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परदेसियों में घबराहट छाई, सरकार ने दी सफाई
बीएस संवाददाता / नई दिल्ली March 01, 2013

विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की फिक्र कम करने के लिए सरकार ने बजट में पेश एक अहम प्रस्ताव में बदलाव करने का फैसला किया है। इस प्रस्ताव में उन एफआईआई पर कर लगाने की बात कही गई है, जो मॉरीशस जैसे देशों से भारत में निवेश कर रहे हैं।

वित्त मंत्रालय ने टैक्स रेजिडेंसी सर्टिफिकेट (टीआरसी) प्रावधान पर आज स्पष्टïीकरण जारी किया। कर संबंधी लाभ हासिल करने के लिए इस सर्टिफिकेट की जरूरत पड़ती है। मंत्रालय ने कहा कि इस प्रस्ताव की भाषा से जो भी चिंता उठी हैं, उनका समाधान वित्त विधेयक पर चर्चा के दौरान कर दिया जाएगा।

इससे बाजार को भी खासी राहत मिली। सुबह के सत्र में तीन महीने के निम्नतम स्तर पर पहुंचा बंबई स्टॉक एक्सचेंज का सेंसेक्स मंत्रालय के बयान के बाद वापस उछला और करीब 57 अंक चढ़कर 18918.52 पर बंद हुआ। नैशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी भी 26.65 अंक चढ़कर 5719.70 पर बंद हुआ। एफआईआई ने भी आज 629 करोड़ रुपये के शेयरों की शुद्घ लिवाली की।

बाजार को अभी तो यही लग रहा है कि सरकार इस प्रावधान को हल्का कर रही है और कर लाभ हासिल करने के लिए दोहरा कराधान निषेध संधि (डीटीएए) की शर्तों को पूरा करने की बाध्यता खत्म करने जा रही है।

लेकिन निवेशक और कर सलाहकार वित्त विधेयक में टीआरसी के बारे में आखिरी प्रस्ताव का इंतजार करेंगे। फिलहाल उन्हें राहत महसूस हो रही है। अन्स्र्ट ऐंड यंग में कर एवं नियामक सेवाओं के विश्लेषक अनीश ठक्कर ने कहा, 'ज्यादातर चिंताएं अभी थम गई हैं। अभी कोई भी अपना रुख नहीं बदलने जा रहा है और प्रतिकूल रवैया दिखाना भी अभी जल्दबाजी होगी। प्रस्तावित विधेयक की भाषा में बदलाव के बाद ही कुछ होगा।'

वित्त मंत्रालय ने आज बताया कि आयकर अधिनियम में डीटीएए से संबंधित धारा 90 में संशोधन के प्रस्ताव से ही सभी लोग चिंतित है। उसने कहा कि धारा 90 की उपधारा (4) वित्त अधिनियम 2012 के जरिरये पिछले साल लागू की गई थी। उसमें कहा गया है कि डीटीएए के तहत लाभ का दावा करने के लिए टीआरसी दिखाना अनिवार्य है। डीटीएए के तहत आने वाले देश अपने नागरिकों को टीआरसी प्रमाणपत्र जारी करते हैं, जिसके तहत इस करार से जुड़े देशों में निवेश पर उन पर कर नहीं लगाया जाता है।

सरकार ने कहा, 'आयकर कानून की धारा 90 की उपधारा (5) के तहत इसी प्रावधान को जोडऩे का प्रस्ताव है। ऐसे में स्पष्ट है कि इस साल इसमें ऐसा कुछ भी शामिल नहीं किया जा रहा है जो नया हो बल्कि इसे पिछले साल ही शामिल करने की बात कही गई थी।Ó लेकिन उपधारा में जिस तरह की बातें कही गई हैं उससे निवेशकों को चिंता हो रही है। दरअसल, ऐसा होने पर संबंधित देशों के नागरिकों के टीआरसी पर भारत के कर अधिकारी सवाल उठा सकते हैं।

इस आशंका को दूर करने की कवायद के तहत वित्त मंत्रालय ने कहा, 'सरकार यह स्पष्टï करना चाहती है कि आयकर की धारा 90 में उपधारा (5) को शामिल करने की कोई मंशा नहीं है। करार के तहत शामिल देशों के नागरिकों द्वारा दिखाए गए टीआरसी को ही कर लाभ के लिए प्रमाण माना जाएगा और भारतीय कर अधिकारी टीआरसी और उसकी रिहायश के बारे में सवाल नहीं पूछेंगे।Ó

मंत्रालय ने आगे कहा कि जहां तक धारा 90 की उपधारा (5) की भाषा का सवाल है तो इस बारे में सभी चिंता का निदान वित्त विधेयक पर चर्चा के दौरान किया जाएगा। मॉरीशस से निवेश के मामले में भारत और मॉरीशस के बीच लंबित बातचीत पूरी होने तक परिपत्र नंबर 789 ही अमल में बना रहेगा। वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने बजट के बाद संवाददाता सम्मेलन में गुरुवार को कहा था कि डीटीएए के तहत कर लाभ का दावा करने के लिए टीआरसी ही पर्याप्त नहीं होगा।

हालांकि वित्त मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि वित्त विधेयक में इस साल नया कुछ भी नहीं होने जा रहा है और पिछले साल के प्रस्तावों को ही विधेयक में शामिल किया जाएगा। चिदंबरम ने कहा कि ऐसा संभव है कि प्रस्ताव और नई व्याख्या के चलते भम्र हुआ हो।Ó उन्होंने कहा कि सभी दोहरे कराधान निषेद्घ करार में दो शर्तें शामिल हैं। पहली, रिहायश की शर्त और दूसरी लाभार्थी की स्थिति। दोनों अलग शर्तें हैं। टीआरसी प्रमाणपत्र से पता चलता है कि संबंधित व्यक्ति उस देश में रहता है। इससे यह साबित नहीं होता कि वह व्यक्ति ही लाभार्थी है।

Keyword: FII, Finance Ministry, Union Budget, STT, Share Market,
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