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रिलायंस पर नरम पड़े सीओएआई के तेवर
सुरजीत दास गुप्ता और सौनक मित्रा / नई दिल्ली March 10, 2013

रिलायंस जियो इन्फोकॉम (आरजेआईएल) का पक्ष लेने की तोहमत जड़कर सरकार की खिंचाई करने और कानूनी विकल्प की बात कहने के कुछ ही दिनों बाद सेल्युलर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सीओएआई) ने अपना रुख नरम करने का निर्णय किया है। प्रमुख जीएसएम ऑपरेटरों के संगठन सीओएआई ने कहा कि वह इस मसले पर आगे नहीं बढ़ेगा और कानूनी विकल्प पर विचार करने का भी उसका कोई इरादा नहीं है।

सीओएआई का कहना है कि 2300 मेगाहट्र्ज बैंड (जिस पर रिलायंस 4जी सेवा देना चाहती है) पर वॉयस सेवा की पेशकश के लिए कोई उपकरण उपलब्ध नहीं है। सीओएआई के महानिदेशक राजन मैथ्यूज ने बिजनेस स्टैंडर्ड को बताया, 'हमारा मुख्य मकसद इस मामले को सरकार की नजर में लाना था। हम इस मसले पर आगे नहीं बढ़ेंगे और न ही कानूनी कार्रवाई का कोई इरादा है। अब सरकार को ही इस पर निर्णय करना है।

मैथ्यूज ने कहा, 'फिलहाल ऐसा कोई उपकरण नहीं है जिससे 2300 मेगाहट्र्ज बैंड पर वॉयस सेवा दी जा सके और इस तरह के उपकरण आने में अभी वर्षों लग सकते हैं। ऐसे में वॉयस सेवा की अनुमति से प्रतिस्पर्धा को लेकर हम नहीं डर रहे हैं। सीओएआई के कुछ सदस्यों का कहना है कि इस पर सहमति नहीं बनी और पत्र लिखने से पहले कई सदस्यों से इस बारे में संपर्क तक नहीं किया गया। सीओएआई की एक सदस्य कंपनी के मुख्य कार्याधिकारी ने कहा, 'हमसे इस बारे में संपर्क नहीं किया गया, जबकि हमारे कई सदस्यों के पास बीडब्ल्यूए स्पेक्ट्रम उपलब्ध है।

हालांकि मैथ्यूज ने पत्र लिखने के निर्णय का बचाव करते हुए कहा, 'एलटीई पर दूरसंचार विभाग को लिखे गए पहले पत्र के बाद ही यह दूसरा पत्र लिखा गया था। कई बार हम जल्द कदम उठाते हैं ताकि मंत्रियों के अधिकार प्राप्त समूह की बैठक से पहले हम अपनी बात रख सकें। संचार मंत्री कपिल सिब्बल ने कहा कि यह निर्णय दूरसंचार नियामक ट्राई और दूरसंचार आयोग की सिफारिशों के आधार पर लिया गया है, जिसमें कहा गया है कि कोई भी कंपनी एकीकृत लाइसेंस व्यवस्था को अपना सकती है और वॉयस सेवा दे सकती है।

आरजेआईएल ने सीओएआई के पत्र को विरोध करते हुए दूरसंचार विभाग को एक पत्र लिखकर कहा था कि सीओएआई लोगों को भ्रम में डालने की कोशिश कर रहा है।

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