बिजनेस स्टैंडर्ड - चिटफंड कंपनियों के नियमन पर उलझे नियामक
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चिटफंड कंपनियों के नियमन पर उलझे नियामक
सुष्मि डे / नई दिल्ली May 13, 2013

सारदा समूह घोटाले के हाल के खुलासे के बाद निवेशकों की रक्षा के लिए ऐसी कंपनियों के नियमन के मसले पर विभिन्न जांच एजेंसियां भ्रमित हैं। यहां तक कि विभिन्न मंत्रालय, सरकारी विभाग और नियामक जैसे कॉरपोरेट मामलों का मंत्रालय (एमसीए), गंभीर धोखाधड़ी जांच कार्यालय (एसआईएफओ), वित्तीय सेवा विभाग (डीएफएस), भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) और प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) भी इस मसले पर माथापच्ची कर रहे हैं।

इस मामले से जुड़े एक अधिकारी ने कहा कि इस तरह से अनधिकृत तरीके से धन संग्रह करने वालों पर लगाम लगाने को लेकर खासी कठिनाई हो रही है, जिनमें से कुछ तो बहुत कम समय संग्रह करते हैं और रातोंरात भाग जाते हैं।

इसके पीछे वजह है कि ये संगठन अलग अलग बिजनेस मॉडल पर काम करते हैं, जो विभिन्न विभागों के मानकों और नियमों के तहत आते हैं। हाल में हुए सारदा घोटाले की जांच कर रहे एक अधिकारी ने बिजनेस स्टैंडर्ड को बताया कि ऐसे संगठन नियामक व्यवस्था के एक दूसरे में घालमेल का फायदा उठाते हैं और सेबी तथा रिजर्व बैंक सहित किसी नियामक संस्था में पंजीकरण नहीं कराते हैं, जो प्राथमिक तौर पर गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) सहित जो धन जमा कराते हैं और जो धन नहीं जमा कराते (माइक्रो फाइनैंस इंस्टीट्यूशंस) और जो सामूहिक निवेश योजनाओं (सीआईएस) का नियमन देखती हैं। अधिकारी ने कहा कि इस तरह की कुछ धन शोधन कंपनियां भी मौजूद हैं।

उदाहरण के लिए पश्चिम बंगाल के चिट फंड घोटाले के मामले में सारदा समूह चिट फंड के रूप में नहीं काम करता था। एमसीए के अधिकारी ने बताया कि यह समूह मुख्य रूप से कंपनी पंजीयक के पास में पंजीकृत था और प्राप्त सूचनाओं के मुताबिक एनबीएफसी के रूप में काम कर रहा था। बहरहाल यह रिजर्व बैंक में पंजीकृत नहीं था, जो एनबीएफसी का नियामक है। साथ ही यह जमा संग्रह कर रहा था, जिसकी निगरानी भी केंद्रीय बैंक के जिम्मे है। इसके अलावा यह समूह निवेश योजनाएं भी चलाता था, जो सेबी के नियमन के अधीन आता है।

अधिकारी ने कहा कि ऐसा नहींं है कि कोई नियम और कानून नहीं है, जिससे ऐसी कंपनियों की निगरानी हो सके। लेकिन इनके एक दूसरे के कार्यक्षेत्र में दखल के चलते जांच के दौरान ऐसी कंपनियां बच जाती हैं और निवेशकों को चूना लगाने में सफल होती हैं। ऐसे में अब सरकार ऐसी कंपनियों पर काबू पाने और उन्हें नियमों के अधीन लाने के लिए विभिन्न मॉडलों पर विचार कर रही है। एसएफआईओ के तहत बने एक विशेष कार्यबल और डीएसएफ के तहत अंतर मंत्रालयी समूह विभिन्न बिजनेस मॉडलों का अध्ययन करेगा और सभी एजेंसियों से बातचीत कर अंतिम सलाह देगा, जो सरकार के समक्ष पेश की जाएगी।
आत्महत्या का प्रयास
सारदा चिटफंड घोटाले में धन गंवाने के बाद खेतों में काम करने वाले एक मजदूर ने आज कथित रूप से आत्महत्या करने का प्रयास किया। पुलिस ने कहा कि 16 वर्षीय शहनूर रहमान ने आज सुबह अपने घर पर कीटनाशक पीकर जीवनलीला समाप्त करने का प्रयास किया। सूत्रों ने कहा कि उसने सारदा चिटफंड समूह में 75,000 रुपये का निवेश किया था जिसमें उसे ज्यादा रिटर्न का प्रलोभन दिया गया था। पुलिस ने कहा कि करीब एक महीने पहले चिटफंड कंपनी के बंद होने के बाद से वह अवसादग्रस्त था। उसने काफी धन उधार लिया था और निवेश की परिपक्वता अवधि के बाद उन्हें चुकाने की उम्मीद कर रहा था। उसे जलपाईगुड़ी सदर अस्पताल में गंभीर स्थिति में भर्ती कराया गया है।

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