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पांच ऐसे शेयर, जिन पर दांव मुनाफे का सौदा
जितेंद्र कुमार गुप्ता और राम प्रसाद साहू /  April 21, 2013

विकास एवं वित्त के प्रबंधन के संदर्भ में 2008 से पिछले पांच वर्ष का समय भारतीय उद्योग जगत के लिए बेहद कठिनाई भरा रहा है। वृद्घि दर में तेज गिरावट, नकदी संकट से भारत और वैश्विक दोनों के संदर्भ कई कंपनियां प्रभावित हुई हैं। इसका असर कंपनियों की शेयर कीमतों में भी दिखा है। बड़ी तादाद में शेयर और सूचकांक इन वर्षों में प्रभावित हुए हैं जिससे निवेशकों को निराशा हाथ लगी है। दरअसल कई शेयर तो मौजूदा समय में 2008 में दर्ज स्तरों से भी नीचे कारोबार कर रहे हैं।

इस कठिन हालात में यदि कोई कंपनी लगातार मुनाफा दर्ज करती है, लाभांश को बनाए रखती है, परिचालन से अच्छा नकदी प्रवाह अर्जित करती है और पूंजी पर मजबूत प्रतिफल (आरओई) हासिल करती है तो इस पर विशेष ध्यान दिए जाने की जरूरत है। यहां ऐसी पांच कंपनियों, जिन्होंने न सिर्फ इन शर्तों को पूरा किया है और अच्छा लाभांश मुहैया कराया है बल्कि उनके बहीखाते में कर्ज भी काफी कम है, पर दांव लगाना लंबी अवधि के लिए मुनाफे का सौदा हो सकता है।

आईएलऐंडएफएस इन्वेस्टमेंट मैनेजर्स
आईएलऐंडएफएस समूह की यह कंपनी निजी इक्विटी स्पेस में परिचालन करती है और बुनियादी ढांचा और रियल एस्टेट में कई थीमेटिक फंड चलाती है। इसने तेजी से विकास दर्ज किया है। वित्त वर्ष 2007 में इसका कारोबार 60 करोड़ रुपये था जो वित्त वर्ष 2012 में बढ़ कर 220 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। इस अवधि में सालाना मुनाफा 70-75 करोड़ रुपये रहा जिसे हलके व्यवसायों और परिचालन की कम लागत से मदद मिली। इससे कंपनी को आंतरिक नकदी प्राप्ति की वजह से लाभांश बरकरार रखने में मदद मिली। पिछली तीन से चार तिमाहियों में कंपनी अपना राजस्व और मुनाफा बढ़ाने में सफल रही है, हालांकि इसमें महज एक अंक की वृद्घि दर्ज की गई। मौजूदा स्तरों पर जहां मूल्यांकन उचित है वहीं यह शेयर 7.1 फीसदी की मजबूत लाभांश की पेशकश कर रहा है।
एनआरबी बियरिंग्स
हालांकि ऑटोमोबाइल सेगमेंट में सुस्ती को देखते हुए भारत के प्रमुख बॉल बियरिंग निर्माताओं को कठिन हालात का सामना करना पड़ रहा है, लेकिन एनआरबी बियरिंग्स पिछले तीन वर्षों से बिक्री और शुद्घ मुनाफा वृद्घि के संदर्भ में अपने प्रतिस्पर्धियों से आगे रही है। घरेलू ऑटो क्षेत्र में मंदी को देखते हुए हालांकि अधिक निर्यात से हाल की तिमाहियों में राजस्व को कुछ मजबूती मिली है। हालांकि वित्त वर्ष 2012 में खासकर ब्याज खर्च दोगुना होकर 15 करोड़ रुपये पर पहुंच जाने और मूल्यह्रïास में वृद्घि की वजह से समेकित लाभ में कुछ गिरावट देखी गई। वित्त वर्ष 2013 के 9 महीनों में मुनाफा और राजस्व दोनों में सुधार (5 से 6 फीसदी) दिखा। रीप्लेसमेंट बाजार से राजस्व भागीदारी में वृद्घि के साथ साथ निर्यात (मौजूदा समय में 15 फीसदी) और आर्थिक चक्र में तेजी की वजह से राजस्व वृद्घि को मदद मिलने की संभावना है। शेयर में गिरावट (6 महीनों में 25 फीसदी) को देखते हुए यह अच्छे नकदी प्रवाह और लाभांश के साथ अपने वित्त वर्ष 2014 के अनुमानों के पांच गुना से कम पर कारोबार कर रहा है।
आंध्रा बैंक
सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक वृद्घि एवं गैर-निष्पादित आस्तियों से जुड़े मुद्दों की वजह से सुर्खियों में बने हुए हैं। हालांकि व्यावसायिक वृद्घि अगली कुछ तिमाहियों में नरम बनी रहने का अनुमान है, सकारात्मक कारक यह है कि परिसंपत्ति गुणवत्ता मजबूत हो रही है और मार्जिन में सुधार आने की संभावना है। इस क्षेत्र में आंध्रा बैंक जो एक साल में 26 फीसदी गिरा है, मौजूदा समय में 6 फीसदी के लाभांश की पेशकश कर रहा है। 16 फीसदी के आरओई के साथ बैंक के लिए यह सकारात्मक है और यह शेयर वित्त वर्ष 2013 में अपनी अनुमानित बुक वैल्यू के 0.6 गुना पर कारोबार कर रहा है। अगले दो वर्षों के लिए आय वृद्घि 16-18 फीसदी के दायरे में रहने का अनुमान है।

गेटवे डिस्ट्रिपाक्र्स
पिछले दो महीनों में कंटेनर कारोबार में कुछ तेजी, हॉलेज शुल्कों में ताजा कमी, बाजार भागीदारी में बढ़त और नेटवर्क विस्तार ने गेटवे डिस्ट्रिपाक्र्स को विश्लेषकों के बीच पसंदीदा शेयर (लॉजिस्टिक सेगमेंट में) बना दिया है।  इसके अलावा लगभग 5 फीसदी के लाभांश ने भी इस शेयर का आकर्षण बढ़ा दिया है। अच्छे प्रतिफल अनुपात (14-16 फीसदी), परिचालन मुनाफा मार्जिन (25 फीसदी) और व्यावसायिक परिदृश्य को देखते हुए नकदी प्रवाह में तेजी आने की संभावना है। व्यवसाय के स्वरूप को देखते हुए कंपनी की बुक में मामूली कर्ज भी सकारात्मक है और इससे कंपनी को आर्थिक स्थिति में सुधार आने पर विकास के लिए निवेश की अनुमति मिलेगी।

जीएनएफसी

जीएनएफसी भारत की प्रमुख उर्वरक और औद्योगिक रसायन कंपनियों में शुमार है। श्रेष्ठï आरओई, शानदार आंतरिक नकदी प्रवाह ने इसे इस श्रेणी में पसंदीदा शेयर बना दिया है। अपने वित्त वर्ष 2014 की अनुमानित आय के महज 3 गुना पर शेयर का मूल्यांकन आकर्षक है। कंपनी की संभावित वृद्घि और उद्योग में मजबूत स्थिति को देखते हुए यह मूल्यांकन अच्छा है।

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