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क्रिकेट का जिद्दी स्वामी नामी
गिरीश बाबू ... /  June 02, 2013

बीसीसीआई अध्यक्ष एन श्रीनिवासन को कारोबार जगत और क्रिकेट प्रशासन के क्षेत्र का शीर्ष पद पाने के लिए संघर्ष करना पड़ा। लेकिन हाल के इस तूफान का सामना करने के लिए महज जिद के अलावा भी काफी कुछ किया जा सकता था। हालांकि उन्हें आखिर में झुकना ही पड़ा। बता रहे हैं गिरीश बाबू ...

आमतौर पर सूट पहनने वाले नारायणस्वामी श्रीनिवासन के लिए यह मुफीद नहीं लगता, मुमकिन है कि लोग गलती से उन्हें किसी मंदिर का पुजारी समझ लें। उनके गोरे रंग वाले चेहरे पर लाल रंग का टीका उनकी गंभीर मुख-मुद्रा पर नाटकीयता का अहसास देता है। किसी पुजारी की तरह ही श्रीनिवासन बेहद धार्मिक हैं और जब मदद की दरकार होती है तो वह भी भगवान की ओर बड़ी उम्मीदों से देखते हैं। उनके एक निजी ज्योतिषी भी है। इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) में उनकी टीम चेन्नई सुपर किंग्स (सीएसके) खेल के मैदान में जब भी उतरती है तो उनके ज्योतिषी मैदान में शुभ माने जाने वाला एक त्रिकोण बनाते हैं। उनका मानना है कि इस तरह की धार्मिक आस्था और धार्मिक क्रियाओं की वजह से 2008 में शुरू हुए टूर्नामेंट से टीम को काफी फायदा मिला है।

लेकिन अगर आप यह समझ रहे हैं कि भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) के 68 वर्षीय अध्यक्ष और इंडिया सीमेंट्स के उपाध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक श्रीनिवासन ने अपनी जिंदगी में जो कुछ भी हासिल किया है उसके लिए वह केवल तकदीर या सितारों पर निर्भर रहे हैं तो यह सही नहीं है।

श्रीनिवासन भले ही चेन्नई के एमआरसी नगर के शानदार दफ्तर में अक्सर पूजा कराते हैं लेकिन एक कंपनी के प्रमुख और खेल प्रशासक के तौर पर वह तुरंत फैसले लेने वाले व्यक्ति के तौर पर देखेंगे। कुछ लोग उन्हें बेहद 'निष्ठुर और धूर्तÓ भी समझते हैं जो अपने हित को साधने में कोई कसर नहीं छोड़ता। उनसे जुड़ी कुछ ऐसी ही बातें आप कंपनी के बोर्डरूम में या खेल क्षेत्र में देख सकते हैं। ये बातें भी उनकी जिंदगी में आई मुश्किलों के लिए जिम्मेदार हो सकती हैं। अब श्रीनिवासन दो तरह की हकीकतों से जूझ रहे हैं। बीसीसीआई के प्रमुख की परेशानी उस वक्त और बढ़ गई जब उनके दामाद गुरुनाथ मयप्पन को पुलिस ने स्पॉट फिक्सिंग के मामले में गिरफ्तार कर लिया।

श्रीनिवासन और इंडिया सीमेंट्स दोनों ही जांच के घेरे में हैं क्योंकि इंडिया सीमेंट्स आईपीएल फ्रैंचाइजी की मालिक है। मृदुभाषी श्रीनिवासन ने कहा, 'मैं किसी भी तरह की लड़ाई नहीं चाहता लेकिन विवाद के सिरे मुझसे जुड़ रहे हैं।Ó मुमकिन है कि उनकी यह सारगर्भित टिप्पणी उन महान लोगों के लेखन का हिस्सा हो जिन्हें वे पढऩा पसंद करते हों या फिर यह किसी रहस्यमयी उपन्यास का कोई हिस्सा हो जिसमें वह दिलचस्पी लेते हों। बीसीसीआई प्रमुख के पद से इस्तीफा देने से उनका इनकार करना एक ऐसी मिसाल है जब वह खुद ही विवादों को बढ़ावा दे रहे हैं।

