बिजनेस स?टैंडर?ड - दूरसंचार में हिस्सेदारी पर बदलेंगे नियम
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दूरसंचार में हिस्सेदारी पर बदलेंगे नियम
सुरजीत दास गुप्ता और आदिति फडणीस / नई दिल्ली May 16, 2013

दूरसंचार विभाग एक ही सर्किल में सेवाएं उपलब्ध करा रही दो प्रतिस्पद्र्घी कंपनियों में क्रॉस होल्डिंग पर पाबंदी लगा सकता है। विभाग इस सिलसिले में एक प्रस्ताव तैयार कर रहा है। क्रॉस होल्डिंग के तहत कोई भी कंपनी अपनी प्रतिद्वंद्वी कंपनी में हिस्सेदारी खरीद लेती है और प्रतिद्वंद्वी कंपनी भी ऐसा ही करती है।

मौजूदा नियमों के तहत किसी भी दूरसंचार कंपनी का प्रवर्तक उसी सर्किल में सेवाएं दे रही दूसरी कंपनी में 9.99 फीसदी तक हिस्सेदारी खरीद सकता है। इस प्रावधान को समाप्त किया गया तो कई विदेशी दूरसंचार कंपनियों के निवेश पर दूरगामी असर पड़ेगा। मिसाल के तौर पर वोडाफोन ने भारती एयरटेल में हिस्सेदारी खरीद रखी है। यह प्रस्ताव लागू होने से वह विवादास्पद प्रावधान भी खत्म हो जाएगा, जिसकी वजह से प्रवर्तकों के बीच विवाद होते हैं और जिसके कथित उल्लंघन के की जांच होती रहती है। दूरसंचार विभाग के एक वरिष्ठï अधिकारी ने इस खबर की पुष्टिï करते हुए कहा, 'कई निवेशकों ने 10 फीसदी हिस्सेदारी के प्रावधान का गलत इस्तेमाल किया है। वे इसका इस्तेमाल प्रतिस्पद्र्घी कंपनियों पर नजर रखने के लिए करते हैं और ग्राहकों को इसका कोई फायदा नहीं होता। इसलिए हमें इसकी इजाजत ही नहीं देनी चाहिए।Ó

एकीकृत सेवा लाइसेंस (यूएएसएल) के प्रावधान 8 के तहत अभी कोई भी कंपनी या कानूनी व्यक्ति एक ही सर्किल में लाइसेंस हासिल करने वाली दो या ज्यादा कंपनियों में प्रत्यक्ष तौर पर या सहयोगियों की मदद से 'अहम हिस्सेदारीÓ नहीं रख सकता है। 'अहम हिस्सेदारीÓ का मतलब 10 फीसदी या उससे ज्यादा है।
हालांकि प्रस्ताव के मसौदे के मुताबिक नियम इस तरह बदले जा रहे हैं, जिससे 'लाइसेंस हासिल करने वाली कोई भी कंपनी या उसके प्रवर्तक उसी सर्किल में लाइसेंस हासिल करने वाली दूसरी कंपनी में प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से कोई हिस्सेदारी या वोटिंग अधिकार नहीं ले सकेंगे। इसमें बेसिक दूरसंचार, सेल्युलर, एकीकृत सेवा के लिए लाइसेंस और एकीकृत लाइसेंस पाने वाली कंपनियां शामिल होंगी।Ó

इसमें प्रवर्तक की परिभाषा को भी स्पष्टï किया गया है। प्रवर्तक को ऐसी कानूनी संस्था माना गया है, जिसकी लाइसेंस हासिल करने वाली कंपनी में 10 फीसदी या अधिक हिस्सेदारी है। लेकिन केंद्र सरकार और उसके वित्तीय संस्थानों को प्रवर्तक की परिभाषा से अलग रखा गया है। विभाग ने प्रावधान और नियमों में बदलाव के लिए समयसीमा भी तय की है।

 अगर इन प्रस्तावों को मंजूरी दी जाती है तो ब्रिटिश कंपनी वोडाफोन को भारती एयरटेल में अपनी 4.4 फीसदी हिस्सेदारी बेचनी पड़ेगी क्योंकि वोडाफोन इंडिया में पहले ही उसकी बहुलांश हिस्सेदारी है। कई दूरसंचार सौदों में 10 फीसदी हिस्सेदारी का यह प्रावधान विवाद और जांच का सबब बन चुका है। मसलन लूप टेलीकॉम में हिस्सेदारी रखने पर एस्सार समूह के रुइया भी जांच के दायरे में आ गए। केंद्रीय जांच ब्यूरो का दावा था कि रुइया की लूप में 9.9 फीसदी से अधिक हिस्सेदारी है, जो मौजूदा प्रावधानों का उल्लंघन है क्योंकि उस वक्त वोडाफोन-एस्सार में भी उनकी 33 फीसदी हिस्सेदारी थी। हालांकि रुइया ने इस दावे का खंडन किया था। इसके अलावा टाटा और आदित्य बिड़ला समूह में भी काफी लंबा विवाद चला क्योंकि आइडिया सेल्युलर में टाटा की 48 फीसदी हिस्सेदारी थी जबकि टाटा समूह के पास अपनी दूरसंचार कंपनी टाटा टेलीसर्विसेज भी थी। आखिरकार टाटा समूह ने यह हिस्सेदारी आदित्य बिड़ला समूह को बेच दी थी।

Keyword: Telicom Sector, Tata Telinor, टेलीनॉर, टाटा समूह,
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