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विधानसभा में नया विधेयक पारित
निवेशकों को चिट फंड कंपनियों की धोखाधड़ी से बचाने के लिए राज्य सरकार ने उठाया कड़ा कदम
बीएस संवाददाता / कोलकाता 04 30, 2013

पश्चिम बंगाल विधानसभा में वित्तीय संस्थानों में निवेश करने वालों के हितों की रक्षा के लिए नया विधेयक आज पारित हो गया। पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी सरकार ने राज्य में चिट फंड कंपनियों पर शिकंजा कसने के लिए विधानसभा में नया विधेयक पेश किया था। हालांकि इसके पहले पूर्ववर्ती वाम मोर्चा सरकार के कार्यकाल में पारित वेस्ट बंगाल प्रोटेक्शन ऑफ इंटरेस्ट ऑफ डिपॉजिटर्स इन फाइनैंशियल एस्टैबलिशमेंट बिल 2009Ó को वापस लेने का प्रस्ताव मतविभाजन के बाद पारित हुआ। इसके बाद सरकार ने इससे जुड़ा नया विधेयक सदन में पेश किया। विधेयक पारित कराने के लिए राज्य सरकार ने दो दिन के विशेष सत्र का अयोजन किया है।
पश्चिम बंगाल में सारदा समूह की चिट फंड कंपनी द्वारा लाखों निवेशकों को करोड़ों रुपये का चूना लगाने का मामला प्रकाश में आने के बाद राज्य सरकार चिट फंड कंपनियों पर शिकंजा कसने जा रही है। इसके लिए पूर्व में बने कानून को वापस लेकर सरकार ने नया विधेयक पारित कराया है।

विधेयक की विशेषता यह है कि इसमें इस तरह के घोटाले की छानबीन करने वाले 'सक्षम प्राधिकारीÓ को फिर से परिभाषित किया गया है। विधेयक में स्पष्टï किया गया है कि इस तरह के मामले की जांच आर्थिक अपराध शाखा के निदेशक के जरिये कारई जाएगी। साथ ही प्राधिकारी की सहायता के लिए अलग से एक व्यक्ति की नियुक्ति की जा सकती है और इसके लिए राज्य सरकार की ओर से अधिसूचना जारी की जाएगी। पुराने विधेयक में 'सक्षम प्राधिकारीÓ की दी गई परिभाषा के मुताबिक, कोलकाता के पुलिस आयुक्त, किसी वित्तीय प्रतिष्ठïान का अधिकारी या जिला अधिकारी को सक्षम अधिकारी के तौर पर मामले की छानबीन की जिम्मेदारी दी जा सकती है। यानी पहले के कानून में सक्षम प्राधिकारी की पहचान स्पष्टï नहीं की गई थी। नए विधेयक में मामले की छानबीन करने, संपत्ति और उसके प्रबंधन की जांच के अलावा संपत्ति जब्त करने का भी अधिकार दिया गया है।

राज्य के वित्त मंत्री अमित मित्रा ने कहा कि राज्य के लोगों के लिए यह बड़े शर्म की बात है कि 2003 में इसी तरह का विधेयक वाम मोर्चा सरकार की ओर से भी लाया गया था जो दोषपूर्ण और अपूर्ण था और जिसे राष्ट्रपति की मंजूरी नहीं मिली थी। वित्त मंत्री ने कहा कि पिछली वाम मोर्चा सरकार ने 2006 में विधेयक लौटाए जाने के बावजूद इसे वापस नहीं लिया बल्कि इसी मुद्दे पर 2008 में एक नया विधेयक पेश करना जरूरी समझा। यह विधेयक अंतत: विधानसभा से पारित हो गया था। उन्होंने कहा कि यह कानून भी लागू नहीं कराया गया। ऐसे में मौजूदा राज्य सरकार का यह कर्तव्य था कि वह वित्तीय धोखाधडिय़ों पर लगाम लगाने के मकसद से एक सख्त विधेयक लाए। मित्रा ने कहा कि नया विधेयक ज्यादा गंभीर एवं सख्त है।

नेता प्रतिपक्ष सूर्यकांत मिश्रा ने कहा कि विधेयक में एक सक्षम अधिकारी का जिक्र है लेकिन उसकी पहचान स्पष्ट नहीं है। उन्होंने विधेयक में कुछ संशोधन स्वीकार न करने पर राज्य सरकार को आड़े हाथ लिया। मिश्रा ने कहा कि चूंकि सारदा घोटाले ने दूसरे राज्यों को भी प्रभावित किया है, ऐसे में इसकी जांच सीबीआई को करनी चाहिए।

 

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