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मंदी को अवसर की तरह भुना रही अल्ट्राटेक
कृष्णकांत / मुंबई April 25, 2013

आर्थिक मंदी हर किसी के लिए मुसीबत लेकर आती है और इसकी पहचान राजस्व में स्थिरता, मामूली मुनाफा या मुनाफे में गिरावट की स्थिति और शेयर की कीमतों में गिरावट जैसे लक्षणों के आधार पर की जाती है। हालांकि कुछ कारोबारी ऐसे भी हैं जिन्हें चुनौतीपूर्ण आर्थिक माहौल के बीच भी अवसरों की भरमार दिख रही है और वे बकायदा इसका इस्तेमाल भी कर रहे हैं। जब मंदी के बादल हटेंगे तब मौका प्रतिस्पर्धा में सबसे आगे आने को होगी और ऐसा ही कुछ अल्ट्राटेक सीमेंट कर रही है।

जब अर्थव्यवस्था की स्थिति काफी मजबूत थी तब कंपनी ने जोरदार खर्च की मदद से अपने परिचालन को सशक्त किया और बचत खाते को मजबूती प्रदान की। कहा जा सकता है कि कंपनी ने बेहतर दिनों के दौरान अपनी स्थिति को मजबूत करने में कोई कसर नहीं छोड़ी और अब कंपनी अपनी मजबूत वित्तीय स्थिति का इस्तेमाल प्रतिस्पर्धा में आगे निकलने के लिए कर रही है। चालू वित्त वर्ष के अंत तक कंपनी का लक्ष्य भारत की सबसे बड़ी सीमेंट कंपनी बनने की है। पिछले छह महीनों के दौरान कंपनी 4,500 करोड़ रुपये की परियोजनाओं को शुरू कर चुकी है जबकि इसके अलावा 7,500 करोड़ रुपये की परियोजनाएं क्रियान्वयन के अलग अलग चरण में हैं। कंपनी ने इस साल जून तक उत्पादन क्षमता को बढ़ाकर करीब 5.8 करोड़ टन करने और वित्त वर्ष 2015 तक 6.25 करोड़ टन करने का लक्ष्य तय किया है।

बढ़ी हुई इस क्षमता के साथ आदित्य बिड़ला समूह की यह कंपनी होल्सिम समूह को पीछे छोड़ते हुए भारत की सबसे बड़ी कंपनी बन जाएगी। साल 2005 में एसीसी और अंबुजा सीमेंट का अधिग्रहण किए जाने के बाद से होल्सिम सीमेंट बाजार की सबसे बड़ी कंपनी है। अल्ट्राटेक की सालाना उत्पादन क्षमता  5.1 करोड़ टन है जबकि होल्सिम समूह की सालाना उत्पादन क्षमता 5.7 करोड़ टन है। इसमें समूह की दोनों कंपनियां एसीसी और अंबुजा सीमेंट का संयुक्त उत्पादन शामिल है। हालांकि क्षमता विस्तार के मामले में एसीसी और अंबुजा सीमेंट की रफ्तार धीमी है और फिलहाल उनका पूरा ध्यान मौजूदा क्षमता को बढ़ाने पर है। इस वजह से ही अल्ट्राटेक  को नई संभावनाएं नजर आ रही हैं और कंपनी रणनीति के तहत इन संभावनाओं का दोहन करने की योजना बना रही है।

अल्ट्राटेक सीमेंट के मुख्य कार्याधिकारी के सी बिड़ला ने कहा, 'हमारी इच्छा भारत में बाजार की अग्रणी कंपनी बनने की है।Ó कंपनी एक क्षेत्र में अपनी मौजूदगी को सशक्त करने में जुटी हुई है ताकि उद्योग जगत में मांग और आपूर्ति संतुलन को कम से कम बाधा पहुंचे। बिड़ला ने कहा, 'हमारा पहला विस्तार छत्तीसगढ़ में होगा जिससे पूर्वी भारत को आपूर्ति की जाएगी। फिर हम कनार्टक में हमारी परियोजनाओं को शुरू करेंगे और इससे दक्षिण भारत और महाराष्टï्र के बाजारों को आपूर्ति की जाएगी। इसके बाद हम राजस्थान में विस्तार करेंगे जिससे उत्तर पश्चिम भारत को आपूर्ति की जाएगी।Ó

मांग में आ रही कमी बिड़ला के लिए शायद ही चिंता का विषय है। उन्होंने कहा, 'सीमेंट खपत के लिहाज से लंबी अवधि के दौरान भारती के दीर्घकालिक विकास के दौरान सीमेंट उद्योग 8 फीसदी की सालाना चक्रवृद्घि दर से आगे बढ़ेगा। संयंत्र को बनाने में कम से कम तीन साल लगता है और फिर यह अगले 30 से 40 सालों तक काम करता है।Ó इससे सालाना 2.4 से 2.5 करोड़ टन की मांग बढ़ेगी जो कि अल्ट्राटेक की मौजूदा क्षमता का पचास फीसदी है। अल्ट्राटेक को लगता है कि अर्थव्यवस्था के वापस पटरी पर आने के बाद उसे अपनी प्रतिस्पर्धी कंपनियों की बाजार हिस्सेदारी पर कब्जा करने में मदद मिलेगी। वैसे भी जीडीपी में होने वाली 1 फीसदी की वृद्घि से सीमेंट की मांग में करीब करीब 1.2 फीसदी का इजाफा होता है।

विश्लेषकों के मुताबिक इस तरह से विकास को आगे बढ़ाने की राह में कुछ जोखिम भी है लेकिन शानदार बचत खाता और मजबूत नकद प्रवाह के दम पर अल्ट्राटेक इस स्थिति से निपटने में पूरी तरह से सक्षम है। चालू वित्त वर्ष के दौरान परिचालन से अल्ट्राटेक का नकद प्रवाह करीब 3,700 करोड़ रुपये का रहा और कंपनी के पास 4,800 करोड़ रुपये का नकदी भंडार है। एकीकृत आधार पर कंपनी पर कोई कर्ज नहीं है। बिड़ला ने कहा, 'हमारा कर्ज और इक्विटी अनुपात 1:1 है और इसकी मदद से हम आसानी से हर वर्ष 7,000 करोड़ रुपये की नई परियोजनाओं को शुरू कर सकते हैं।Ó

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