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अब एनएसी में नहीं रहेंगी अरुणा राय
बीएस संवाददाता/भाषा / नई दिल्ली May 29, 2013

सामाजिक कार्यकर्ता अरुणा राय मई के बाद राष्ट्रीय सलाहकार परिषद (एनएसी) की सदस्य नहीं रहेंगी। उनका कार्यकाल शुक्रवार को समाप्त हो रहा है। राय ने मनरेगा के तहत कामगारों को न्यूनतम वेतन के बारे में परिषद की सिफारिशें नहीं मानने के लिए सरकार की आलोचना की है। राय ने परिषद की अध्यक्ष  सोनिया गांधी को पत्र लिखकर आग्रह किया था कि उन्हें एनएसी में एक और कार्यकाल देने पर विचार नहीं किया जाना चाहिए। राय ने पत्र में कहा, 'मैं आपकी आभारी हूं कि आपने मेरा आग्रह स्वीकार किया और यह आश्वासन भी दिया कि एनएसी के बाहर सामाजिक क्षेत्र में जो भी अभियान चलाए जाएंगे, आप उनका समर्थन जारी रखेंगी।Ó

राय ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी कानून (मनरेगा) के तहत कामगारों को मिलने वाले न्यूनतम वेतन के बारे में एनएसी की सिफारिशें नहीं मानने के लिए प्रधानमंत्री कार्यालय की आलोचना की। उन्होंने कहा कि यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि प्रधानमंत्री ने मनरेगा कामगारों को न्यूनतम वेतन के भुगतान को लेकर एनएसी की सिफारिशों को नामंजूर कर दिया और कर्नाटक उच्च न्यायालय के उस फैसले के खिलाफ अपील में जाने का फैसला किया, जिसमें मनरेगा कामगारों को न्यूनतम वेतन देने के लिए कहा गया था। उन्होंने कहा कि वह मनरेगा में न्यूनतम वेतन कानून का पालन कराने के प्रयास एनएसी से बाहर जारी रखेंगी।

राय ने कहा कि उच्चतम न्यायालय द्वारा कर्नाटक उच्च न्यायालय के फैसले पर स्थगनादेश देने से इनकार किए जाने के बाद सरकार का न्यूनतम वेतन भुगतान करने से इनकार और भी दुख की बात है। उन्होंने कहा कि यह बात समझ से परे है कि भारत जैसा देश न्यूनतम वेतन भुगतान से कैसे मना कर सकता है जबकि वह समावेशी विकास का दावा करता है।

 एनएसी की भूमिका के बारे में राय ने कहा कि महत्त्वपूर्ण कार्यक्रमों के कार्यान्वयन को लेकर बनाए गए एनएसी कार्यदल ने मनरेगा के कार्यान्वयन से संबंधित कई मुद्दों पर विचार किया। कार्यदल की सिफारिशें मंत्रालय को भेजी गईं, जिसने कार्यक्रम सलाहकार दल का गठन किया ताकि कार्यदल की सिफारिशों और ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा जारी नए दिशानिर्देशों के कार्यान्वयन की निगरानी की जा सके। 

उन्होंने कहा कि ग्रामीण गरीबों के जीवन को बदलने में मंत्रालय के योगदान के बावजूद इस महत्त्वपूर्ण कार्यक्रम (मनरेगा) का कार्यान्वयन चुनौती बना हुआ है। खाद्य सुरक्षा विधेयक पर राय ने कहा कि देश में भूख और कुपोषण की स्थिति को देखते हुए खाद्य सुरक्षा विधेयक पर संसद में चर्चा के बाद इसे पारित किया जाना चाहिए था। उन्होंने कहा कि एनएसी और सार्वजनिक स्तर पर विधेयक के प्रावधानों को लेकर विस्तृत और स्वस्थ चर्चा हुई। यदि संसद इस विधेयक पर चर्चा करती तो पूरी संभावना थी कि इस विधेयक को काफी अधिक समर्थन मिलता। राय ने सामाजिक क्षेत्र में सरकार के कथित खराब प्रदर्शन की भी हाल ही में आलोचना की थी।

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