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ब्रांडेड पेट्रोल-डीजल की धार हुई कम
मांग में कमी आने से तेल मार्केटिंग कंपनियों ने ब्रांडेड ईंधन का उत्पादन और वितरण घटा दिया है
कल्पना पाठक /  05 27, 2013

कम मांग और लॉजिस्टिक्स से जुड़ी कई दिक्कतों की वजह से भारत की सबसे बड़ी तेल मार्केटिंग कंपनी (ओएमसी) इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन लिमिटेड (आईओसीएल) ने अपने ब्रांडेड डीजल, एक्स्ट्रामाइल को खुदरा पेट्रोल पंप पर बेचना बंद कर दिया है। आईओसीएल के गैर-ब्रांडेड ईंधन की कुल बिक्री के मुकाबले ब्रांडेड ईंधन का अनुपात घट कर इकाई अंक तक सिमट गया है और यह कई बाजारों में 5 फीसदी से 10 फीसदी के दायरे में है। जब यह ब्रांड चमका था, उन दिनों के मुकाबले इस वक्त इसका प्रदर्शन बेहद खराब है। साल 2007 में ब्रांडेड ईंधन की बिक्री का अनुपात आईओसीएल के गैर-ब्रांडेड ईंधन की कुल बिक्री के मुकाबले 30 फीसदी था। ब्रांडेड डीजल का हाल भी कुछ ऐसा ही है।

कम बिक्री की प्रमुख वजह सरकार के कुछ फैसले हैं जिससे कीमतों में बड़ा अंतर दिख रहा है। वर्ष 2009 के बजट में ब्रांडेड ईंधन पर नए शुल्क लगाए गए जिसकी वजह से गैर-ब्रांडेड और ब्रांडेड ईंधन की कीमत में पेट्रोल के लिए 2.50 रुपये प्रति लीटर और डीजल में 4.95 रुपये प्रति लीटर का अंतर देखा गया। ब्रांडेड ईंधन को झटका लगने लगा। सबसे पहले तो ट्रक चलाने वालों ने ब्रांडेड ईंधन से दूरी बनाई जो नियमित और ब्रांडेड डीजल का इस्तेमाल करते थे। साल 2012 सितंबर में दूसरा झटका तब लगा जब सरकार ने ब्रांडेड ईंधन के लिए सब्सिडी देना बंद कर दिया। इसकी वजह से ब्रांडेड ईंधन की कीमतों में तेजी आई।

ब्रांडेड पेट्रोल महंगी और लक्जरी कार मालिकों के बीच मशहूर था। लेकिन इसके बावजूद इस वर्ग की ओर से भी मांग में कमी देखी जा रही है। हालांकि ब्रांडेड ईंधन भी कुछ अलग नहीं होते बल्कि यह नियमित वाहन के लिए इस्तेमाल होने वाला ईंधन है लेकिन इसमें कुछ विशेष उत्पाद मिले होते हैं। उस वक्त से ही कंपनी के सामने दोहरी मुश्किल खड़ी हो गई। आईओसीएल के कार्यकारी निदेशक (कॉरपोरेट कम्युनिकेशंस ऐंड ब्रांडिंग) एन श्रीकुमार का कहना है, 'कनवर्जन दर (परिवर्तन दर) में कमी आने के साथ ही जो रिटेल नेटवर्क ब्रांडेड ईंधन की पेशकश करते हैं उसमें कमी आई। नियमित और ब्रांडेड ईंधन की कीमतों में बड़े अंतर से ब्रांडेड ईंधन को बाजार से बाहर होने पर मजबूर होना पड़ा।Ó

ब्रांडेड और गैर-ब्रांडेड उत्पादों वाले उद्योगों से इतर तेल मार्केटिंग कंपनियां (जो दूसरों से ईंधन खरीदकर उन्हें रिफाइन कर उसकी मार्केटिंग करती हैं) मसलन आईओसीएल, एचपीसीएल (हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड) और बीपीसीएल (भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन) के पास मार्जिन पर असर न पडऩे देने की ज्यादा गुंजाइश नहीं बची थी कि वे कीमतों पर असर न पडऩे दें।

