बिजनेस स्टैंडर्ड - बेहद जटिल है भारत का तेल एवं गैस कारोबार
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Tuesday, January 25, 2022 05:10 PM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम कंपनिया खबर

बेहद जटिल है भारत का तेल एवं गैस कारोबार
शाइन जैकब / नई दिल्ली May 15, 2013

कीमतों को लेकर जारी खींचतान और मंजूरी मिलने में हो रही देरी के साथ-साथ भारत का तेल एवं गैस क्षेत्र कई चुनौतियों का सामना कर रहा है। मार्च 2012 को समाप्त 11वीं पंचवर्षीय योजना के दौरान देश में करीब 17.69 करोड़ टन कच्चे तेल का उत्पादन हुआ जबकि अनुमान 20.06 करोड़ टन का था। दूसरी तरफ कच्च्चे तेल के आयात में आश्चर्यजनक तौर पर इजाफा देखने को मिला। वर्ष 2012-13 के दौरान कच्च्चे तेल के आयात में 149 फीसदी का इजाफा हुआ और यह 18.45 करोड़ टन रहा और इस आधार पर देखा जाए तो भारत का हाइड्रोकार्बन उद्योग एक जटिल स्थिति की बानगी पेश करता है।

नई उत्खनन लाइसेंसिंग नीति (नेल्प) के तहत आवंटित अधिकांश ब्लॉकों से अभी तक उत्पादन की शुरुआत नहीं हो पाई है। वर्ष 2009 में रिलायंस केजी डी6 के उत्पादन से बल मिला लेकिन पिछले दो वर्षों के दौरान केजी डी6 क्षेत्र से उत्पादन मेंं भारी कमी दर्ज की गई है। हालांकि तेल उत्पादन में हुआ मामूली इजाफा राजस्थान के बारमेड़ तेल क्षेत्र की वजह से है हालांकि इसका आवंटन नेल्प से पहले किया गया था। पिछले दो वर्षों के दौरान देश का प्राकृतिक गैस उत्पादन सालाना आधार पर कम होकर 9 फीसदी के स्तर को छू चुका है। वर्ष 2011-12 में गैस का औसत उत्पादन 13 करोड़ एमएससीएमडी रहा और वर्ष 2012-13 में 11.78 करोड़ एमएससीएमडी रहने का अनुमान है। तेल एवं प्राकृतिक गैस निगम (ओएनजीसी) के पूर्व चेयरमैन आर एस शर्मा ने कहा, 'हम आयात पर और अधिक निर्भर होने जा रहे हैं। अगर उत्पादन में थोड़ा भी इजाफा करना है तो सरकार को उत्खनन गतिविधियों को प्रोत्साहन देना होगा।

इसके अतिरिक्त मालिकाना विवाद और अन्य विवादों को तेजी से निपटाना होगा।Ó पर्यावरण, रक्षा और पेट्रोलियम मंत्रालय ब्लॉकों को मंजूरी देने के मामले में तेजी से काम कर रहे हैं वहीं दूसरी तरफ कीमतों को लेकर वित्त और उर्वरक एवं तेल मंत्रालयों के बीच गतिरोध की स्थिति बनी हुई है। गैस की कीमतों पर रंगराजन समिति की सिफारिशों को आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा है। रंगराजन समिति की सिफारिशों के मुताबिक केजी डी6 और अन्य क्षेत्रों से उत्पादित गैस की कीमत मौजूदा 4.2 बीटीयू से बढ़कर 8.8 बीटीयू हो जाएगी। अगर रंगराजन समिति की सिफारिशों को लागू किया जाता है तो वैसी स्थिति में बिजली मंत्रालय को सालाना करीब 43,360 करोड़ रुपये का भार वहन करना होगा जबकि उर्वरक मंत्रालय को सालाना 16,992 करोड़ रुपये का अतिरिक्त सब्सिडी बोझ वहन करना पड़ सकता है।

दूसरी तरफ वित्त मंत्रालय ने एक वैकल्पिक नीति का सुझाव दिया है और इसके तहत कतर, ओमान, अबू धाबी और मलेशिया के आपूर्तिकर्ताओं की कीमतों को शामिल किया जाएगा। आरआईएल, बीपी पीएलसी, ओएनजीसी और केयर्न इंडिया लिमिटेड पहले से ही रंगराजन समिति की सिफारिशों को लेकर अपनी आपत्ति जाहिर कर चुकी हैं।

Keyword: koltar, नई उत्खनन लाइसेंसिंग नीति , NELP,,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या बाजार में उतार-चढ़ाव को थामने के लिए बजट में होंगे उपाय?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.