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बेहतर रहे हालात तो नए मुकाम पर पहुंचेगा शेयर बाजार!
सचिन मामबटा और समी मोडक / मुंबई 03 17, 2013

अमेरिका और यूरोप के केंद्रीय बैंकों की नरम मौद्रिक नीति से भविष्य में पोर्टफोलियो निवेश बढऩे की संभावना है, जिससे भारतीय शेयर बाजार वर्ष 2013 में नई ऊंचाई छू सकता है। इसके साथ ही भारतीय रिजर्व बैंक दरों में उम्मीद से ज्यादा कटौती करता है और कंपनियों की आय ज्यादा बढ़ती है तो देश में विदेशी संस्थागत निवेश (एफआईआई) और बढ़ सकता है। यहां शेयर सूचकांक अपनी रिकॉर्ड ऊंचाई से केवल 7 फीसदी पीछे है। लेकिन अमेरिका और यूरोप में मौद्रिक नीति कसी गई तो एफआईआई घट सकता है और राजनीतिक अनिश्चितता तथा डॉलर के मुकाबले रुपये में
गिरावट निवेशकों को परेशान कर सकती है।

मौद्रिक समीक्षा बैठक
निकट अवधि में सबकी निगाहें आरबीआई के गवर्नर डी सुब्बाराव पर टिकी हैं। नीतिगत दरों पर उनके कदम से ही बाजार की दिशा तय होगी। बाजार मान रहा है कि केंद्रीय बैंक रीपो दर में 25 आधार अंक ही घटाएगा, लेकिन बड़ी कटौती हुई तो बाजार दौड़ सकता है। बीएसई इंस्टीट्यूट की एक परिचर्चा में मोतीलाल ओसवाल फाइनैंशियल सर्विसेज के संयुक्त प्रबंध निदेशक रामदेव अग्रवाल ने कहा, 'ब्याज दरों में अप्रत्याशित कटौती से बाजार में तेजी आ सकती है।Ó
आय में इजाफा
कुछ विश्लेषकों का मानना है कि आरबीआई दलाल पथ को चकित करने में विफल रहा तब भी कंपनियों की आय में इजाफा होने भर से बाजार चढऩे लगेगा। ऐंबिट कैपिटल के मुख्य कार्याधिकारी एंड्रयू हॉलैंड ने कहा, 'कंपनियों की आय में 10 से 15 फीसदी इजाफे की उम्मीद है और बाजार भी उतना ही चढ़ सकता है।Ó 5 नवंबर 2010 को सेंसेक्स 21004.96 तक पहुंच गया था, जो उसका उच्चतम स्तर है। लेकिन उस स्तर से अभी वह करीब 1577.4 अंक नीचे है।  मॉर्गन स्टैनली के प्रबंध निदेशक रिधम देसाई कंपनियों की आय पर दांव लगा रहे हैं। उन्होंने बताया, 'अगले 12 महीनों में आय में व्यापक सुधार के संकेत हैं।Ó
विदेशी निवेश और बढ़ता घाटा
सरकार चालू खाते के घाटे और राजकोषीय घाटे को काबू में रखने का प्रयास कर रही है। कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से भी निवेशकों का हौसला बढ़ रहा है। इंडिया इन्फोलाइन के चेयरमैन निर्मल जैन ने कहा, 'कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से राजकोषीय घाटा और चालू खाते का घाटा कम करने में मदद मिलेगी और ज्यादा निवेश आएगा।Ó 2013 में अब तक 51,000 करोड़ रुपये का विदेशी संस्थागत निवेश हो चुका है।

चुनाव से पहले आर्थिक मंदी
स्थानीय निवेशकों और ब्रोकरों का कहना है कि सरकार महंगाई को काबू में करने के लिए मांग घटाने पर जोर दे रही है, जिससे बाजार शायद ही और चढ़े। स्टैंडर्ड चार्टर्ड सिक्योरिटीज के प्रबंध निदेशक रत्नेश कुमार ने कहा, 'वित्तीय संकट शुरू हुए पांच साल बीत गए लेकिन बाजार में तेजी की फिलहाल संभावना नहीं है।Ó

2013 में दांव
एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट के मुख्य निवेश अधिकारी नवनीत मुनोट ने कहा कि वह ऐसी छोटी कंपनियों पर दांव लगा रहे हैं जो बड़ी कंपनियों की तुलना में बेहतर प्रदर्शन कर रही हैं। उन्होंने कहा कि छोटी-मझोली कंपनियों में तेजी की संभावना है। हालांकि कुमार ने कहा कि बेहतर गुणवत्ता वाली कंपनियों पर भरोसा बनाए रखना समझदारी होगी।

अगले 12 महीनों में कंपनियों की आय में व्यापक सुधार के संकेत मिल रहे हैं, जिसका असर बाजार पर
भी दिखेगा।
रिधम देसाई, प्रबंध निदेशक, मॉर्गन स्टैनली

फिलहाल बाजार में तेजी का दौर आने की संभावना नहीं है। उच्च तेजी के लिए अभी थोड़ा इंंतजार करना पड़ सकता है।
रत्नेश कुमार, एमडी, स्टैंडर्ड चार्टर्ड सिक्योरिटीज

कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से राजकोषीय और चालू खाता घाटा कम करने में मदद मिलेगी और बाजार में एफआईआई का प्रवाह बढ़ेगा।
निर्मल जैन,  चेयरमैन, इंडिया इन्फोलाइन

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