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बड़े पूंजीगत खर्च के लिए तैयार सिप्ला
कृष्ण कांत और रघु बालाकृष्णन / मुंबई April 28, 2013

देश की अग्रणी दवा कंपनियों में से एक सिप्ला देसी व विदेशी बाजार में बड़ी भूमिका निभाने के लिए तैयार है। पिछले पांच वर्षों में कंपनी ने क्षमता विस्तार में करीब 3000 करोड़ रुपये का निवेश किया है, जो अपनी समकक्ष कंपनियों के मुकाबले सबसे ज्यादा है। कंपनी ने यह रकम देश में सबसे बड़े विनिर्माण इकाई की खातिर किया है। इससे बिक्री, वितरण व विपणन में छोटे-छोटे निवेश के जरिए अपना कामकाज तेजी से आगे बढ़ाने में सिप्ला सक्षम हुई है।

विकास दर और देसी दवा बाजार के जोर पकडऩे के साथ ही यह कंपनी के लिए काफी अच्छा साबित हो सकती है। देश में मजबूत विनिर्माण से भी कंपनी को निर्यात बाजार में आक्रामकता के साथ आगे बढऩे में मदद मिलेगी। हाल के महीने में बड़ी दवा कंपनियों के नए रणनीतिक फैसले में यह नजर आ सकता है।

सिप्ला ने हाल में नए मुख्यालय के लिए मुंबई के लोअर परेल में ऑफिस स्पेस खरीदने में 270 करोड़ रुपये खर्चे हैं। इसके अलावा इसकी योजना एपीआई संयंत्र व उत्पाद के विकास (आरऐंडडी) पर वित्त वर्ष 2014 में 400 करोड़ रुपये झोकने की है।

सिप्ला के प्रबंध निदेशक वाई के हामिद ने हालिया साक्षात्कार में कहा था, 1995 में कुल राजस्व में निर्यात का हिस्सा महज 10 फीसदी था, जो आज 55 फीसदी है। अगले 2-3 सालों में कुल राजस्व में विदेशी बाजार का योगदान 80 फीसदी पर पहुंचने की संभावना है। हमारी सभी फैक्ट्रियां निर्यातोन्मुख हैं। कंपनी की विस्तार योजना के बारे में जानकारी देते हुए उन्होंने कहा, हालांकि सभी दूसरे देश अपने यहां फैक्ट्री लगाने की मांग करते हैं।

दक्षिण अफ्रीकी संयुक्त उद्यम सिप्ला मेडप्रो में बहुलांश हिस्सेदारी का अधिग्रहण की सिप्ला की कोशिश इसी दिशा का संकेत देता है। उस क्षेत्र में सिप्ला मेडप्रो पांच बड़ी दवा कंपनियों में शामिल है। पिछले महीने सिप्ला मेडप्रो का पूरा मालिकाना हक हासिल करने के लिए सिप्ला ने अपनी पेशकश में 17 फीसदी का इजाफा किया था। वित्त वर्ष 2013 में सिप्ला के पास करीब 1000 करोड़ रुपये की नकदी थी, ऐसे में रकम की समस्या नहीं है।

एचडीएफसी सिक्योरिटीज ने एक रिपोर्ट में कहा है कि प्रस्तावित अधिग्रहण से बाजार में इसकी स्थिति मजबूत होगी और स्थानीय विनिर्माण क्षमता विस्तार में मदद मिलेगी। साथ ही अन्य अफ्रीकी बाजार में भी इसका विस्तार होगा।

जापान व यूरोप में अपनी मौजूदगी को मजबूत बनाना सिप्ला के लिए वित्त 2014 की अन्य प्राथमिकताएं हैं।सिप्ला के प्रमुख (ट्रेजरी) अजय लुहारूका ने कहा, हम बेंगलूर, कुद्रमुख और पातालगंगा में अपनी एपीआई विनिर्माण क्षमता का विस्तार कर रहे हैं।

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