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ट्राई के नए दिशा निर्देशों का असर छोटी वीएएस कंपनियों पर
कोमल अमित गेरा /  May 05, 2013

दूरसंचार कंपनियों को मूल्य वर्धित सेवाएं (वीएएस) देने वाली छोटी कंपनियों को इन दिनों काफी बुरे दौर से गुजरना पड़ रहा है। रिंगटोन, कॉलर ट्यून, गेम, मनोरंजन और स्पोट्र्स जैसी सेवाएं मोबाइल सेवाप्रदाताओं द्वारा अपने उपभोक्ताओं को मुहैया कराई जाती हैं लेकिन दरअसल ये सेवाएं छोटी वीएएस कंपनियों द्वारा दी जाती हैं। पिछले कुछ सालों के दौरान इन कंपनियों की कमाई में भारी गिरावट आई है।

पिछले साल जुलाई में एक निर्देश जारी करते हुए भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) ने किसी वीएएस के सक्रिय किये जाने के 24 घंटे के भीतर ग्राहकों से इसके लिए एसएमएस, ई-मेल, फैक्स या लिखित अनुमति शर्त को जरूरी कर दिया। इसके अलावा ट्राई ने ग्राहकों की अनुमति के बाद ही सेवा शुल्क लेने की शर्त भी रख दी। नियामक ने स्पष्ट कर दिया कि अगर ग्राहक की अनुमति न मिले तो दूरसंचार कंपनियों को ऐसी सेवाएं रोक देनी चाहिए।

नए दिशा निर्देशों के जारी होने से परिचालकों द्वारा उपभोक्ताओं को वीएएस बेचने के लिए की जाने वाली कॉलों और एसएमएस पर रोक लग गई। हालांकि मोबाइल की स्क्रीन पर दिखने वाले वन लाइनर और बिल पर छपने वाले विज्ञापनों जैसे वीएएस के प्रचार के दूसरे साधनों के लिए छूट मिली हुई है। लेकिन फिर भी वीएएस प्रदाता कंपनियों के कारोबार पर काफी बुरा असर पड़ा है।

गोल्डफिंच मोबाइल सॉल्यूशंस के प्रबंध निदेशक और सीईओ न्यूटन बब्बर के मुताबिक एसएमएस और कॉलों पर प्रतिबंध लगाए जाने से कमाई कम हुई है। बब्बर कहते हैं, 'हमारी कमाई करीब 70 फीसदी तक कम हो चुकी है।Ó वह कहते हैं कि प्रतिफल में आने वाली गिरावट के कारण उनकी कंपनी अभी तक अपने मूलधन की भरपाई तक नहीं कर पाई है। इन छोटी के साथ कमाई बांटना दूरसंचार कंपनियों की इच्छा पर निर्भर करता है। वह कहते हैं कि जब काम अधिक होता है तब मामूली मार्जिन से भी काम चलाया जा सकता है लेकिन काम कम होने पर कम मार्जिन में काम करने से अस्तित्व को बनाए रखना मुश्किल हो
रहा है। 

मुंबई और चंडीगढ़ में कारोबार करने वाली कंपनी अल्ट्रुइस्ट टेक्रोलॉजीज के अनुज अग्रवाल कहते हैं कि प्रचार के अवसर कम होने से कमाई काफी हद तक कम हो गया है। अग्रवाल कहते हैं, 'हमारे मुनाफे पर काफी बुरा असर हुआ है। लेकिन अंतरराष्टï्रीय विस्तार की वजह से हम खुद को बचा पाए। स्वीडन की वीएएस प्रदाता टेलीजेंट के 2012 में हुए अधिग्रहण के बाद बाजार में व्याप्त अनिश्चितताओं से पार पाने में काफी हद तक मदद मिली है।Ó

अग्रवाल का मानना है कि दुनिया में एक बेहतरीन सॉफ्टवेयर डेवलपर की भारत की छवि की बदौलत देश को वीएएस कारोबार में भी मजबूती से पेश करने में मदद मिल सकती है। अपने विस्तार कार्यक्रम के तहत अग्रवाल की कंपनी दक्षिण अमेरिका में अधिग्रहण करने की योजना बना रही है और बातचीत अब अंतिम दौर है। सेल्युलर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के महानिदेशक  राजन मैथ्यूज कहते हैं ऐसी सेवाओं के लिए ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए सूचना का प्रसार बहुत ही जरूरी चीज है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि ट्राई की ये घोषणाएं ग्राहकों के लिहाज से भी ठीक नहीं हैं। इन दिशा निर्देशों में बदलाव की सिफारिश के लिए दूरसंचार उद्योग के लोग सरकारी विभागों से लगातार संपर्क में हैं। दूरसंचार उद्योग के कुल राजस्व में वीएएस की हिस्सेदारी करीब 10 फीसदी है। सूत्रों के मुताबिक वीएएस के जरिये प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से करीब 1 लाख लोगों को रोजगार मिलता है।

Keyword: Telicom Sector, VAS, मोबाइल सेवाप्रदाता, दूरसंचार कंपनियों,
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