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बेहतर विकास की जताई आस
बीएस संवाददाता / नई दिल्ली 02 27, 2013

वित्त वर्ष 2012-13 की आर्थिक समीक्षा में सरकार ने भरोसा जताया है कि भारतीय अर्थव्यवस्था फिर पटरी पर लौटेगी और 6.1 से 6.7 फीसदी की विकास दर हासिल करेगी, जो चालू वित्त वर्ष के अग्रिम अनुमान 5 फीसदी से बेहतर है। हालांकि समीक्षा में कहा गया है कि यह बेहतर विकास दर सामान्य मॉनसून और मुद्रास्फीति में नरमी पर निर्भर होगी, जिससे सख्त मौद्रिक स्थिति में रियायत दी जा सकेगी और वैश्विक स्तर पर सुधार भी इसमें भूमिका अदा करेगी। 

बिना किसी लब्बोलुआब के 294 पृष्ठïों की समीक्षा में कहा गया है कि मौजूदा हालात काफी मुश्किल हैं और भविष्य तभी बेहतर हो सकता है, 'जब हम सबसे पहले उन सवालों के जवाब दे सकें, जो युवा भारतीयों के मन-मस्तिष्क पर छाए हुए हैं : मुझे नौकरी कहां से मिलेगी?Ó हाल ही में आए एक सर्वेक्षण में सामने आया था कि देश में पर्याप्त संख्या में रोजगार सृजन नहीं हो रहा है। समीक्षा के अनुसार देश में रोजगार सृजन की रफ्तार और उसकी गुणवत्ता संतोषजनक नहीं है और 'बेहतरीन तरीके से समावेशÓ के लिए अच्छी और ज्यादा उत्पादकता वाले रोजगार सुनिश्चित करना अहम है।

रोजगार पर दिए गए एक नए अध्ययन में कहा गया है भारत को कृषि के इतर उत्पादकता वाले रोजगार सृजित करने पर काफी ध्यान देना होगा, जिससे इसे भौगोलिक स्थितियों का लाभ उठाने में मदद मिलेगी और कृषि क्षेत्र में भी आजीविका सुधरेगी।

समीक्षा में दोहराया गया है कि भारत बाहरी माहौल को नजरअंदाज नहीं कर सकता है और उसे वित्तीय मजबूती के जरिये तेजी से घरेलू संतुलन को साधना होगा। समीक्षा के अनुसार अन्य नीतिगत अनिवार्यताओं में मांग घटाकर, कृषि उत्पादन में इजाफा करना है, जिससे भारतीय रिजर्व बैंक को ब्याज दरें घटाने का मौका मिले, इससे मुद्रास्फीति में नरमी लाने में काफी मदद मिलेगी। समीक्षा में उम्मीद जताई गई है कि कम ब्याज दरों के कारण उद्योग और सेवा क्षेत्र में निवेश गतिविधियों में तेजी आएगी, खासतौर पर नियामकीय, नौकरशाही और वित्तीय बाधाएं दूर करने के बाद।

वित्तीय मजबूती के अहम सवाल पर समीक्षा में कहा गया है कि असीमित सब्सिडी जैसी प्रतिबद्घताएं राजकोषीय विश्वसनीयता के लिए काफी नुकसानदेह हैं। विकास की जरूरत को देखते हुए समीक्षा में व्यय में कटौती के बजाय जीडीपी के अनुपात में कर संग्रह बढ़ाने के जरिये राजकोषीय घाटे को कम करने को तरजीह दी गई है। समीक्षा में कहा गया है, 'लंबी अवधि में वित्तीय मजबूती को बरकरार रखने के लिए जीडीपी के अनुपात में कर संग्रह को बढ़ाकर 11 फीसदी के स्तर से ऊपर ले जाना बेहद अहम है। Ó समीक्षा के अनुसार कर दरों में मामूली इजाफा करने के बजाय इसका आधार बढ़ाकर इस अनुपात को बढ़ाना ज्यादा कारगर साबित होगा। समीक्षा के अनुसार, 'ज्यादा से ज्यादा कर दरें फायदों पर असर डालती हैं, जिससे कर गतिविधियों में कमी आती है और कर अपवंचना को बढ़ावा मिलता है।Ó

 इस समीक्षा में सरकार के लिए यह संदेश दिया गया है कि भारतीय अर्थव्यवस्था मुश्किल हालात में है और वृहद अर्थव्यवस्था का संतुलन साधने और विकास को पटरी पर वापस लाने के लिए जल्द से जल्द कारगर कदम उठाए जाने की दरकार है। समीक्षा की समाप्ति इस सुझाव से की गई है, 'सबसे अहम जरूरत इस बात को स्वीकारने की है कि देश की अर्थव्यवस्था को सुधारने के लिए काफी कुछ करने की दरकार है और यह सुस्ती कदमों और सुधारों में तेजी लाने का संकेत है।Ó

आर्थिक समीक्षा की मुख्य बातें

  • 2013-14 में आर्थिक वृद्धि दर 6.1 से 6.7 फीसदी रहने का अनुमान
  • जीडीपी के अनुपात में कर संग्रह बढ़ाकर 11 फीसदी करने पर जोर
  • मार्च तक मुद्रास्फीति 6.2 से 6.6 फीसदी के बीच रहेगी
  • सब्सिडी बोझ कम करने के लिए डीजल और एलपीजी की कीमतें बढ़ाने की सिफारिश
  • कर आधार बढ़ाने तथा राजकोषीय घाटे पर अंकुश के लिए खर्चों की प्राथमिकता तय करने पर जोर
  • चालू खाते के घाटे पर काबू के लिए सोने का आयात कम करने पर ध्यान
  • बुनियादी ढांचा क्षेत्र की बाधाओं की वजह से उद्योग का प्रदर्शन प्रभावित
  • खुदरा क्षेत्र में एफडीआई से प्रौद्योगिकी में निवेश बढ़ेगा का रास्ता खुलेगा

 

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