लेकर खासी गंभीर है और महाजन कहती हैं कि वह इस बुराई के खात्मे के लिए प्रतिबद्ध हैं। हालांकि सामाजिक कार्यकर्ताओं और समाज शास्त्रियों को लगता है कि यदि अगले कुछ साल में इस दिशा में गंभीर कदम नहीं उठाए गए तो 2030 तक पंजाब की युवाओं की बड़ी आबादी नशे की आदी हो जाएगी।

Keyword: Punjab, हेरोइन और कोकीन, PGIMER, चंडीगढ़ में पोस्ट ग्रैजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल ऐंड रिसर्च,,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या दवा निर्यात से पाबंदी हटाना उचित होगा?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.