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टाटा टेली को कोर्ट से राहत
अभिनीत कुमार / मुंबई March 13, 2013

उच्चतम न्यायालय ने उद्योग संगठन सेल्युलर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सीओएआई) और ए वी बिड़ला समूह प्रवर्तित आइडिया सेल्युुलर की बीते साल सितंबर में दायर की गई उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें 19 दूररसंचार सर्किलों के लिए हो रही 2जी नीलामी में टाटा टेलीसर्विसेज को आवंटित स्पेक्ट्रम को शामिल करने की मांग की गई थी।

जीएसएम तकनीक आधारित कंपनियों का प्रतिनिधित्व कर रहे उद्योग संगठन सीओएआई ने दलील दी थी कि टाटा टेली को स्पेक्ट्रम 10 जनवरी 2008 को जारी उसी समान प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से जारी किया गया था, जिसमें आवंटित 122 लाइसेंसों को निरस्त कर दिया गया था। आइडिया सेल्युलर ने 17 सितंबर 2012 को दायर याचिका में मांग थी कि उच्चतम न्यायालय सरकार को 302.5 मेगाहट्र्ज के बजाय पूरे स्पेक्ट्रम 514.8 मेगाहट्र्ज की नीलामी करने के निर्देश दे। आइडिया सेल्युलर ने कहा था कि इसमें टाटा टेलीसर्विसेज को आवंटित 83.6 मेगाहट्र्ज स्पेक्ट्रम भी शामिल किया जाए।

ये स्पेक्ट्रम तत्कालीन संचार मंत्री राजा के कार्यकाल में आवंटित हुए थे, जिसके तरीके पर अदालत में सवाल खड़े किए गए थे। सोमवार को पारित आदेश में उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों जी एस सिंघवी और के एस राधाकृष्णन ने पूर्व में 15 फरवरी के विस्तृत आदेश का हवाला देते हुए कहा, 'इस याचिका के संबंध में कोई अन्य आदेश देने की जरूरत नहीं है और इसे खारिज किया जाता है।Ó

उच्चतम न्यायालय ने 15 फरवरी को सिस्तेमा श्याम, वीडियोकॉन टेलीकॉम, टाटा टेलीसर्विसेज और आइडिया सेल्युलर की उनके लाइसेंस निरस्त किए जाने से संबंधित विस्तृत आदेश पर दायर की गई उपचारात्मक याचिका को खारिज कर दिया था।

उच्चतम न्यायालय द्वारा याचिकाएं खारिज किए जाने की मुख्य वजह यह थी कि टीटीएसएल को नए लाइसेंसों का आवंटन नहीं किया गया था। उन्हें यूनिफाइड ऐक्सेस सर्विस लाइसेंस में संशोधन के बाद जीएसएम स्पेक्ट्रम हासिल हुआ था, जिससे उन्हें दोहरी तकनीक इस्तेमाल की अनुमति मिली थी। टीटीएसएल के पास सीडीएमए आधारित प्रौद्योगिकी पर मोबाइल सेवा देने के लिए पहले से लाइसेंस था और संशोधन के बाद कंपनी को जीएसएम प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल की भी मंजूरी मिल गई थी।

इसके अलावा टीटीएसएल को इसी संशोधन के बाद रिलायंस कम्युनिकेशंस को जीएसएम स्पेक्ट्रम के आवंटन के बाद यह हासिल हुआ था। सीओएआई और आइडिया की याचिकाओं पर प्रतिक्रिया देते हुए दूरसंचार विभाग (डॉट) ने भी 20 सितंबर, 2012 को उच्चतम न्यायालय में एक शपथ-पत्र दिया था, जिसमें कहा गया था कि इन कंपनियों को दोहरी तकनीक के इस्तेमाल के लिए दी गई मंजूरी के फैसले में दखल देने की कोई जरूरत नहीं है, क्योंकि कंपनी को जीएसएम लाइसेंस 2जी मामले में रद्द किए गए लाइसेंसों से अलग है।

इससे पहले 20 अगस्त, 2012 को दूरसंचार न्यायाधिकरण टीडीसैट ने भी सीओएआई और भारती एयरटेल, वोडाफोन व आइडिया की याचिकाओं को खारिज कर दिया था, जिनमें डॉट को 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन मामले में उच्चतम न्यायालय के 122 लाइसेंस निरस्त करने के फैसले के क्रम में 15 फरवरी को जारी किए गए अपने आदेश को संशोधित करने के निर्देश देने का अनुरोध किया था।

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