कारोबारी का मिशन
आप यह कह सकते हैं कि एक कारोबारी शख्स के तौर पर श्रीनिवासन एक निडर जुझारू व्यक्ति रहे हैं। इंडिया सीमेंट की शुरुआत 1946 में शंकरलिंगा अय्यर ने की थी जो एक बैंकर और उद्योग जगत के प्रमुख व्यक्ति थे। उन्होंने कारोबार में अपने साथ श्रीनिवासन के पिता टी एस नारायणस्वामी को भी शामिल कर लिया जो बैंकरों के लिए काम करने वाले एक भरोसेमंद प्रबंधक थे। पिता की मौत के बाद 1968 में श्रीनिवासन अमेरिका से भारत आए। वह अमेरिका में केमिकल इंजीनियरिंग में स्नातकोत्तर की डिग्री लेने के लिए गए थे। वह इंडिया सीमेंट्स के साथ बतौर उप प्रबंध निदेशक जुड़े। 1980 के दशक की शुरुआत तक सबकुछ ठीक ही था। लेकिन इसके बाद कंपनी के संस्थापक के बेटों, श्रीनिवासन और के एस नारायण के रिश्ते इतने तल्ख हो गए कि वे अदालत में चले गए। कंपनी के परिचालन पर श्रीनिवासन का नियंत्रण खत्म हो गया क्योंकि एक संस्थागत निवेशक के तौर पर आईडीबीआई का नियंत्रण उस पर हो गया। श्रीनिवासन को अपने करीबी दोस्त पूर्व केंद्रीय मंत्री मुरासोली मारन के सहयोग से कंपनी पर नियंत्रण करने में नौ साल का वक्त लगा। अय्यर परिवार के वारिस एन शंकर अध्यक्ष रहे लेकिन श्रीनिवासन को कंपनी को तरक्की की राह पर ले जाने के लिए रणनीति बनाने की पूरी छूट मिली।
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कंपनी को नए सिरे से उभार कर पटरी पर लाने का काम इतना आसान नहीं था। लंबे समय तक कंपनी से जुड़े रहने वाले एक कर्मचारी, श्रीनिवासन की कई मुंबई यात्राओं को याद करते हैं जब वह कर्जदाताओं के सामने प्रेजेंटेशन देने के लिए वहां जाते थे और उन्हें उनके दफ्तर के बाहर घंटों तक प्लास्टिक की कुर्सियों पर बैठना पड़ता था। वह याद करते हुए कहते हैं, 'उन्होंने किसी को भी प्रेजेंटेशन देने के लिए नहीं भेजा।Ó उस वक्त वह कोई कंप्यूटर या पावर प्वाइंट फाइल की मदद नहीं लेते थे, वह अब भी ऐसा ही करते हैं। वह कागजी दस्तावेज के साथ ही किसी के साथ बातचीत को अंजाम देते थे। वह आज भी अपने साथ कोई लैपटॉप, स्मार्टफोन या कोई अन्य गैजेट लेकर नहीं चलते हैं। आधुनिक मशीनों में उनके पास कार ही है। रोजाना के इस्तेमाल के लिए श्रीनिवासन अपनी रेंज रोवर को पसंद करते हैं।

अधिग्रहण की प्रक्रिया के जरिये इंडिया सीमेंट्स एक कंपनी के तौर पर विकसित हुई। समीक्षकों ने लिखा, 'श्रीनिवासन दोस्ती के साथ ही आक्रामक अधिग्रहणों की कला में सिद्धहस्त हैं। वह आसानी से अपने राजनीतिक संपर्कों का इस्तेमाल करते हैं, हालांकि संयोग से कम ही लोगों की इस पर नजर पड़ती है।Ó हालांकि अधिग्रहणों से उन पर कर्ज का बोझ बढ़कर 1,600 करोड़ रुपये तक पहुंचने और सीमेंट की कीमतों में कमी की दोहरी मार के चलते श्रीनिवासन को जनवरी 2003 में औद्योगिक कर्ज पुनर्गठन (सीडीआर) का रास्ता तक चुनना पड़ा था। विदेशी फंडों के माध्यम से पूंजी जुटाने का जोखिम उठाकर वह कंपनी को अपने पैरों पर खड़ा करने में कामयाब रहे।
2009 तक श्रीनिवासन ने अपनी हिस्सेदारी को बढ़ाकर 28 फीसदी तक कर लिया था। उनकी पत्नी चित्रा आज कंपनी में एक निदेशक हैं। 2012-13 में इंडिया सीमेंट्स की आमदनी 4,613.62 करोड़ रुपये रही, जबकि मुनाफा 163.5 करोड़ रुपये रहा।

ऐंजल ब्रोकिंग के अनुसंधान विश्लेषक वी श्रीनिवासन कहते हैं कि सीएसके सहित हाल के घटनाक्रम का इंडिया सीमेंट्स के मुख्य कारोबार पर कम ही असर पड़ेगा, क्योंकि उसके मुख्य उत्पाद पर असर पडऩे की उम्मीद कम ही है। हालांकि कंपनी के कॉरपोरेट गवर्नेंस पर असर पड़ रहा है। अगर कंपनी भविष्य में पूंजी जुटाने का फैसला करती है तो निवेशक इन मामलों को गंभीरता से ले सकते हैं। विश्लेषकों ने यह भी कहा कि आईपीएल से सीएसके के लाइसेंस के निरस्तीकरण का सीमेंट कंपनी पर असर नहीं पड़ेगा, लेकिन कंपनी का मार्केटिंग/ब्रांडिंग खर्च बढ़ सकता है।

