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भूमि अधिग्रहण व खाद्य सुरक्षा पर बंटा राजग
ज्ञान वर्मा / नई दिल्ली June 05, 2013

संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार भले ही विचार कर रही है कि खाद्य सुरक्षा विधेयक पर विचार-विमर्श के लिए संसद का विशेष सत्र बुलाया जाए या अध्यादेश लाया जाए, लेकिन विपक्ष में इसको लेकर गंभीर मतभेद पैदा हो गए हैं। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग), शिरोमणि अकाली दल और जनता दल (यूनाइटेड) ने विधेयक पर गंभीर आपत्तियां जाहिरी की हैं और वे इसको खारिज होते देखना चाहते हैं।

जहां भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता खाद्य सुरक्षा विधेयक को कांग्रेस के 2014 के आम चुनाव में जीत की कोशिश के रूप में देखते हुए, वहीं विपक्षी दल के वरिष्ठ नेता संसद में विधेयक का विरोध करना नहीं चाहते हैं। भाजपा नेता विधेयक में कुछ बदलाव चाहते हैं और इसके लिए पहले ही केंद्र सरकार को मॉनसून सत्र या संसद के आगामी सत्र में बहस का सुझाव दिया जा चुका है।

इस बीच भाजपा खुद ही भ्रम की स्थिति में है क्योंकि राजग का पुराना सहयोगी अकाली दल ने सुझाव दिया है कि खाद्य सुरक्षा विधेयक की जरूरत नहीं है और गठबंधन के साझेदारों को संसद के बाहर और अंदर इसे गिराने के लिए एकजुट होना चाहिए।

अकाली दल एक अन्य अहम विधेयक भूमि अधिग्रहण विधेयक का डटकर विरोध कर रही है, जबकि भाजपा नेता पहले ही दोनों भूमि अधिग्रहण और खाद्य सुरक्षा विधेयकों को सैद्धांतिक रूप से समर्थन दे चुकी है। अगर उनकी चिंताओं को दोनों विधेयकों में दूर कर दिया जाता है तो भाजपा नेता संप्रग के साथ मिलकर काम करने के लिए तैयार हैं।

अकाली दल के वरिष्ठ नेता नरेश गुजराल ने कहा, 'लोगों को भोजन उपलब्ध कराने से संबंधित नए विधेयक की कोई जरूरत नहीं है। यह कांग्रेस का चुनाव जीतने के लिए मात्र एक प्रयास है और इस पहल को सिरे से खारिज किया जाना चाहिए। सरकार के पास पहले से सार्वजिनक वितरण प्रणाली मौजूद है, तो लोगों को भोजन उपलब्ध कराने के लिए क्यों न उसे मजबूत किया जाए? हम इस योजना का विरोध करते हैं।Ó

गुजराल ने कहा कि अकाली दल भूमि अधिग्रहण विधेयक का भी विरोध करेगी, क्योंकि इससे पंजाब को फायदा नहीं होगा। अकाली नेता ने कहा कि पंजाब में पहले से ही जमीन की कीमतें ऊंची हैं, अगर भूमि अधिग्रहण विधेयक लागू हो जाता है तो राज्य सरकार और उद्योगों को इससे बढऩे वाले खर्च का बोझ उठाना मुश्किल होगा।

नीतीश कुमार की अगुआई वाली बिहार सरकार भी खाद्य सुरक्षा विधेयक को लेकर ज्यादा उत्साहित नहीं है, क्योंकि जद यू के वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि इससे सिर्फ राज्य सरकार पर बोझ बढ़ेगा और केंद्र सरकार कोई जिम्मेदारी नहीं ले रही है। जद यू नेता पहले ही केंद्र सरकार के अध्यादेश लाने के विचार का विरोध कर चुके हैं और चाहते हैं कि विधेयक पर बहस के लिए संप्रग को मॉनसून सत्र से पहले संसद का सत्र बुलाना चाहिए। जनता दल यूनाइटेड के एक वरिष्ठ नेता शिवानंद तिवारी ने कहा, 'ढुलाई और वितरण बड़ी चिंता है, इसका बोझ कौन उठाएगा? बिहार सरकार इसको लेकर चिंतित है।Ó

Keyword: Food security Bill, parliyament, Sharad Pawar, UPA, NDA, Budget Session, Food Grains, NDA, UPA, BJP, JDU,
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