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खामोश हुर्ई खनखनाती आवाज
स्मृतिशेष: शमशाद बेगम (1919-2013)
बीएस संवाददाता /  04 24, 2013

हिंदी फिल्मों के तमाम गीतों को अपनी खनकती आवाज से  सुरीला बनाने वाली शमशाद बेगम के स्वर हमेशा के लिए खामोश हो गए। मंगलवार रात को उनका देहांत हो गया। वह 94 वर्ष की थीं। हिंदी सिनेमा में संगीत के स्वर्णिम दौर की साथी रहीं बेगम ने कई सदाबहार गाने गाए, जो आज भी लोगों की जुबान पर चढ़े हुए हैं। उनके निधन पर तमाम हस्तियों ने शोक व्यक्त किया है। शमशाद बेगम की बेटी उषा रात्रा ने बताया, 'वह पिछले कुछ महीनों से अस्वस्थ थीं। बीती रात मुंबई के पोवई के हमारे घर में उनका निधन हो गया। उनके जनाजे में सिर्फ कुछ मित्र मौजूद थे।Ó

यूं तो उन्हें कई सदाबहार नगमे गाए लेकिन उनमें 'कहीं पे निगाहें कहीं पे निशानाÓ, 'मेरे पिया गए रंगूनÓ, 'कभी आर कभी पारÓ और 'कजरा मुहब्बत वालाÓ जैसे गाने खासतौर से प्रमुख हैं। उनके गानों की लोकप्रियता का अंदाज इसी बात से लगाया जा सकता है कि आज भी उनके गानों के रीमिक्स बनाए जाते हैं। उनके पति गणपत लाल बट्टïो वर्ष 1955 में गुजर गए थे।

उसके बाद से ही बेगम अपनी बेटी और दामाद योग रात्रा के साथ मुंबई में रह रही थीं। उनकी बेटी ने बताया, 'अपने जमाने की शीर्ष गायिकाओं में से एक होने के बावजूद उन्होंने उद्योग जगत की चकाचौंध से खुद को दूर रखा था क्योंकि वह सुर्खियों में रहना पसंद नहीं करती थीं। मेरी मां कहा करती थीं कि कलाकार कभी नहीं मरते। वह चाहती थीं कि लोग हमेशा उन्हें उनके गीतों की वजह से याद रखें।Ó

शमशाद बेगम का जन्म 14 अप्रैल 1919 को पंजाब के अमृतसर में हुआ था। लाहौर के पेशावर रेडियो पर 16 दिसंबर 1947 को पहली बार उन्होंने अपनी आवाज का जादू बिखेरा, जिसने लोगों को उनकी आवाज का दीवाना बना दिया। उन्होंने हिंदी, बांग्ला, मराठी, गुजराती, तमिल और पंजाबी भाषा में ढेरों गीत गाए हैं।

उन्होंने अपने समय के शीर्ष संगीतकारों के साथ काम किया जिनमें गुलाम हैदर, नौशाद और ओ पी नैयर शामिल हैं। गाना बचपन से उनका शौक था लेकिन पारंपरिक विचारों वाले उनके परिवार ने उन्हें उस वक्त इसके लिए प्रोत्साहित नहीं किया। यह उनके चाचा ही थे, जिन्होंने उनके पिता को उन्हें गाने देने के लिए मनाया।

जल्द ही रिकॉर्डिंग कंपनी जेनोफोन के साथ उनका एक करार हो गया। उनके पिता ने उन्हें इसी शर्त पर गाने की मंजूरी दी कि एक तो वह फोटो नहीं खिंचाएंगी और बुरका पहन कर ही गाएंगी।

वर्ष 1934 में महज 15 साल की उम्र में गणपत लाल बट्टïो के साथ शादी होने के बाद भी उन्होंने अपने पिता की इच्छा का पूरा सम्मान किया। बेगम ने उस्ताद गुलाम हैदर के निर्देशन में कई गाने गाए। उन्होंने दलसुख पंचोली की पंजाबी फिल्म 'यमला जटÓ फिल्म के गीत गाए जिसका निर्देशन हैदर ने किया था।

हैदर ने उनसे 'जमींदारÓ, 'पूंजीÓ और 'शमांÓ जैसी फिल्मों में गाने का मौका देकर उनकी हौसलाअफजााई जारी रखी। उनके गीत अक्सर आकाशवाणी के लाहौर केंद्र से भी प्रसारित होते थे। शमशाद के एल सहगल की फिल्मों की प्रशंसक थी और उन्होंने बताया था कि उन्होंने सहगल की 'देवदासÓ फिल्म 14 बार देखी।  उनकी आवाज के जादू को देखकर निर्देशक महबूब खान ने 'तकदीरÓ (1943) फिल्म में बेगम से गीत गवाए।

खान ने इस फिल्म में अदाकारा के रूप में नरगिस को पेश किया था। जल्द ही बेगम आजादी से पहले रफीक गजनवी, अमीर अली, पंडित गोबिनराम, पंडित अमरनाथ, बुलो सी रानी, राशिद अत्रे, एमए मुख्तार जैसे अन्य संगीतकारों के लिए गाने लगी।  भारत पाकिस्तान विभाजन के बाद हैदर तो पाकिस्तान चले गए लेकिन बेगम ने मुंबई में ही बसने का फैसला किया। संगीतकार नौशाद ने 'अनोखी अदाÓ, 'मेलाÓ, 'दुलारीÓ, 'बाबुलÓ, 'दीदारÓ, 'जादूÓ और 'मदर इंडियाÓ जैसे फिल्मों में बेगम की आवाज को धुनों में पिरोया। यही वह वक्त था जब लता मंगेशकर और आशा भोंसले सिनेमा जगत में नई आवाज के रूप में उभर रही थी लेकिन बेगम की आवाज का जादू बरकरार रहा। उनकी प्रतिभा को सबसे पहले उनके स्कूल के प्राचार्य ने उस वक्त पहचाना जब वह प्राथमिक विद्यालय में पढ़ रही थी। उनकी आवाज से प्रभावित होकर उन्हें कक्षा की प्रार्थना के लिए मुख्य गायिका बना दिया गया। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा।  

निधन पर हस्तियों ने जताया शोक
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने  शमशाद बेगम के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए कहा कि वह असाधारण प्रतिभा और क्षमता की धनी फनकार थीं।  सूचना और प्रसारण मंत्री मनीष तिवारी ने कहा कि उनकी गायन शैली ने नए प्रतिमान स्थापित किए। फिल्म जगत ने एक प्रतिभाशाली गायिका को खो दिया। गायिका लता मंगेशकर ने ट्वीट किया, 'सुबह मुझे पता चला कि शमशाद बेगम हमारे बीच नहीं रहीं, यह सुनकर मुझे बहुत दुख हुआ, मैंने उनके साथ काफी फिल्मों में गाने गाए। वह बहुत अच्छी हंसमुख और सीधी सादी शख्सियत थीं। मैं उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करती हूं।Ó बेगम के निधन पर अमिताभ बच्चन ने कहा, 'कुछ बहुत ऐतिहासिक फिल्मी गीत गाने वाली शमशाद बेगम की सुनहरी आवाज अब शांत हो गई। उन्हें श्रद्धांजलि।Ó

Keyword: शमशाद बेगम,
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