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दुश्वार हुई बुनियाद की राह!
बीएस संवाददाता / नई दिल्ली February 27, 2013

आर्थिक समीक्षा में चिंता जताई गई है कि ऊर्जा क्षेत्र की वजह से बुनियादी ढांचे की तस्वीर खराब हो सकती है। इसमें खासतौर से ऊर्जा की कीमतों को लेकर चेताया गया है। समीक्षा में इस बात पर जोर दिया गया है कि चालू पंचवर्षीय योजना में बुनियादी ढांचे में प्रस्तावित 1 लाख करोड़ रुपये निवेश के लक्ष्य को हासिल करने के लिए ऊर्जा कीमतों और नीतियों को सही करना होगा।
समीक्षा में यह उल्लेख भी किया गया है कि 150 करोड़ रुपये से अधिक की कई बुनियादी ढांचा परियोजनाएं बिजली, कोयला और पेट्रोलियम क्षेत्र की वजह से अटकी पड़ी हैं। समीक्षा में कहा गया, 'बुनियादी ढांचा क्षेत्र की तरक्की में आ रहे अवरोधों को हटाने की दिशा में कदम उठाने की जरूरत है। खासतौर से ऊर्जा जिसमें बिजली केंद्रों तक ईंधन आपूर्ति सुनश्चित करने के अलावा बिजली वितरण कंपनियों की वित्तीय सेहत सुधारने के साथ ही नई अन्वेषण एवं लाइसेंसिंग नीति (नेल्प) पर स्पष्टïता की दरकार है।Ó हालांकि वर्ष 2017 तक भारत का कुल बिजली उत्पादन 67 करोड़ टन तेल के बराबर हो जाएगा फिर भी यह मांग से तकरीबन 29 फीसदी कम होगा, ऐसे में तेल आयात बढ़ेगा। ऊर्जा कीमतों को तार्किक बनाने की हिमायत करते हुए समीक्षा में कहा गया, 'ऊर्जा कीमतों को वैश्विक कीमतों से अलग रखना, विशेषकर तब जब आप आयात पर बहुत ज्यादा निर्भर हों तो शायद यह आदर्श स्थिति नहीं होगी क्योंकि इससे व्यापक आर्थिक समस्याएं उत्पन्न होंगी।Ó
समीक्षा में यही संकेत किया गया है कि ईंधन की कीमतों में तब बढ़ोतरी से नहीं हिचकना चाहिए जब वैश्विक और घरेलू कीमतों में बहुत ज्यादा अंतर आ जाए, जो पहले से ही काफी ज्यादा है। पिछले साल सकल कैलॉर्फिक वैल्यू (जीसीवी) आधारित तंत्र अपनाने से कोयले की कीमत बढ़ गई। पेट्रोलियम क्षेत्र में भी प्रशासित मूल्य तंत्र (एपीएम) 2002 में खत्म हो गया और वर्ष 2010 से विनियंत्रण की शुरुआत हो गई। पिछले महीने सरकार ने डीजल के मामले में भी तेल कंपनियों को हल्की-फुल्की बढ़ोतरी करने की इजाजत दे दी। समीक्षा में ताजा आंकड़े दर्शाते हैं कि अप्रैल से दिसंबर, 2012 के बीच कोयला उत्पादन में 6 फीसदी की वृद्घि से बिजली क्षेत्र के प्रदर्शन में जबरदस्त सुधार हुआ है जबकि इससे पिछले वित्त वर्ष में इसी अवधि में यह 3 फीसदी गिरावट का शिकार हुआ था। इस दौरान तापीय बिजली उत्पादन में 8.5 फीसदी की बढ़ोतरी हुई, जिसमें कोयला आधारित संयंत्रों से उत्पादन में 14 फीसदी की भारी बढ़ोतरी हुई। हालांकि गैस आधारित बिजली संयंत्रों से उत्पादन में 25 फीसदी और जल विद्युत आधारित संयंत्रों से उत्पादन में 14 फीसदी की कमी दर्ज की गई। बिजली क्षेत्र के लिए मिलने वाले बैंक कर्ज में पहली तिमाही में हुई 14 फीसदी की बढ़ोतरी दिसंबर में समाप्त हुई तीसरी तिमाही में बढ़कर 22 फीसदी हो गई।
हालांकि समग्र बुनियादी ढांचागत क्षेत्र को मिलने वाले कर्ज में पहली तिमाही में जहां 13.5 फीसदी की वृद्घि हुई थी वही तीसरी तिमाही में यह 16.5 फीसदी रही। समीक्षा में इस बात का भी उल्लेख किया गया है कि चालू वित्त वर्ष में अभी तक 'वैश्विक स्तर पर कायम जोखिम और कारोबारी माहौल में नरमीÓ की वजह से बुनियादी ढांचागत क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) प्रवाह मद्घम रहा। समीक्षा में सड़क परियोजनाओं, रेलवे के लिए कोष की कमी को पूरा करने, विमानन कंपनियों  और बंदरगाह क्षेत्र के लिए कुछ कदम उठाने पर भी जोर देने के लिएकहा गया है।

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