क्षेत्र की मुश्किलें
यह खेल ही है जहां श्रीनिवासन ज्यादा झगड़ालू से नजर आए हैं। कई लोगों का कहना है कि वह जोड़तोड़ में माहिर हैं, अन्य का कहना है कि वह एक बड़े प्रशासक का दिमाग रखते हैं। अधिकांश लोग इससे सहमत होंगे कि वह एक ताकतवर खिलाड़ी हैं। श्रीनिवासन एक युवा की तरह टेनिस व हॉकी खेलते हैं और एक समय वह ऑल इंडिया चेस फेडरेशन के अध्यक्ष भी रहे थे। उनका पसंदीदा खेल गोल्फ है, जिसके लिए वह अक्सर तमिलनाडु के पहाड़ी क्षेत्र कोडाईकनाल जाते रहते हैं। लेकिन श्रीनिवासन का पहला प्यार क्रिकेट है। इंडिया सीमेंट्स के पास राज्य की 14-15 क्रिकेट टीमों का स्वामित्व है, जिनमें सीएसके सबसे बड़ी है।

तमिलनाडु क्रिकेट एसोसिएशन (टीएनसीए) के एक वरिष्ठ पदाधिकारी के मुताबिक वह 1995-96 में टीएनसीए में पदाधिकारी बने और अपनी अगुआई में चार-पांच गुटों को एकजुट करके वह 2002-03 में अध्यक्ष पद पर काबिज हो गए। इससे बीसीसीआई के शीर्ष पद के लिए उन्हें स्वाभाविक तौर पर बढ़त हासिल हुई है और 2011 में इस पद पर काबिज हो गए। राज्य संगठनों के अधिकारी मानते हैं कि श्रीनिवासन 'बेहद सक्षम शख्स हैं।Ó वे कहते हैं कि उनके कार्यकाल में इन संगठनों और पूर्व खिलाडिय़ों को आर्थिक सहायता मिलनी शुरू हुई। उनके आलोचक कुछ अलग ही राय रखते हैं और कहते हैं कि यह श्रीनिवासन का संगठनों और लोगों पर नियंत्रण स्थापित करने का अपना तरीका है। एक सूत्र ने उनके बारे में कहा, 'वह एक सक्षम प्रशासक हैं, लेकिन अपने फैसलों को वह बेहद सख्ती से लागू करते हैं।Ó

बीसीसीआई के पूर्व अध्यक्ष ने प्रसारण अधिकारों और टीम प्रायोजनों पर जटिल बातचीत के माध्यम से व्यावसायिक तरीके लागू किए, जिससे क्रिकेट बोर्ड पैसा जुटाने में कामयाब हो सका। अपने कारोबारी तजुर्बे के चलते श्रीनिवासन ऐसे ढांचे के लिए बिल्कुल मुफीद शख्स थे। क्रिकेट पोर्टल क्रिकइन्फो डॉट कॉम (जिसका स्वामित्व अब ईएसपीएन के पास है) के सह संस्थापक बदरी शेषाद्रि कहते हैं, 'अभी तक तीन लोग डालमिया, ललित मोदी और श्रीनिवासन बीसीसीआई की व्यावसायिक गतिविधियों को संभालने में सबसे ज्यादा कामयाब रहे।Ó लेकिन वह कहते हैं कि अन्य दोनों की तुलना में श्रीनिवासन इस खेल को बेहतर समझते हैं।
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हालांकि श्रीनिवासन के तरीके विवादों की वजह बने। उन्हें ए सी मुतैया जिन्होंने खुद को टीएनसीए के खेल प्रशासक के तौर पर प्रस्तुत किया, सहित कई शत्रु पैदा किए। मुतैया ने उच्चतम न्यायालय में यह कहते हुए एक मुकदमा दायर किया कि इंडिया सीमेंट्स के पास सीएसके का स्वामित्व होना स्पष्ट तौर पर हितों के संघर्ष का मामला है और इसके लिए नियमों को तोड़ा-मरोड़ा गया था। श्रीनिवासन दलील देते हैं कि सीएसके और अन्य फ्रैंचाइजी से संबंधित सभी फैसले बीसीसीआई की आम सभा और आईपीएल की सामान्य परिषद में लिए गए थे। उन्होंने एक साक्षात्कार में कहा था,  'यहां कोई भी फैसला विशेष रूप से एक फ्रैंचाइजी के लिए नहीं किया गया। सभी फ्रैंचाइजी के लिए एक समान रूप से फैसले किए गए थे।Ó

उनके इस्तीफे की मांग लगातार बढ़ती जा रही है, हालांकि वह शुरुआत में ही इस्तीफा देकर इनको थामने में सक्षम थे। श्रीनिवासन ने हाल में एक टीवी चैनल से कहा था कि अनिश्चितताओं के लिए चर्चित क्रिकेट के खेल में आप अचानक कैच आउट हो सकते हैं। आज वह खुद को इसी मुकाम पर पा रहे हैं।

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