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'हर क्षेत्र की जरूरतों का रखा गया खयालÓ
बीएस संवाददाता / नई दिल्ली February 26, 2013

अपना पहला रेल बजट पेश करने के तत्काल बाद रेल मंत्री पवन कुमार बंसल ने बजट के विभिन्न प्रस्तावों का जवाब दिया। संतोष तिवारी के साथ बातचीत में बंसल ने कहा कि के वल उच्च श्रेणी के सेवा शुल्क में इजाफा किया गया है। हालांकि रेलवे की वित्तीय सेहत में सुधार के लिए जरूरी और कड़े कदम उठाए जाने को लेकर वह उत्साहित नजर आए।

आपने र्ईंधन कीमत समायोजन की व्यवस्था पेश की है। इसके जरिए रेलवे को कितना राजस्व हासिल होगा?
1 अप्रैल 2013 से डीजल व बिजली की लागत पर कुल अतिरिक्त भार 5100 करोड़ रुपये रहने का अनुमान है। यह बोझ सिर्फ मालभाड़े पर डाला गया है। 1 अप्रैल से मालभाड़े में करीब 5 फीसदी का इजाफा होगा, जिससे 4200 करोड़ रुपये हासिल होंगे। यात्री किराए पर पडऩे वाले 850 करोड़ रुपये का भार रेलवे ने खुद सहन कर लिया है।

यात्री किराए में अदृश्य तरीके से इजाफा किया गया है। क्या यह सही है?
कुछ भी छुपाया नहीं जा सकता। आपको हर चीज के लिए संसद आना पड़ता है। सिर्फ सेवा शुल्क में इजाफा किया गया है। इससे व्यवस्था में सुधार आएगा। इससे होने वाली आय का बहुत ज्यादा महत्व नहीं है। मूल किराए में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है। सेवा शुल्क में बढ़ोतरी बेहतर सेवा मुहैया कराने के लिए की गई है।

सेवा शुल्क में इजाफे से कितना राजस्व हासिल होगा?
इससे आम आदमी को मदद मिलेगी। द्वितीय श्रेणी और स्लीपर क्लास का आरक्षण शुल्क नहीं बढ़ाया गया है। दूसरे क्षेत्र में भी की गई बढ़ोतरी मामूली है। इस प्रक्रिया में हमने बढ़े हुए आरक्षण शुल्क को समाप्त कर दिया है। आरक्षण शुल्क में इजाफे से सिर्फ 73 करोड़ रुपये हासिल होंगे।

आरक्षण रद्द कराने, आरक्षण और सुपर फास्ट चार्जेज से कितनी अतिरिक्त रकम मिलेगी?

हमें करीब 480 करोड़ रुपये हासिल होंगे।

सेवा शुल्क में किए गए इजाफे के बारे में जानकारी देने में आप झिझक क्यों रहे हैं?
मुझसे सवाल किया गया है और मैं उसका जवाब दे रहा हूं। मैं झिझक नहीं रहा हूं। हमने इसे बेहतर तरीके से अंजाम दिया है और मुझे भरोसा है कि यह स्वीकार्य होगा।

वास्तविक महंगाई के हिसाब से र्ईंधन समायोजन की व्यवस्था का मालभाड़े में बढ़ोतरी पर क्या असर पड़ेगा?
महंगाई के हिसाब से इसके आकलन का थोड़ा अलग मानदंड है, लेकिन मैं कह सकता हूं कि रेलवे की तरफ से होने वाली ढुलाई पर इस बढ़ोतरी का असर 4 पैसे से 8 पैसे प्रति किलोग्राम का होगा।

भाजपा ने इसे रायबरेली बजट करार दिया है। आप इसके जवाब में क्या कहेंगे?
वे अपने हिसाब से व्याख्या कर सकते हैं, लेकिन हमने जो कुछ कहा है वह इसी नजरिये से पेश नहीं किया गया है। मैंने हर क्षेत्र को वह दिया है, जो उसे मिलना चाहिए।

लग रहा है कि र्ईंधन कीमत के समायोजन की व्यवस्था से सिर्फ किराए बढ़ेंगे? क्या यह सही है?
मैंने कहा है कि ईंधन कीमत के समायोजन की व्यवस्था की प्रकृति डायनेमिक होगी। इसका झुकाव दोनों तरफ हो सकता है। अगर कीमतें कम होंगी, तो हम भी इसे घटाएंगे। हमने इसका प्रस्ताव रखा है और इस पर चर्चा भी होगी और मुझे उम्मीद है कि इस पर आम सहमति देखने को मिलेगी।

यात्री किराए को छुआ नहीं गया है, लेकिन रेलवे से सफर महंगा हो गया है। क्या यह सही नहीं है?
यात्री किराए में इजाफा नहीं किया गया है। गैर-आरक्षित श्रेणी को छुआ नहीं गया है। सिर्फ आरक्षण आदि में सेवा शुल्क में मामूली बढ़ोतरी की गई है। यह कुल सेवाओं का महज 3 फीसदी है।

किराया भाड़ा नियामक प्राधिकरण के गठन के प्रस्ताव का क्या हुआ?
हम इस दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। हमने अंतर-मंत्रालय में चर्चा के लिए नोट तैयार किया है। हम इसकी समयसीमा के बारे में नहीं बता सकते। रेल मंत्रालय ने कैबिनेट नोट तैयार किया है। संबंधित मंत्रालयों की चिंताएं दूर करने के बाद हम इसे कैबिनेट में पेश करेंगे।

भारतीय रेल का काम किस तरह से मनरेगा के साथ जुड़ेगा, जिसकी चर्चा बजट में की है?

रेलवे के पास 64,000 किलोमीटर का ट्रैक है। इस ट्रैक पर जो भी काम होगा, उसे मनरेगा के जरिए संपन्न किया जा सकता है, मसलन खुदाई इसका हिस्सा हो सकता है। मैंने ग्रामीण विकास मंत्री जयराम रमेश को पत्र लिखा था। उन्होंने इसका जवाब दिया है और हमारे सिद्धांत से वह सहमत हैं। मनरेगा के तहत लोग रेलवे ट्रैक पर काम कर सकते हैं।

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