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देसी बाजार में दिग्गजों से आगे है एमवे
सुरजीत दास गुप्ता और सौनक मित्रा / नई दिल्ली 05 28, 2013

यह कंपनी कमाई के मामले में प्रॉक्टर ऐंड गैंबल, जिलेट जैसी दिग्गज विदेशी और इमामी जैसी देसी एफएमसीजी कंपनी से कहीं आगे हैं। अब तो यह जीएसके कंज्यूमर हेल्थकेयर, गोदरेज कंज्यूमर प्रोडक्ट्स और मैरिको के भी करीब पहुंच रही है। अनूठी बात यह है कि ऊपर बताई गई सभी कंपनियों से उलट यह कंपनी रिटेल शृंखला की मदद लेने के बजाय सीधे ग्राहकों के घर सामान पहुंचाती है। हम दरअसल एमवे इंडिया की बात कर रहे हैं।

भारत में सीधे ग्राहकों को सामान बेचने वाली (डायरेक्ट सेलिंग) कंपनियों में अव्वल नंबर एमवे इंडिया के देश भर में करीब 15 लाख प्रत्यक्ष वितरक हैं। इनमं से आधे तो ग्राहक ही हैं, जो रियायती दाम पर सामान खरीदने की खातिर खुद ही वितरक बन गए। वितरकों की यह कतार इस मायने में बेहद अहम है कि देश भर में करीब 80 लाख रिटेल विक्रेता हैं और पेय पदार्थ बनाने वाली कंपनियां इनमें से बमुश्किल 40-50 लाख तक ही पहुंच पाती हैं।

डायरेक्ट सेलिंग के तहत वितरकों को कंपनी से जुडऩे के लिए कोई शुल्क नहीं देना पड़ता और ग्राहकों तक सामान पहुंचाने पर उन्हें कमीशन अलग से मिल जाता है। इतना ही नहीं, अगर वे अपने किसी ग्राहक को बतौर वितरक कंपनी से जोड़ते हैं तो उस ग्राहक से होने वाले मुनाफे में कंपनी उन्हें भी हिस्सा देती है।

1998 में यहां कारोबार शुरू करने वाली एमवे ने तेजी से विस्तार करते हुए 80 शहरों में 145 से ज्यादा दफ्तर और 65 गोदाम खोले हैं और उसके ग्राहक कई जगह फैले हैं। एमवे के अधिकारियों का दावा है कि उनकी करीब प्रतिद्वंद्वी कंपनियां इससे आधे शहरों में भी मौजूद नहीं हैं और उनका कारोबार एमवे से महज एक चौथाई है। प्रतिद्वंद्वी कंपनियों में ओरिफ्लेम, हर्बालाइफ, एवॉन और मोदीकेयर शामिल हैं। लेकिन 6,300 करोड़ रुपये के देसी डायरेक्ट सेलिंग बाजार का 36 फीसदी हिस्सा एमवे के पास है।

शुरुआत में आयातित सामान बेचने वाली एमवे इंडिया अब 95 फीसदी उत्पाद भारत में ही ठेके पर तैयार कराती है ताकि लागत कम रहे। कंपनी ने इसमें 200 करोड़ रुपये का निवेश किया है, लेकिन अब उसने प्रमुख ब्रांड का सामान मदुरै के पास नीलाकोट्टïई में खुद बनाने का फैसला किया है। वहां 500 करोड़ रुपये लागत वाला उसका संयंत्र 2015 में तैयार हो जाएगा। कम कीमत वाले डिस्पोजेबल रेजर, शेविंग क्रीम, हेयर ऑयल के जरिये वह बड़ी एफएमसीजी कंपनियों के बाजार में सेंध लगाना चाहती है। ये उत्पाद प्रतिद्वंद्वी कंपनियों के उत्पादों से 10-15 फीसदी सस्ते हैं। ये उत्पाद उसके राजस्व में 8 फीसदी योगदान कर रहे हैं यानी कंपनी की नीति कामयाब है।

टीवी पर विज्ञापनों की बौछार और घर-घर पहुंचते वितरकों ने कंपनी के लिए शानदार ब्रांड तैयार किए हैं। उसकी 50 फीसदी कमाई पूरक आहार के ब्रांड न्यूट्रिलाइट से होती है। टूथपेस्ट ग्लिस्टर और लिक्विड डिटर्जेंट एसए8 100 करोड़ रुपये कमाई का आंकड़ा पार कर चुके हैं। सौंदर्य प्रसाधन ब्रांड आर्टिस्ट्री और एटिट्यूड भी कमाई में 10-12 फीसदी योगदान कर रहे हैं। अब तो एमवे अपनी सहयोगी एमश्योर इंश्योरेंस एजेंसी लिमिटेड के जरिये रॉयल सुंदरम अलायंस इंश्योरेंस और मैक्स लाइफ इंश्योरेंस की बीमा योजनाएं भी बेचती है।

एमवे के अधिकारियों को मिली जमानत
एमवे इंडिया के एमडी एवं सीईओ विलियम एस पिंक्नी और अन्य दो निदेशकों अंशु बुद्घिराजा और संजय मल्होत्रा को मंगलवार को वायनाड की जिला अदालत से जमानत मिल गई। कंपनी ने कहा, 'हमें बताते हुए खुशी हो रही है कि कंपनी के तीनों वरिष्ठï अधिकारियों को वायनाड जिला अदालत से जमानत मिल गई।Ó उधर एमवे के  खिलाफ आंध्र प्रदेश में भी मामला दर्ज हुआ है।

कंपनी                             राजस्व (मार्च 2013 तक)
एमवे                    2,288.00
मैरिको                 3,407.10
डाबर                   4,349.39
गोदरेज कंज्यूमर     3,581.02
इमामी                  1,627.09
कोलगेट-पामोलिव    3,213.73
प्रॉक्टर ऐंड गैंबल*    1,297.41
जिलेट इंडिया*         1,232.90
जीएसके**            3,187.50
*आंकड़े जून 2012 तक    **आंकड़े 31 दिसंबर 2012 तक
सभी आंकड़े करोड़ रुपये में    स्रोत : बीएसई और कंपनियां

Keyword: Amway India, Arrest, Police Crime Branch, MD & CEO of Amway India, मुख्य कार्याधिकारी विलियम एस पिंक्नी,
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