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कुंभ मेले से नहीं मिली यूपी की चीनी मिलों को राहत
संजीव मुखर्जी / नई दिल्ली March 04, 2013

इलाहाबाद में आयोजित कुंभ मेला एक बड़ा धार्मिक उत्सव है, लेकिन इस मेले से उत्तर प्रदेश की कई चीनी मिलों की बिक्री पर कोई खास असर नहीं पड़ा।
राज्य में 100 से ज्यादा चीनी मिले हैं। इस मेले को बड़े खपत केंद्र के रूप मेंं देखा जा रहा था, लेकिन इससे मिलों को मुनाफा नहीं हो सका। राज्य सरकार ने उचित मूल्य की दुकानों पर आपूर्ति बढ़ा दी थी। उत्तर प्रदेश देश का दूसरा बड़ा चीनी उत्पादक राज्य है। अक्टूबर में शुरू हुए 2012-13 चीनी विपणन सत्र में राज्य में 81 लाख टन से ज्यादा चीनी उत्पादन का अनुमान है, जबकि कुल 240 लाख टन चीनी उत्पादन का अनुमान है। कुंभ इलाके में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की आवक के चलते निजी कंपनियों का कारोबार बढऩे की उम्मीद थी, लेकिन खपत में भारी बढ़ोतरी के बावजूद कंपनियों की बिक्री में कोई खास बढ़ोतरी नहीं हुई।

उत्तर प्रदेश में स्थित एक चीनी मिल के वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, 'सामान्य दिनों में इलाहाबाद और आसपास के इलाकों में करीब 10-11 टन चीनी की रोजाना खपत होती है। लेकिन कुंभ मेले के 2-3 महीने के दौरान हम उम्मीद कर रहे थे कि बिक्री दोगुनी हो जाएगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।Ó कुंभ मेला 14 जनवरी को शुरू हुआ था, जो 55 दिन तक जारी रहते हुए 10 मार्च को समाप्त होगा। आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक इन 55 दिनों के दौरान 9 करोड़ श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है, जबकि 2001 में आयोजित पिछले कुंभ मेंं 3.7 करोड़ लोग आए थे। विशेष स्नान के अवसरों पर बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं।

अधिकारी ने कहा कि बिक्री बढऩे से चीनी मिलों को खासी मदद मिली होती, क्योंकि सामान्यतया जनवरी से मार्च तक की अवधि बिक्री के हिसाब से कमजोर मानी जाती है। अधिकारी ने कहा, 'ज्यादातर बड़े त्योहार दिसंबर तक खत्म हो जाते हैं। शीतल पेय बनाने वाले बड़े उपभोक्ता मार्च के मध्य से काम शुरू करते हैं। ऐसे में इस दौरान अतिरिक्त बिक्री से बहुत ज्यादा मदद मिलती।Ó कुछ अन्य अधिकारियों ने कहा कि सरकार ने राशन की दुकानों पर इस दौरान दोगुने से ज्यादा बिक्री बढ़ा दी, जो खुले बाजार में चीनी के भाव की तुलना में बहुत कम है। अधिकारी ने कहा, 'इलाहाबाद के आसपास करीब 20,000 से 30,000 क्विंटल चीनी की आपूर्ति हर महीने राशन की दुकानों के जरिये होती है, लेकिन कुंभ मेला की अïवधि में यह आपूर्ति बढ़ाकर 70,000 क्विंटल प्रतिमाह कर दी गई।Ó

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