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कर चोरी : कोयला व इस्पात क्षेत्र अव्वल
वृष्टिï बेनीवाल / नई दिल्ली April 08, 2013

कर भुगतान नहीं करने वालों के खिलाफ वित्त मंत्रालय की सख्ती का असर दिखाई देता प्रतीत हो रहा है। कर अधिकारियों ने वर्ष 2012-13 के दौरान 2,510 करोड़ रुपये के उत्पाद शुल्क चोरी के 446 मामलों की पहचान की है। पिछले साल के मुकाबले यह 120 फीसदी अधिक है जब अधिकारियों ने 1,139 करोड़ रुपये के 40 मामलों की पहचान की थी।

कोयला, लोहा, स्टील, गैर लौह धातु जैसे क्षेत्रों में सर्वाधिक कर चोरी के मामले सामने आए हैं और इन मामलों की पहचान किए जाने से सरकार को उत्पाद शुल्क  की वसूली करने में मदद मिलेगी। इसके अलावा वर्ष 2012-13 में डीजीसीईआई (डायरेक्टर जनरल ऑफ सेंट्रल एक्साइज इंटेलिजेंस) ने 4,152 करोड़ रुपये के सेवा कर चोरी के 851 मामलों की पहचान की है जबकि पिछले वर्ष ऐसे मामलों की संख्या 452 थी और इसमें शामिल रकम 4,019 करोड़ रुपये थी। डीजीसीईआई पिछले साल के दौरान सेवा कर का भुगतान नहींं करने वालों से 857 करोड़ रुपये की रकम वसूल चुकी है। वसूली गई रकम पिछले साल 2011-12 में वसूली गई 433 करोड़ रुपये से दोगुनी है।

सेवा कर संग्रह के मामले में हमेशा से ही लक्ष्य से कम की वसूली की जाती रही है क्योंकि यहां पर करवंचना की प्रवृत्ति काफी अधिक है। अधिकांश सेवा प्रदाता उपभोक्ताओं से सेवा कर का भुगतान लेते हैं लेकिन सरकार को कर का भुगतान नहीं करते हैं। प्राधिकरण ने पिछले साल उत्पाद शुल्क चोरी के मामले में 1,016 करोड़ रुपये की वसूली की थी जो कि वर्ष 2011-12 के मुकाबले करीब 300 फीसदी अधिक है जब सरकार महज 255 करोड़ रुपये की ही वसूली कर पाई थी। यह पिछले 10 सालों के दौरान केंद्रीय उत्पाद शुल्क के मद में करीब 1,600 करोड़ रुपये की वसूली की गई है और यह रकम उससे करीब 36 फीसदी कम है।

अधिकारी ने कहा, 'सेवा कर के मामले में कर वंचना का मामला ज्यादा व्यापक है। बड़ी संख्या में सेवा कर का संग्रह किया गया लेकि न सरकार को उसका भुगतान नहींं किया गया। कई मामलों में सेवा हासिल करने वालों से सेनवैट क्रेडिट लिया गया लेकिन उसका भुगतान सरकार को नहींं किया गया और इस वजह से राजस्व संग्रह पर बुरा असर पड़ा।Ó वर्ष 2012-13 के दौरान समग्र तौर पर सरकार ने उत्पाद शुल्क और सेवा शुल्क को मिलाकर कुल 1,883 करोड़ रुपये की वसूली की जो कि पिछले साल के मुकाबले तीन गुनी अधिक और अब तक वसूली गई सर्वाधिक रकम है। पिछले साल सरकार ने दोनों करों के मद में 689 करोड़ रुपये की वसूली की थी।

सरकार करवंचना के मामलों की सख्ती से निगरानी कर रही है और उनके खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई है। पिछले वित्त वर्ष के दौरान सरकार ने करदाताओं को पत्र भेजकर उनसे पूछा था कि उन्होंने पिछले साल के मुकाबले इस बार कम सेवा कर का भुगतान क्यों किया है। इसके बाद से कई करदाताओं ने अपने बकाये कर का भुगतान किया। वर्ष 2012-13 के लिए संशोधित अनुमान 1.71 लाख करोड़ रुपये के मुकाबले उत्पाद शुल्क संग्रह में 11 फीसदी की कमी आई जबकि बजट अनुमान 1.94 लाख करोड़ रुपये रखा गया था।

Keyword: TAX, Finance Ministry, Income Tax कोयला, लोहा, स्टील, गैर लौह धातु,
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