बिजनेस स?टैंडर?ड - तेल कंपनियों के शेयरों पर एफआईआई का दांव
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तेल कंपनियों के शेयरों पर एफआईआई का दांव
दूसरी छमाही में ऑयल इंडिया, एचपीसीएल, आईओसी और बीपीसीएल में बढ़ाई हिस्सेदारी
चंदन किशोर कांत / मुंबई April 07, 2013

विदेशी संस्थागत निवेशक भारतीय तेल क्षेत्र की कंपनियों पर बड़ा दांव लगा रहे हैं। पिछले वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में सरकार की तरफ से नीतिगत सुधार के लिए उठाए गए कदमों को देखते हुए विदेशी निवेशकों की रुचि इस क्षेत्र में बढ़ी है।

भारत की नवरत्न कंपनियों में से एक ऑयल इंडिया में एफआईआई का रुझान सबसे ज्यादा देखा गया और इसकी वजह इस साल फरवरी में पेश इस कंपनी का ओएफएस रही। इस कंपनी में एफआईआई ने अपनी हिस्सेदारी वित्त वर्ष 2013 की दूसरी छमाही में 6.23 फीसदी बढ़ाकर 7.65 फीसदी कर दी। यानी 31 मार्च 2013 को इस कंपनी में एफआईआई की हिस्सेदारी 7.65 फीसदी थी।

इस कंपनी में सरकार ने ओएफएस के जरिए 10 फीसदी हिस्सेदारी बेची है और 510 रुपये के फ्लोर प्राइस पर 601 लाख शेयरों की पेशकश से करीब 3100 करोड़ रुपये जुटाए। इसके जरिए कुल 1540 लाख शेयरों की बोली लगी, जो ओएफएस के जरिए पेश शेयरों के मुकाबले करीब 2.5 गुना है। ऑयल इंडिया 1981 में भारत सरकार के पूर्ण स्वामित्व वाली कंपनी बनी थी। यह कंपनी तेल की खोज, कच्चे तेल व प्राकृतिक गैस के उत्पादन और कच्चे तेल के परिवहन के अलावा एलपीजी के उत्पादन से जुड़ी है।

इस बीच, कंपनी ने जनवरी-मार्च के दौरान दो बार अंतरिम लाभांश का ऐलान किया और यह रकम 23 रुपये प्रति शेयर रही। शुक्रवार को कंपनी का शेयर 2 फीसदी की बढ़त के साथ 530.9 रुपये पर बंद हुआ। यह शेयर जनवरी में 52 हफ्ते के उच्चतम स्तर पर पहुंचा था और तब इसने 600 रुपये का आंकड़ा पार कर लिया था।
एफआईआई की दूसरी पसंद हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन है। विदेशी निवेशकों ने इस कंपनी में अपनी हिस्सेदारी 3.5 फीसदी बढ़ाकर करीब 10 फीसदी कर ली है जबकि सितंबर 2012 में एफआईआई की कुल हिस्सेदारी 6.24 फीसदी थी। इसी तरह देश की सबसे बड़ी तेल विपणन कंपनी इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (आईओसी) में एफआईआई की हिस्सेदारी पिछले वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में 87 आधार अंक बढ़कर 1.91 फीसदी हो गई।

भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन का ताजा आंकड़ा स्टॉक एक्सचेंज पर उपलब्ध नहीं है। हालांकि दिसंबर तिमाही के आखिर तक इस शेयर में भी एफआईआई की हिस्सेदारी में बढ़ोतरी दर्ज की गई थी।

बाजार के प्रतिभागियों का कहना है कि अगर तेल से संबंधित सुधार सही तरीके से लागू किए जाते हैं तो इस क्षेत्र की तस्वीर काफी हद तक बदल सकती है।
दिलचस्प रूप से देसी संस्थागत निवेशकों ने तेल क्षेत्र की कंपनियों के शेयर बेचे हैं। ऑयल इंडिया को छोड़ दें तो डीआईआई ने आईओसी व एचपीसीएल में अपनी हिस्सेदारी घटाई है।

Keyword: FII, Navratna, OFS,
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