एक तेल मार्केटिंग कंपनी के अधिकारी नाम न बताने की शर्त पर कहते हैं कि ग्राहकों पर बढ़ी कीमतों का बोझ ज्यादा न पड़े इसके लिए कंपनी ब्रांडेड ईंधन पर अपना मार्जिन कम कर रही है लेकिन इसका कोई फायदा नहीं दिख रहा है। उनका कहना है, 'हम अगर मार्जिन कम भी करते हैं तो ब्रांडेड ईंधन पर हमारे निवेश, इसके उत्पादन की लागत और विभिन्न राज्यों में इसकी आपूर्ति के लिए लॉजिस्टिक्स से जुड़े खर्च की भरपाई भी नहीं हो पा रही है। हम ब्रांडेड और ज्यादा सब्सिडी वाले गैर-ब्रांडेड ईंधन सेगमेंट में घाटे के साथ कितने दिन तक बाजार में टिक पाएंगे?Ó इस तरह तेल मार्केटिंग कंपनियां अपने उत्पादन में कटौती कर रही हैं। पिछले पांच सालों में आईओसीएल के ब्रांडेड पेट्रोल, एक्स्ट्राप्रीमियम के कारोबार में तीन-गुना कमी आई है। आमतौर पर विभिन्न बाजारों में ब्रांडेड और गैर-ब्रांडेड पेट्रोल में 8-10 रुपये प्रति लीटर का फर्क है। डीजल में यह अंतर 16 रुपये प्रति लीटर है। कई राज्यों में कर और शुल्क की वजह से भी ब्रांडेड ईंधन के वितरण पर असर पड़ रहा है ऐसे में मांग घटना लाजिमी है।

जिन पेट्रोल पंपों पर ऐसे ब्रांडेड ईंधन मिलते थे वे अब कम हो रहे हैं। आईओसीएल के आउटलेट जहां एक्स्ट्राप्रीमियम की बिक्री होती है, उनकी तादाद पिछले पांच सालों में कम होकर 7,071 से 3,421 हो गई है। बीपीसीएल के ऐसे आउटलेट की तादाद 2007-08 के 3,589 से कम होकर 2011-12 में 1626 हो गई है। एचपीसीएल के ब्रांडेड पेट्रोल बेचने वाले आउटलेट की संख्या 2008-09 के 2,861 से कम होकर 2011-12 में 1,100 हो गई है। ब्रांडेड ईंधन का विचार साल 2002 में अस्तित्व में आया था।

भारत में तेल कंपनियों द्वारा लॉन्च किए गए ब्रांड विदेशी कंपनियों के ब्रांडेड ईंधन की तरह ही थे। ये ब्रांडेड डीजल-पेट्रोल किफायती होने और माइलेज देने के साथ ही गाड़ी की पिकअप बेहतर करते हैं और इससे इंजन भी लंबे समय तक ठीक रहता है। सबसे अच्छी बात यह है कि इससे धुआं कम दूषित होता है। इन ब्रांडेड उत्पादों का दौर 2007 तक ठीक रहा जब बिक्री बेहतर होने के साथ ही नेटवर्क का विस्तार भी बड़ी तेजी से हुआ। उस वक्त नियमित और ब्रांडेड ईंधन के बीच अधिकतम अंतर, 1.50 रुपये प्रति लीटर पेट्रोल के लिए और 25-75 पैसा प्रति लीटर डीजल के लिए था। बीपीसीएल के एक अधिकारी का कहना है, 'सभी तेल मार्केटिंग कंपनियों ने इन ब्रांडों को स्थापित करने में खूब पैसा लगाया था। हयह देखकर बड़ा दुख होता है कि तकनीक में किया गया सारा निवेश व्यर्थ साबित हो गया।Ó हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि ईंधन ब्रांड पूरी तरह बाजार से गायब होंगे या नहीं।

गिरावट की मार
                                      2007-08                       2011-12
ओएमसी    ब्रांडेड पेट्रोल    बिक्री    नेटवर्क    बिक्री    नेटवर्क
आईओसी    एक्सट्राप्रीमियम    15,02,982    7,071    5,19,048    3,421
बीपीसीएल    स्पीड    10,87,607    3,589    2,54,022    1,626
एचपीसीएल    पावर    7,20,022    2,861    1,51,757    1,100
                                       2007-08                        2011-12
ओएमसी    ब्रांडेड डीजल    बिक्री    नेटवर्क    बिक्री    नेटवर्क
आईओसी    एक्सट्रामाइल    33,67,684    10,477    1,64,001    2,221
बीपीसीएल    हाई स्पीड    11,75,602    3,949    92,129    1,075
एचपीसीएल    टर्बो जेट    12,78,743    4,183    59,625    766
स्रोत : तेल विपणन कंपनियां; बिक्री किलोलीटर में; नेटवर्क में ईंधन स्टेशनों की संख्या

Keyword: Petrol, Deasal, HPCL, Petrolium, OMC, IOCL, इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन लिमिटेड ,,
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