बिजनेस स्टैंडर्ड - समय से पहले खत्म होगी पेराई
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समय से पहले खत्म होगी पेराई
गन्ने की कम उपलब्धता और क्षमता बढऩे से घटी पेराई की अवधि
दिलीप कुमार झा /  March 05, 2013

मौजूदा सीजन के दौरान चीनी मिलों में गन्ने की पेराई एक महीने पहले खत्म हो जाएगी। गन्ने की कम उपलब्धता की वजह से यह नौबत आनेवाली है। गन्ने के कम रकबे और जिन प्रदेशों में राज्य समर्थित मूल्य (एसएपी) की व्यवस्था नहीं है, वहांचीनी मिलों की क्षमता बढऩे से कच्चे माल की उपलब्धता कम पड़ गई है। इस कारण पेराई सीजन जल्द खत्म हो जाएगा।

पर्याप्त गन्ना आपूर्ति की स्थिति में चीनी मिलों में पेराई का सीजन अप्रैल तक चलता है। पिछले साल, खास तौर पर महाराष्टï्र और उत्तर प्रदेश (देश के दो सबसे बड़े चीनी उत्पादक राज्य) में मई तक पेराई चली थी क्योंकि गन्ने की फसल अच्छी हुई थी। लेकिन इस साल मार्च के बाद पेराई जारी रहने की संभावना बहुत कम है।
इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन (इस्मा) के महानिदेशक अविनाश वर्मा ने कहा, 'इस सीजन के दौरान अब तक करीब 50 मिलों ने पहले ही पेराई बंद कर रखी है। पिछले साल इस अवधि में 21 मिलों की पेराई बंद हुई थी।Ó कृषि मंत्रालय ने इस साल 8 फरवरी को जारी दूसरे अग्रिम अनुमान में कहा है कि पेराई सीजन 2012-13 में गन्ना उत्पादन घटकर 33.454 करोड़ टन रह जाएगा, जबकि पिछले सीजन में अंतिम तौर पर इसका अनुमानित उत्पादन 36.104 करोड़ टन रहा था। फिर भी, पिछले साल के दूसरे अग्रिम अनुमान में मंत्रालय ने 34.787 करोड़ टन गन्ना उत्पादन की बात कही थी, जबकि शुरुआती अनुमान में कहा गया था कि गन्ना उत्पादन 35.2 करोड़ टन रहेगा।

बहरहाल, इंडिया रेटिंग्स ने कम गन्ना उत्पादन के लिए प्रतिकूल मौसम को जिम्मेदार ठहराया है, जिससे दो प्रमुख चीनी उत्पादक राज्यों, कर्नाटक और महाराष्टï्र में गन्ने का रकबा कम रहा और चीनी उत्पादन भी घटने की आशंका है। इन राज्यों में गन्ने से चीनी की औसत रिकवरी क्रमश: 10 और 11 फीसदी है, जो देश में सबसे अधिक है। महाराष्टï्र में 168 में से 30 चीनी मिलों ने इस साल 4 मार्च को उत्पादन बंद कर दिया, जबकि पिछले साल इसी तारीख तक राज्य की 171 में से 2 मिलों ने उत्पादन बंद होने की घोषणा की थी। महाराष्टï्र स्टेट फेडरेशन ऑफ को-ऑपरेटिव शुगर फैक्टरीज के प्रबंध निदेशक अजित चौगुले ने कहा, 'खास तौर पर राज्य के मध्य और पूर्वी हिस्सों में इस साल सूखे की स्थिति है,   जिससे गन्ने की फसल प्रभावित हुई। कुछ नई चीनी मिलें भी चालू हुई हैं। इस कारण भी मौजूदा मिलों में गन्ने की उपलब्धता कम पड़ गई।Ó

इन सभी वजह से महाराष्टï्र में गन्ने की पैदावार करीब 19 फीसदी घटकर 6.25 करोड़ टन रह गई, जबकि पिछले साल इसी अवधि में 7.71 करोड़ टन गन्ने की उपज हुई थी। चूंकि इस साल गन्ने से चीनी की रिकवरी पिछले साल की 11.35 फीसदी से गिरकर 11.15 फीसदी रह गई। लिहाजा राज्य में चीनी का समग्र उत्पादन 72 लाख टन रहने की संभावना है, जबकि पिछले साल 91 लाख टन चीनी उत्पादन हुआ था। चौगुले के मुताबिक पेराई सीजन 2012-13 (अक्टूबर-सितंबर) के दौरान महाराष्टï्र में 10 नई निजी चीनी मिलें लगाई गईं, जबकि इसी अवधि में सहकारी क्षेत्र की 1-2 मिलें स्थापित की गईं। इसके चलते रोजाना 50,000 टन पेराई क्षमता बढ़ी। पुरानी मिलों की पेराई क्षमता रोजाना 4.37 लाख टन गन्ने की थी।

कर्नाटक में भी नए पेराई सीजन के दौरान रोजाना 8,000 टन की पेराई क्षमता बढ़ी है। इस्मा ने कहा है कि मौजूदा सीजन में राज्य की 22 मिलों ने परिचालन बंद कर दिया है। जिन मिलों का परिचालन जारी है, वहां भी पेराई सुस्त पड़ गई है।

लेकिन उत्तर प्रदेश की चीनी मिलों में गन्ने की पेराई फिलहाल जारी रहेगी। इस साल 28 फरवरी तक यहां की 119 मिलों का उत्पादन 50.4 लाख टन रहा। पिछले साल इस अवधि में केवल 4 फीसदी अधिक चीनी उत्पादन हुआ था। 

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