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कंपनियों, राजनीतिक दलों को रिटर्न में देनी होगी ज्यादा जानकारी
वृष्टि बेनीवाल /  June 03, 2013

नए आयकर रिटर्न फॉर्म में वैयक्तिक करदाताओं को अपनी परिसंपत्तियों और देनदारियों का ब्योरा देने की ताकीद के बाद वित्त मंत्रालय की नजर अब कंपनियों, न्यासों और राजनीतिक दलों पर भी है। मुमकिन है कि वित्त मंत्रालय वित्त वर्ष 2013-14 के लिए जल्द अधिसूचित होने वाले आईटीआर फॉर्म में कंपनियों, न्यासों और राजनीतिक दलों से भी ये सभी जानकारियां मांग सकता है। कुल आय की सही गणना के लिए 'अन्य स्रोतों से होने वाली आयÓ कॉलम में करदाताओं को उन दूसरे स्रोतों के बारे में भी बताना होगा, जिनसे उनको आय प्राप्त हुई है। अगर कई स्रोत हैं तो नए आईटीआर फॉर्म में प्रत्येक स्रोत से प्राप्त होने वाली आमदनी का ब्योरा अलग अलग देना होगा।

मौजूदा फॉर्म में 'अन्य स्रोतों से होने वाली आयÓ को दो हिस्सो ंमें बांटा गया है। एक रेस के घोड़ों से प्राप्त आय और दूसरी रेस के घोड़ों से इतर आय। सरकार अन्य स्रोतों को अलग से नहीं भी दे सकती है और रिटर्न भरते समय इन स्रोतों के बारे में पूरी जानकारी देना करदाता की जिम्मेदारी होगी।

नाम नहीं छापने की शर्त पर वित्त मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया, 'रिटर्न भरते समय अभी कुछ कंपनियां 'अन्य स्रोतÓ स्पष्टï नहीं करती हैं और जब आयकर विभाग अतिरिक्त आय काट लेता है तो वे इन्हें 'अन्य स्रोतÓ की श्रेणी में रख देती हैं। नए फॉर्म पेश करने के बाद करदाताओं के लिए अपनी हर आय का स्रोत बताना अनिवार्य हो जाएगा।Ó फिलहाल इन फॉर्म को राय के लिए विधि मंत्रालय भेजा गया है। नए फॉर्म आईटीआर-5 और आईटीआर-6 में करदाता कंपनियों को कंपनी अधिनियम की संशोधित अनुसूची 6 के तहत अपना बहीखाता भी देना होगा।

आईटीआर-5 का इस्तेमाल कंपनियां, व्यक्तियों का समूह और व्यक्तियों की संस्था करती है जबकि आईटीआर-6 का प्रयोग वे कंपनियां करती हैं जो आयकर अधिनियम की धारा 11 के तहत रियायत के दावे नहीं करती हैं। इंस्टीट्यूट ऑऊ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया के पूर्व अध्यक्ष वेद जैन ने बताया, 'अगर कंपनी अधिनियम की अनुसूची 6 के तहत बहीखाता दिया जाएगा तो अलग अलग मतलब निकालने की गुंजाइश नहीं बचेगी, जैसा कि पहले किया जा रहा था। इससे करदाताओं को ज्यादा स्पष्टïता मिलेगी और कर प्रणाली में पारदर्शिता भी आएगी। 'अन्य स्रोतों से आयÓ के तहत मिली जानकारी से आयकर विभाग ज्यादा बेहतर विश्लेषण कर सकेगा।Ó
संशोधित अनुसूची 6 में नया प्रारूप पेश किया गया है और भारतीय कंपनियों को 1 अप्रैल 2011 से सभी वित्त वर्ष के बहीखाते नए प्रारूप में तैयार और प्रस्तुत करने होंगे। ये संशोधन अंतरराष्टï्रीय कारोबारी वित्तीय रिपोर्टिंग व्यवहार के अनुसार ही बहीखातों की ज्यादा जानकारी सामने लाने के लिए किए गए हैं। राजनीतिक दलों और न्यासों द्वारा भरे जाने वाले आईटीआर 7 में भी आयकर विभाग ज्यादा जानकारी मांग रहा है। नए फॉर्म में राजनीतिक दलों से भारतीय चुनाव आयोग की ओर से दी गई दल की पंजीकरण संख्या मांगी जाएगी।

हालांकि जैन ने कहा कि मौजूदा कानून के तहत ही न्यास से पर्याप्त जानकारी हासिल की जा सकती है। लेकिन राजनीतिक दलों के लिए ऐसे सख्त नियम बनाना जरूरी था खासतौर पर उनके लिए, जिन पर 'रिटर्न दाखिल नहीं करने पर किसी तरह के जुर्माने का प्रस्ताव नहीं था।Ó

पिछले महीने सरकार ने आईटीआर-1, आईटीआर-2, आईटीआर-3 और आईटीआर-4 को अधिसूचित किया है, जिसमें सालाना 25 लाख रुपये से ज्यादा आय वाले गैर-वेतनभोगी व्यक्ति के लिए आयकर रिटर्न में अपनी परिसंपत्तियों और देनदारियों का ब्योरा देना अनिवार्य किया गया है।

Keyword: Income Tax Return, ITR, आयकर विभाग, Tax Return, Political Parties,,
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