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डेट फंडों की परिपक्वता से जोड़ें अपने विभिन्न लक्ष्यों को
आपात काल में तरलता सुनिश्चित करने के लिए छोटी अवधि के डेट फंडों का करें इस्तेमाल, छोटी अवधि की जरूरतों के लिए एफएमपी भी होते हैं कारगर
सुरेश सदगोपन /  March 31, 2013

डेट फंड एक ऐसा खंड है जिसके बारे में खुदरा निवेशकों को पूरी जानकारी नहीं होती है। हालांकि डेट म्युचुअल फंडों में निवेश के फायदे भी होते हैं जो अन्य खंड की योजनाएं नहीं दे पाती हैं। डेट पोर्टफोलियो के निर्माण से पहले तरलता, अवधि, करोपरांत प्रतिफल, योजना के साथ जुड़े जोखिम और अन्य पहलुओं पर ध्यान देना आवश्यक है। ज्यादातर लोग बैंक और कंपनी डिपॉजिट, कर्मचारी भविष्य निधि (पीपीएफ), छोटी अवधि की बचत योजनाओं में निवेश को तवज्जो देते हैं। ये सभी योजनाएं निश्चित प्रतिफल देती हैं जो लोगों के लिए सहज होता है। हालांकि इस तरह की योजनाएं तरलता, कराधान आदि के मामले में जटिल होती हैं। वित्तीय योजनाकार के तौर पर डेट म्युचुअल फंडों में निवेश काफी फायदेमंद होते हैं क्योंकि निवेशकों की आवश्यकताओं के अनुसार ये अनुकूल बैठते हैं।

लंबी अवधि की निवेश आवश्यकताएं
लंबी अवधि के लिए कोष तैयार करना वित्तीय योजना प्रक्रिया का एक महत्त्वपूर्ण हिस्सा होता है। इससे न केवल सेवानिवृत्ति के बाद आसानी होती है बल्कि लंबी अवधि के लक्ष्यों जैसे बच्चों की शिक्षा, उनके विवाह आदि में भी मदद मिलती है। परिसंपत्ति आवंटन के हिस्से के तौर पर कुछ हिस्सा ऋण योजनाओं में होना चाहिए।
बॉन्ड और गिल्ट फंड सहित मध्यम से लंबी अवधि के डेट फंड अच्छे विकल्प होते हैं जो लंबी अवधि में 8-9 प्रतिशत के बीच प्रतिफल दे सकते हैं। इस समय इनकम फंड दहाई अंकों में प्रतिफल दे रहे हैं जो कुछ और समय के लिए जारी रह सकता है। यहां एक साल से अधिक के निवेश पर कराधान कम होता है। लंबी अवधि के पूंजीगत लाभ कर लगता है, जहां इंडेक्सेशन का लाभ उठाया जा सकता है। इंडेक्सेशन के बाद वास्तविक कर 4-5 प्रतिशत के बीच हो सकता है। लिहाजा, दूसरे साधनों के मुकाबले सकल और शुद्ध प्रतिफल में मामूली अंतर होता है।

तरलता और छोटी अवधि की आवश्यकताएं
तरलता संबंधी प्रावधान खर्च में त्वरित बढ़ोतरी के समय मददगार होते हैं। इसी वजह से लिक्विड फंड बेहतर विकल्प होते हैं। इस मकसद के लिए लाभांश वितरण विकल्प आजमाया जा सकता है। लेकिन बजट के बाद चीजें बदल गई हैं और अब यह 28.30 प्रतिशत है। यह कर म्युचुअल फंड कंपनियां भुगतान करती हैं और इस वजह से ग्राहकों को भी अप्रत्यक्ष तौर पर भुगतान करना होता है। जो लोग ऊंचे कर दायरे में आते हैं उन्हें इनकी सलाह दी जाती है। नीचे कर दायरे में आने वाले लोगों के लिए ग्रोथ ऑप्शन बेहतर विकल्प होगा। कई लोग वित्तीय प्रबंधन में चतुर होते हैं। इस तरह के लोग लंबी अवधि के लिए लिक्विडिटी मार्जिन का लाभ नहीं उठाते हैं। ऐसी परिस्थितियों में ग्रोथ ऑप्शन की सलाह दी जाती है क्योंकि एक साल के बाद इंडेक्सेशन के लिए आवेदन किया जा सकता है और कराधान भी कम हो जाता है। एक खास अवधि के लिए इन फंडों में निकास शुल्क जुड़ा होता है।

आपात फंड
आपात कोष का निर्माण कुछ खास खर्चों को ध्यान में रखकर किया जाता है। मिसाल के तौर पर बुजुर्ग माता-पिता के स्वास्थ्य के लिए कोष का निर्माण आवश्यक हो सकता है। इसके लिए मध्यम से लंबी अवधि के फंडों या सक्रिय रूप से प्रबंधित डेट फंडों के ग्रोथ ऑप्शन में निवेश किया जा सकता है। इस तरह ये फंड अल्ट्रा शॉर्ट-टर्म डेट फंड या शॉर्ट टर्म फंड की तुलना में अधिक प्रतिफल अर्जित कर सकते हैं।

निकट अवधि के लक्ष्यों के लिए योजना
निकट अवधि के लक्ष्य से यहां तात्पर्य तीन से छह महीने की जरूरतों से है। ऐसे में एक अल्ट्रा शॉर्ट टर्म डेट फंड आजमाया जा सकता है। लेकिन अगर प्रावधान छह महीने से अधिक के लिए है तो शॉर्ट टर्म डेट फंडों की मदद ली जा सकती है। अगर अवधि एक साल से अधिक है तो मध्यम अवधि के फंड पर भी विचार किया जा सकता है। निश्चित अवधि की आवश्यकताओं के लिए मंथली/क्वाटर्ली इंटरवल प्लान्स में भी निवेश किया जा सकता है।

भविष्य के लक्ष्यों के लिए योजना
जो लोग स्थायी प्रतिफल चाहते हैं उनके लिए फिक्स्ड मैच्योरिटी प्लान्स (एफएमपी) अच्छे विकल्प हो सकते हैं। इन योजनाओं में निवेश एक साल से अधिक समय के लिए होता है जिस वजह से सिंगल, डबल या ट्रिपल इंडेक्सेशन बेनीफिट का लाभ उठाया जा सकता है। इस लिहाज से यह कर बचत करने में मददगार साबित होता है। एफएमपी का इस्तेमाल छोटी अवधि के लक्ष्यों को पूरा करने में भी हो सकता है क्योंकि यह एक अवधि बाद परिपक्व होती है और रकम सीधे बैंक खाते में आ जाती है।
डेट फंडों का इस्तेमाल किसी भी अवधि की योजना के लिए हो सकता है।

(लेखक लैडर7 फाइनैंशियल एडवाइजर्स के संस्थापक हैं)

Keyword: Debt Fund, Invesment, Mutual Fund,
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